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India EU FTA: टैरिफ संकट में भारत-ईयू एफटीए से बदलेगा खेल, वैश्विक बाजार में भारत की पकड़ होगी और मजबूत

Sat, 24 Jan 2026 05:31 AM IST
शिवम गर्ग अमर उजाला ब्यूरो
अमर उजाला ब्यूरो Published by: शिवम गर्ग Updated Sat, 24 Jan 2026 05:31 AM IST
सार

भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) लंबे समय से चले आ रहे मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) को अंतिम रूप देने के करीब हैं। इसकी घोषणा मंगलवार को नई दिल्ली में भारत-ईयू समिट के दौरान होने की उम्मीद है। कई मायनों में खास यह समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ा सकता है। हालांकि, इसके पूरी तरह कार्यान्वयन में कम-से-कम एक साल लग सकता है।

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India-EU Free Trade Agreement: A Strategic Boost Amid Global Tariff Tensions
भारत-ईयू एफटीए - फोटो : Adobestock

विस्तार

भारत का यह पिछले चार वर्षों में 9वां व्यापार समझौता होगा, जो यह दिखाता है कि जब वैश्विक व्यापार ज्यादा संरक्षणवादी हो रहा है, तो देश वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत जगह बनाने की कोशिश कर रहा है। ईयू के साथ एफटीए कपड़ा और आभूषण जैसे भारतीय उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा दे सकता है, जो अगस्त अंत से लागू 50 फीसदी अमेरिकी टैरिफ से प्रभावित हुए हैं।

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  • थिंक टैंक जीटीआरआई का कहना है, भारतीय उत्पादों पर औसत ईयू टैरिफ करीब 3.8 फीसदी है, लेकिन टेक्सटाइल और कपड़ों जैसे लेबर आधारित सेक्टर पर करीब 10 फीसदी ड्यूटी लगती है।
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  • यह समझौता 2023 के जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज के तहत कपड़ों, फार्मास्यूटिकल्स और मशीनरी उत्पादों पर टैरिफ रियायतें वापस लेने के बाद खोई हुई प्रतिस्पर्धा को बहाल करने में मदद करेगा। उच्च टैरिफ के असर को भी कम करेगा।
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  • भारतीय पेशेवरों और आईटी सेवाओं के निर्यात के लिए यूरोपीय संघ के दरवाजे खुल सकते हैं।

चीन पर घटेगी यूरोपीय संघ की निर्भरता

  • ईयू के लिए यह सौदा आपूर्ति शृंखला में विविधता लाने और चीन पर निर्भरता कम करने में मददगार होगा। साथ ही, उसे भारत की तेजी से बढ़ती 4.2 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का भी लाभ मिलेगा।
  • ईयू को 2024-25 में भारत को 60.7 अरब डॉलर के सामान निर्यात पर करीब 9.3 फीसदी का वेटेड-औसत शुल्क देना पड़ा था। ऑटोमोबाइल, ऑटो पार्ट्स, केमिकल और प्लास्टिक पर ड्यूटी खासतौर पर ज्यादा है।
  • शुल्क कटौती से कारों, मशीनरी, एयरक्राफ्ट और केमिकल के क्षेत्र में मौके खुलेंगे। साथ ही, सबसे तेजी से बढ़ते बड़े बाजार में सेवाओं, खरीद और निवेश तक पहुंच बेहतर होगी।

अटके मुद्दे
एफटीए से कृषि-डेयरी को बाहर रखा गया है। भारत 95 फीसदी से ज्यादा सामानों पर ड्यूटी हटाने की ईयू की मांग का विरोध कर रहा है। ऑटो, शराब और स्पिरिट संवेदनशील मुद्दे हैं। भारत घरेलू विनिर्माण के जोखिम का हवाला देते हुए अचानक शुल्क कटौती के बजाय चरणबद्ध राहत या सीमित कोटा पर विचार कर रहा है।



भारत के लिए चुनौती
ईयू का कार्बन बॉर्डर लेवी भारतीय निर्यातकों के लिए टैरिफ फायदे को कम कर सकता है। रेगुलेटरी देरी, सख्त स्टैंडर्ड और सर्टिफिकेशन लागत जैसी उच्च गैर-टैरिफ बाधाएं भी हैं।

आगे क्या: समझौता संतुलित फायदे देगा या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कार्बन लेवी, सर्विसेज मोबिलिटी और गैर-टैरिफ बाधाओं को कैसे संभाला जाता है।

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