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Stock Market: दुनिया में भू-राजनीतिक तनाव कम होने से क्या बाजार के लिए बनेगा अनुकूल माहौल? यहां समझिए

Sat, 27 Jun 2026 05:41 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Sat, 27 Jun 2026 05:41 PM IST
सार

भारतीय शेयर बाजारों से महीनों की निराशा के बाद बाजार अब अच्छा प्रदर्शन करने की उम्मीद है, क्योंकि बेहतर होती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, उचित मूल्यांकन, विदेशी निवेशकों के शेयर बिक्री में कमी आने और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की वजह से शेयर बाजार के लिए अनुकूल माहौल बनता दिख रहा है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं। 

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Improved global economic conditions, reasonable valuations, reduced share selling by foreign investors
क्या बदलेगा शेयर बाजार का मिजाज? - फोटो : amarujala.com

विस्तार

भारतीय शेयर बाजारों में महीनों की निराशा के बाद बाजार अब अच्छा प्रदर्शन दिख सकता है, क्योंकि बेहतर होती वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां, उचित मूल्यांकन, विदेशी निवेशकों के शेयर बिक्री में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी की वजह से शेयर बाजार के लिए अनुकूल माहौल बन रहे हैं। पिछले कुछ महीने घरेलू शेयर बाजार के लिए चुनौतीपूर्ण रहे है, जहां जीडीपी और आय वृद्धि में मंदी, विदेशी पोर्टफोलिय निवेशक (एफपीआई) की लगातार निकासी और उच्च मूल्यांकन सहित पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव ने बाजार में कमजोरी को बढ़ाया है।

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क्रूड में नरमी और अमेरिका से समझौते की उम्मीद से क्या बदलेगा?

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के अनुसंधान प्रमुख विनोद नायर ने अमर उजाला डॉटकॉम से बातचीत में बताया, "वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों में तनाव का कम होना, कच्चे तेल की कीमतों में युद्ध से पहले के स्तर पर तेज गिरावट, होर्मुज स्ट्रेट में बेहतर होता आवागमन, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में प्रगति के बीच भारत और अमेरिका के व्यापार समझौते को लेकर बढ़ती उम्मीद से घरेलू निवेशकों के सेंटिमेंट को बढ़ावा मिला है। हालांकि बढ़ते महंगाई के दबाव और ग्रामीण मांग में कमी के बीच मॉनसून की असमानता को लेकर चिंताएं कम नहीं हुई हैं।"

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शेयर बाजार में तेजी - फोटो : amarujala.com

विदेशी निवेशकों की शेयर बाजार में खरीदारी के आंकड़े क्या कह रहे?

वेंचुरा के हेड ऑफ रिसर्च विनीत बोलिंजकर कहते हैं, वैश्विक भू-रानीतिक तनाव में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के साथ मजबूत घरेलू मैक्रो बैकग्राउंड को देखते हुए हम उम्मीद करते हैं, शॉर्ट टर्म में सतर्क और सकारात्मक आउटलुक बाजार में बना रहेगा। वहीं 25 जून को खत्म हुए सप्ताह में भारतीय बाजारों में विदेशी निवेशकों की मामूली खरीदारी देखी गई, जिसमें 25 जून को लगभग 380 करोड़ रुपये का प्रोविजनल कैश-मार्केट नेट विदेशी निवेशकों का इनफ्लो था, जबकि घरेलू निवेशक रैली को सपोर्ट करने वाले विशेष खरीदार बने रहे।

निवेश के लिए मैक्रो इकोनॉमिक संकेत बेहतर कैसे हो रहे?

वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के सीईओ पोनमुडी आर कहते हैं, कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट, ग्लोबल रिस्क सेंटिमेंट में सुधार और पश्चिम एशिया में रणनीतिक कोशिशों को लेकर लगातार उम्मीद से भारतीय इक्विटी मार्केट में इस सप्ताह और भविष्स में रिकवरी जारी रहेगी। भू-राजनितिक तनाव कम होने से कच्चे तेल की कीमतें लड़ाई से पहले के स्तर पर आ गईं, जिससे निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ, जबकि अमेरिका-ईरान के बीच बेहतर समझ से एनर्जी सप्लाई में रुकावटों की चिंता कम हुई। इसके अलावा, माइक्रोन की मजबूत कमाई और अच्छी गाइडेंस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) थीम को लेकर उम्मीद जगाई, जिससे ग्लोबल टेक्नोलॉजी स्टॉक्स में तेजी आई और ओवरऑल मार्केट सेंटिमेंट को और सपोर्ट मिला।

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Share Market - फोटो : PTI

क्या घरेलू बाजार के अनुकूल माहौल बन रहा?

आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज की एक रणनीतिक रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय शेयर  बाजार के महीनों के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद फिर से गति पकड़ने की संभावना है, क्योंकि सितंबर 2024 से बाजार पर दबाव डालने वाले कई कारक अब उलटने लगे हैं। ब्रोकरेज फर्म का मानना है कि बेहतर होती व्यापक आर्थिक परिस्थितियां, अधिक उचित मूल्यांकन, विदेशी निवेशकों की ओर से शेयरों की बिक्री में कमी और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के संयोजन ने शेयरों के लिए अधिक अनुकूल माहौल बनाया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि जोखिम अभी भी मौजूद हैं, लेकिन घरेलू बाजार के लिए कारकों का संतुलन लगातार अनुकूल होता जा रहा है।

पिछले कुछ महीनों से भारतीय शेयर बाजार में बिकवाली क्यों हो रही?

बीते कुछ महीनों में बाजार का उच्च मूल्यांकन रहा है। इसके अलावे जीडीपी और आय वृद्धि में मंदी, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) की लगातार निकासी, वैश्विक एआई इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरों के प्रति उत्साह ने भी निवेशकों का मूड खराब किया था। अमेरिकी टैरिफ और पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव जैसे बाहरी झटकों ने भी बाजार की कमजोरी में योगदान दिया है। इस कैलेंडर वर्ष में अब तक बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग नौ प्रतिशत की गिरावट आई है, जबकि विदेशी निवेशकों ने 24 जून तक भारतीय शेयरों से 2.73 ट्रिलियन रुपये की शुद्ध निकासी की।

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शेयर बाजार में गिरावट - फोटो : amarujala.com

गिरावट के बाद मूल्यांकन कैसे आकर्षक हो गए?

ब्रोकरेज फर्म के अनुसार, गिरावट के बाद मूल्यांकन काफी अधिक आकर्षक हो गया है। रिपोर्ट में कहा गया है, मूल्यांकन , लगभग 24 गुना के शिखर से घटकर लगभग 18 गुना हो गया है, इसके समानांतर, नाममात्र लाभ वृद्धि का दृष्टिकोण मजबूत दिख रहा है, मुद्रास्फीति निचले स्तर से ऊपर उठ रही है, साथ ही कंपनियों की मात्रा में मजबूती है और पूंजीगत व्यय चक्र में सुधार हो रहा है। रिपोर्ट का मानना है कि मौजूदा मूल्यांकन स्तर, मूल्यांकन मल्टीपल में और विस्तार के बिना भी, शेयर की कीमतों के आय वृद्धि के अनुरूप चलने की संभावना को बेहतर बनाते हैं। इसमें आगे कहा गया है कि मूल्यांकन सीमा का निचला सिरा वर्तमान में शेयर की कीमतों में 14-15 प्रतिशत की नाममात्र वृद्धि का अनुसरण करने की उच्च संभावना को दर्शाता है, यहां तक कि मूल्यांकन पुनर्मूल्यांकन के बिना भी।

किन जोखिमों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता?

हालांकि, रिपोर्ट ने चेतावनी दी है कि कुछ जोखिमों पर कड़ी निगरानी रखने की आवश्यकता है। प्रमुख चिंताओं में 2026 में अल नीनो जैसी मौसम संबंधी घटना की संभावना और इस वर्ष के अंत में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में और वृद्धि का जोखिम शामिल है, ये दोनों ही पूंजी प्रवाह और बाजार की भावना को प्रभावित कर सकते हैं। बाजार विशेषज्ञों का कहना है, वैश्विक संकेत अमेरिकी डेटा से तय होंगे, उसके बाद नॉन-फार्म पेरोल और बेरोजगारी के आंकड़े आएंगे, जो फेड रेट की उम्मीदों और कुल मिलाकर रिस्क लेने की क्षमता पर असर डालेंगे। 

घरेलू स्तर पर इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डेटा और जून पीएमआई की रीडिंग पहली छमाही की आय सीजन से पहले शुरुआती संकेत देंगे। कच्चे तेल की कीमतों में लगातार नरमी एक साफ मैक्रो पॉजिटिव माहौल बनाता है, जिससे महंगाई, फिस्कल और करंट अकाउंट की स्थिति बेहतर हो सकती है। इससे रिजर्व बैंक को पॉलिसी में अधिक लचीलापन मिल सकता है।

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