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5 पायदान चढ़कर 58वीं सबसे प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्था बना भारत
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
Updated Wed, 17 Oct 2018 05:31 PM IST
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विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने मंगलवार को दुनिया की सबसे प्रतिस्पर्धी अर्थव्यवस्थाओं वाले देशों की सूची जारी की है। इसमें भारत 58वें नंबर पर है। इस साल की रैंकिंग में भारत को पांच पायदान का फायदा हुआ है। पिछले साल 53वां नंबर था। सूची के मुताबिक, जी-20 देशों में भारत की रैंक में इस साल सबसे ज्यादा सुधार हुआ है। इसमें अमेरिका इस साल शीर्ष पर रहा। 2008 के बाद अमेरिका पहली बार नंबर-1 रहा है।
विश्व आर्थिक मंच की ओर से जारी 140 अर्थव्यवस्थाओं की सूची में अमेरिका के बाद सिंगापुर दूसरे और जर्मनी तीसरे स्थान पर है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट में भारत 62 अंकों के साथ 58वें स्थान पर है। विश्व आर्थिक मंच का कहना है कि जी-20 के सदस्य देशों में सबसे ज्यादा लाभ भारत को मिला है। वहीं, सूची में पड़ोसी देश चीन को 28वां स्थान मिला है।
कम क्षमता वाली नौकरशाही के कारण भारत पीछे
रिपोर्ट के अनुसार, ऊपरी और निम्न मध्य आय वर्ग में अच्छा प्रदर्शन करने वाले चीन और भारत जैसे देश उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के करीब पहुंच रहे हैं। साथ ही इनमें से कई को पीछे भी छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुसंधान और विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश के मामले में चीन औसत उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं से काफी आगे है। भारत भी इनसे ज्यादा पीछे नहीं है। भारत व्यापार के कम सृजन और दिवालियापन के लिए सिर्फ अपनी कम क्षमता वाली नौकरशाही के कारण पीछे है।
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विश्व आर्थिक मंच की ओर से जारी 140 अर्थव्यवस्थाओं की सूची में अमेरिका के बाद सिंगापुर दूसरे और जर्मनी तीसरे स्थान पर है। वैश्विक प्रतिस्पर्धा रिपोर्ट में भारत 62 अंकों के साथ 58वें स्थान पर है। विश्व आर्थिक मंच का कहना है कि जी-20 के सदस्य देशों में सबसे ज्यादा लाभ भारत को मिला है। वहीं, सूची में पड़ोसी देश चीन को 28वां स्थान मिला है।
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कम क्षमता वाली नौकरशाही के कारण भारत पीछे
रिपोर्ट के अनुसार, ऊपरी और निम्न मध्य आय वर्ग में अच्छा प्रदर्शन करने वाले चीन और भारत जैसे देश उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं के करीब पहुंच रहे हैं। साथ ही इनमें से कई को पीछे भी छोड़ रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि अनुसंधान और विकास जैसे क्षेत्रों में निवेश के मामले में चीन औसत उच्च आय वाली अर्थव्यवस्थाओं से काफी आगे है। भारत भी इनसे ज्यादा पीछे नहीं है। भारत व्यापार के कम सृजन और दिवालियापन के लिए सिर्फ अपनी कम क्षमता वाली नौकरशाही के कारण पीछे है।
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स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल में भारत आगे
रिपोर्ट के अनुसार, भारत स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल के अलावा अन्य सभी प्रतियोगी क्षेत्रों में आगे है। इन क्षेत्रों में श्रीलंका भारत के मुकाबले आगे है। द्वीपीय देश में सेहतमंद जीवन प्रत्याशा 67.8 वर्ष है। वहां के कामगारों में शिक्षा भी बेहतर है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और श्रीलंका ऐसे देश हैं, जो अपने प्रभावी ढांचागत प्रणाली पर भरोसा कर सकते हैं। भारत ने परिवहन संबंधी ढांचागत सुविधाओं और सेवाओं में ज्यादा निवेश किया है, जबकि श्रीलंका के पास सबसे आधुनिक ढांचागत सुविधाएं मौजूद हैं।
