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पश्चिम एशिया संकट का असर: 2025-26 में भारत का वस्तु निर्यात 2-3% घटने का अनुमान, फियो ने जताई चिंता

Thu, 09 Apr 2026 07:03 PM IST
Kumar Vivek बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Kumar Vivek Updated Thu, 09 Apr 2026 07:03 PM IST
सार

पश्चिम एशिया संकट और अमेरिका-ईरान तनाव के कारण वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के वस्तु निर्यात में दो से तीन प्रतिशत की गिरावट का अनुमान है। फियो अध्यक्ष के बयान और पूरी खबर पढ़ें।

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India export may decline amid West Asia crisis FIEO President SC Ralhan Statement US Iran ceasefire
भारतीय अर्थव्यवस्था। - फोटो : amarujala

विस्तार

वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया संकट के बीच दुनिया की आपूर्ति शृंखला बुरी तरह प्रभावित है। इस कारण वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश के वस्तु निर्यात में 2-3 प्रतिशत की गिरावट आने की आशंका है। फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस ने भी इस बारे में चिंता जाहिर की है। संस्था के अध्यक्ष एससी रल्हन ने कहा है कि इस संकट के चलते पिछले वित्त वर्ष के मार्च महीने में ही देश के निर्यात शिपमेंट में 7-8 प्रतिशत की कमी आ सकती है। 

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पश्चिम एशिया में संघर्ष से क्या परेशानी शुरू हुई?

निर्यात घटने का प्रमुख कारण 28 फरवरी को ईरान पर अमेरिका और इस्राइल की ओर से किया गया संयुक्त हमला है। इस लड़ाई ने पश्चिम एशिया में भारत के निर्यात पर बहुत बुरा असर डाला। इस तनाव के बाद भारत के लिए शिपिंग भाड़ा, हवाई परिवहन कार खर्च और बीमा लागत बहुत तेजी से बढ़े। पश्चिम एशिया के देशों से तेल और गैस की आवाजाही में भी रुकावट आई जिसके करण स्टील, प्लास्टिक और रबर जैसे कच्चे माल की कीमतें आसमान चढ़ गईं। ताजे फल और सब्जियों एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाने के लिए हवाई और समुद्री भाड़े की लागत अचानक बढ़ गईं।

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आशंकाओं के बीच राहत की क्या खबर?

वस्तु निर्यात में गिरावट की आशंका के बावजूद, फियो ने उम्मीद जताया है कि भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात 5-6 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का कुल निर्यात 825 बिलियन अमेरिकी डॉलर दर्ज किया गया था, जिसमें 437 बिलियन डॉलर का वस्तु निर्यात और 388 बिलियन डॉलर का सेवा निर्यात शामिल था। वाणिज्य मंत्रालय की ओर से 15 अप्रैल को निर्यात के अंतिम आंकड़े आधिकारिक रूप से जारी किए जाएंगे।

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खाड़ी देशों के साथ व्यापार क्यों चुनौतीपूर्ण हो गया?

इस भू-राजनीतिक संघर्ष ने खाड़ी क्षेत्र में माल भेजने वाले निर्यातकों के लिए गंभीर चुनौतियां पैदा कर दी हैं। 

  • व्यापारिक आंकड़े: वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का इस क्षेत्र के साथ 178 बिलियन डॉलर का द्विपक्षीय व्यापार था, जिसमें 56.87 बिलियन डॉलर का निर्यात और 121.67 बिलियन डॉलर का आयात शामिल था। 
  • प्रमुख बाजार: खाड़ी क्षेत्र के छह देश- यूएई, सऊदी अरब, ओमान, बहरीन, कतर और कुवैत भारत के लिए अहम बाजार हैं। यह क्षेत्र बासमती चावल, समुद्री उत्पाद और ताजी उपज के लिए सबसे बड़ा कृषि-निर्यात गंतव्य है। 
  • तनावग्रस्त सेक्टर्स: संकट के कारण पेट्रोलियम उत्पाद, रसायन, प्लास्टिक, इंजीनियरिंग सामान, चावल, फार्मास्यूटिकल्स और रत्न व आभूषण जैसे प्रमुख सेक्टर सबसे ज्यादा तनाव में हैं। 

सरकार ने इस महत्वपूर्ण बाजार में निर्यातकों को संघर्ष के प्रभाव से बचाने के लिए कई उपायों की पेशकश की है, क्योंकि 2024-25 में रत्न व आभूषण, चावल और फार्मा का निर्यात ही लगभग 57 बिलियन डॉलर था।

क्या युद्धविराम से राहत की उम्मीद है?

अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम की घोषणा से यह उम्मीद जगी है कि जहाजों की आवाजाही जल्द ही फिर से शुरू हो सकेगी। फियो अध्यक्ष ने कहा कि इस घोषणा से शिपिंग बाधाएं कम होंगी और निर्यातकों को तत्काल राहत मिलेगी, हालांकि निर्यात को पूरी तरह से स्थिर होने में अभी कुछ महीने लगेंगे।



उद्योग को बढ़ावा देने के लिए रल्हन ने सरकार से उच्च ब्याज दरों के मुद्दे को सुलझाने की अपील की है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ब्याज दरें 2-4 प्रतिशत हैं, जबकि भारत में सब्सिडी के बाद यह लगभग 8.25 प्रतिशत है और बिना कोलैटरल के 12 प्रतिशत तक पहुंच जाती है।

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