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फार्मा पर टैरिफ लगाने से अमेरिकियों पर पड़ेगा बोझ: हीरानंदानी बोले- भारत के लिए आत्मनिर्भर बनने का अवसर

Fri, 26 Sep 2025 01:00 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Fri, 26 Sep 2025 01:00 PM IST
सार

हीरानंदानी समूह के संस्थापक और अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने कहा कि फार्मा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से अमेरिकियों पर सबसे पहले असर पड़ेगा। भारत को इस चुनौती को दीर्घकालिक विकास के अवसर के रूप में लेना चाहिए। वहीं भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि भारत पर इस आदेश का असर पड़ने की संभावना नहीं है।

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Imposing tariffs on pharma will burden Americans: Hiranandani said an opportunity for India
फार्मा सेक्टर - फोटो : फ्रीपिक

विस्तार

फार्मा पर 100 प्रतिशत टैरिफ लगाने से सबसे पहले अमेरिकी प्रभावित होंगे। हीरानंदानी समूह के संस्थापक और अध्यक्ष निरंजन हीरानंदानी ने शुक्रवार को यह बात कही। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने ब्रांडेड और पेटेंटेड दवा उत्पादों पर 100 प्रतिशत टैरिफ की घोषणा की है। 

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ये भी पढ़ें: US: ट्रंप ने किया दवाइयों पर 100% टैरिफ लगाने का एलान, पहले दी थी छूट; भारत-अमेरिका पर क्या होगा असर?

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अमेरिका में भी महंगी होगी दवाएं

हीरानंदानी ने कहा कि सबसे पहले आपको यह समझना होगा कि अमेरिकियों पर सबसे पहले असर पड़ेगा। इसलिए अगर आप दवाओं पर कर लगा रहे हैं, तो अमेरिका में दवाएं अधिक महंगी हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि हां, हम प्रभावित होंग क्योंकि हम अमेरिका को बिक्री करते हैं। हम स्टील बेचते हैं, हम अन्य उपकरण बेचते हैं, हम फार्मास्यूटिकल्स बेचते हैं, ये सभी चीजें।

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इसे चुनौती नहीं अवसर के तौर पर देखें

हीरानंदानी ने कहा कि इसलिए जो कंपनियां यह व्यवसाय कर रही हैं, वे स्पष्ट रूप से प्रभावित होंगी। लेकिन आपको याद रखना होगा, अगर प्रधानमंत्री आत्मनिर्भर भारत की दिशा में काम कर रहे हैं, तो यह चुनौती एक अवसर है। 1 अक्टूबर, 2025 से लागू होने वाले अमेरिकी टैरिफ का उद्देश्य कंपनियों को देश में विनिर्माण इकाइयां स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित करना है। भारत को इस चुनौती को दीर्घकालिक विकास के अवसर के रूप में लेना चाहिए। हम 2030 की बात कर रहे हैं, हम 2047 की बात कर रहे हैं। 

आत्मनिर्भर भारत बनने के लिए ट्रंप हमें प्रेरित कर रहे

हीरानंदानी के अनुसार, देश की अपनी जनसांख्यिकी बढ़ रही है, साथ ही निर्यात के लिए मौजूद अन्य वैकल्पिक देशों की भी। उन्होंने कहा कि इसलिए मुझे लगता है कि आत्मनिर्भर भारत, विकसित भारत 2030 या 2047 में नहीं, बल्कि उससे पहले ही आ जाएगा। यह कदम एक तरह से यह अच्छा ही है। ट्रंप हमें तेजी से आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। यह सब भारत के लिए भविष्य का एक अवसर है और मैं टैरिफ से खुश नहीं हूं। जाहिर है, कोई नहीं चाहता कि टैरिफ लगे क्योंकि हमें अंतरराष्ट्रीय व्यापार पसंद है, लेकिन अगर वे भारत को चुनौती देना चाहते हैं, तो हम उसका सामना करेंगे।

भारत अमेरिका को 10 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात करता है

इस बीच भारतीय फार्मास्युटिकल अलायंस के महासचिव सुदर्शन जैन ने कहा कि यह अमेरिका के बाहर निर्मित पेटेंट और ब्रांडेड उत्पादों पर लागू है। यह जेनेरिक दवाओं पर लागू नहीं है। भारत अमेरिका को ज्यादातर जेनेरिक उत्पाद ही सप्लाई करता है। भारत अमेरिका को लगभग 10 अरब डॉलर की दवाओं का निर्यात करता है। इनमें मुख्य रूप से जेनेरिक उत्पाद और एपीआई शामिल हैं। इसलिए भारत पर इस आदेश का असर पड़ने की संभावना नहीं है।

जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ नहीं लगना चाहिए

उन्होंने कहा कि  हम लगातार इस बात की वकालत करते रहे हैं कि जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ नहीं लगना चाहिए, क्योंकि जेनेरिक दवाएं मार्जिन के बजाय लाभ पर आधारित होती हैं। और अगर जेनेरिक दवाओं पर टैरिफ लगाया जाता है, तो उसका बोझ मरीज पर पड़ेगा, और इससे मरीज पर स्वास्थ्य सेवा का बोझ बढ़ जाएगा। अमेरिका में मधुमेह, हृदय संबंधी ऑन्कोलॉजी उत्पादों और जठरांत्र संबंधी उत्पादों जैसी गंभीर बीमारियों के लिए दवाओं की उपलब्धता में जेनेरिक दवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। और ये महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य लागतों को पूरा कर रही हैं। 


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