भारत को इन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत
विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी लाभों में उसके बाजार का आकार, नवोन्मेष (इनोवेशन) आदि शामिल हैं। हालांकि, देश को अपने श्रम बाजार (विशेष रूप से कामगारों के अधिकारों), उत्पाद बाजार (व्यापार शुल्क) और कौशल खासकर छात्र-शिक्षक अनुपात) में सुधार करने की जरूरत है।
ये हैं शीर्ष-10 देश
विश्व आर्थिक मंच की इस सूची में शीर्ष-10 देशों में अमेरिका, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, जापान, नीदरलैंड, हांगकांग, ब्रिटेन, स्वीडन और डेनमार्क शामिल हैं।
अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादकता मापने का पैमाना है सूचकांक
विश्व आर्थिक मंच का वैश्विक प्रतिस्पर्धी सूचकांक 4.0 किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की उत्पादकता और अन्य चीजें तय करने के लिए 12 मानदंडों को ध्यान में रखता है। इनमें संस्थाएं, आधारभूत संरचना, तकनीक, मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल, उत्पाद बाजार, श्रम बाजार, वित्तीय प्रणाली, बाजार का आकार, बिजनस डायनेमिक्स और इनोवेश शामिल हैं।
ब्रिक्स देशों की सूची में तीसरे नंबर पर भारत
देश अंक स्थान
ब्रिक्स देशों में चीन शीर्ष पर
ब्रिक्स देशों में चीन 72.6 अंकों के साथ सबसे ऊपर 28वें स्थान पर है। उसके बाद रूस 65.6 अंकों के साथ 43वें, 62 अंकों के साथ भारत 58वें, दक्षिण अफ्रीका 60.8 अंकों के साथ 67वें और ब्राजील 59.5 अंकों के साथ 72वें स्थान पर हैं। हालांकि, भारत अभी भी दक्षिण एशिया में महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
भारत को इन क्षेत्रों में सुधार की जरूरत
विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्रतियोगी लाभों में उसके बाजार का आकार, नवोन्मेष (इनोवेशन) आदि शामिल हैं। हालांकि, देश को अपने श्रम बाजार (विशेष रूप से कामगारों के अधिकारों), उत्पाद बाजार (व्यापार शुल्क) और कौशल खासकर छात्र-शिक्षक अनुपात) में सुधार करने की जरूरत है।
ये हैं शीर्ष-10 देश
विश्व आर्थिक मंच की इस सूची में शीर्ष-10 देशों में अमेरिका, सिंगापुर, जर्मनी, स्विट्जरलैंड, जापान, नीदरलैंड, हांगकांग, ब्रिटेन, स्वीडन और डेनमार्क शामिल हैं।
अर्थव्यवस्थाओं में उत्पादकता मापने का पैमाना है सूचकांक
विश्व आर्थिक मंच का वैश्विक प्रतिस्पर्धी सूचकांक 4.0 किसी भी देश की अर्थव्यवस्था की उत्पादकता और अन्य चीजें तय करने के लिए 12 मानदंडों को ध्यान में रखता है। इनमें संस्थाएं, आधारभूत संरचना, तकनीक, मैक्रोइकोनॉमिक स्थिति, स्वास्थ्य, शिक्षा और कौशल, उत्पाद बाजार, श्रम बाजार, वित्तीय प्रणाली, बाजार का आकार, बिजनस डायनेमिक्स और इनोवेश शामिल हैं।
ब्रिक्स देशों की सूची में तीसरे नंबर पर भारत
देश अंक स्थान
- चीन 72.6 28
- रूस 65.6 43
- भारत 62.0 58
- दक्षिण अफ्रीका 60.8 67
- ब्राजील 59.5 72
ब्रिक्स देशों में चीन शीर्ष पर
ब्रिक्स देशों में चीन 72.6 अंकों के साथ सबसे ऊपर 28वें स्थान पर है। उसके बाद रूस 65.6 अंकों के साथ 43वें, 62 अंकों के साथ भारत 58वें, दक्षिण अफ्रीका 60.8 अंकों के साथ 67वें और ब्राजील 59.5 अंकों के साथ 72वें स्थान पर हैं। हालांकि, भारत अभी भी दक्षिण एशिया में महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था बना हुआ है।