Income Tax Return: म्यूचुअल फंड निवेशकों को आयकर दाखिल करने में हो रही यह परेशानी, जानिए क्या है समाधान
चालू आईटीआर फाइलिंग सीजन के दौरान ऐसे करदाताओं की एआईएस रिपोर्ट में गड़बड़ी दिख रही है जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड की खरीद बिक्री की है। दरअसल उनकी एआईएस रिपोर्टिंग में एक ही म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन या बिक्री बिक्री एसएफटी (निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन) के तहत तीन बार रिपोर्ट की जा रही है। इस परेशानी से कैसे बचें, आइए जानें।
विस्तार
वित्तीय वर्ष 2024-25 का आयकर रिटर्न दाखिल करने के दौरान म्यूचुअल फंड की लेनदेन करने वाले निवेशकों को एक अजबोगरीब समस्या का सामना करना पड़ रहा है। उनकी एआईएस रिपोर्टिंग में एक चौंकाने वाली गडबड़ी दिख रही है। यह गड़बड़ी क्या है, इससे कैसे बचा जा सकता है, आइए जानते हैं, विस्तार से।
चालू आईटीआर फाइलिंग सीजन के दौरान ऐसे करदाताओं की एआईएस रिपोर्ट में गड़बड़ी दिख रही है जिन्होंने पिछले वित्तीय वर्ष में म्यूचुअल फंड की खरीद बिक्री की है। दरअसल उनकी एआईएस रिपोर्टिंग में एक ही म्यूचुअल फंड रिडेम्पशन या बिक्री बिक्री एसएफटी (निर्दिष्ट वित्तीय लेनदेन) के तहत तीन बार रिपोर्ट की जा रही है।
जानकारों के मुताबिक ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि तीनों प्रमुख रिपोर्टिंग संस्थाओं- एनएसडीएल, सीएएमएस और केएफआईएन- ने एक ही एमएफ बिक्री की विभाग को अलग-अलग रिपोर्ट दी है। जबकि असल में केवल एक ही बार म्यूचुअल फंड की बिक्री की गई थी। एक ही जानकारी तीन जगहों से आने के कारण अब एआईएस में बिक्री राशि का तीन गुना दिखाई दे रही है, जिससे भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और निवेशकों का पूंजीगत लाभ बढ़ा हुआ दिख रहा है।
यह ओवरलैपिंग डेटा-शेयरिंग तंत्र के कारण विभिन्न आरटीए (रजिस्ट्रार और ट्रांसफर एजेंट) या डिपॉजिटरी की ओर से डुप्लिकेट रिपोर्टिंग का एक उत्कृष्ट मामला है। जिसकी एआईएस तैयार करने के दौरान अनदेखी की गई है।
इस असुविधा से बचने के लिए निवेशक क्या करें?
जानकारों के अनुसार ऐसे करदाता और पेशेवर जो अपने आईटीआर फाइलिंग सॉफ्टवेयर में एआईएस डेटा के ऑटो-इम्पोर्ट पर भरोसा करते हैं, वे इस गड़बड़ी के कारण अंततः अपना तीन गुना बढ़ा हुआ एमएफ रिडेम्पशन की राशि की घोषणा कर सकते हैं। जिससे उनकी टैक्स की देयता पर असर पड़ सकता है। इस परेशानी से बचने के लिए उन्हें तब तक अपना आईटीआर दाखिल नहीं करना चाहिए जबतक कि निवेशक अपने वास्तविक म्यूचुअल फंड स्टेटमेंट या ब्रोकर रिपोर्ट के साथ इस परेशानी का क्रॉस सत्यापन न कर लें।
जानकारों के अनुसार निवेशकों को आईटीआर दाखिल करने समय हमेशा फॉर्म 26AS, एआईएस और मूल फंड हाउस या डीमैट स्टेटमेंट से म्यूचुअल फंड बिक्री का मिलान करना चाहिए। उन्होंने सलाह दी है कि एआईएस में दी गई प्रविष्टियों को आंख मूंदकर स्वीकार न करें, विशेष रूप से म्यूचुअल फंड लेनदेन के मामले में।