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अगले वित्त वर्ष सात फीसदी जीडीपी रहने का अनुमानः आईएमएफ

Wed, 23 Oct 2019 06:48 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 23 Oct 2019 06:48 PM IST
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imf predicts india gdp to remain at seven percent in next financial year

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने एक बार फिर भरोसा जताया है कि अगले वित्त वर्ष 2020-21 में भारत की विकास दर सात फीसदी पहुंच जाएगी। आरबीआई की नरम मौद्रिक नीति और कंपनी कर में कटौती का लाभ जल्द ही मिलना शुरू हो जाएगा, जिसके बाद भारतीय अर्थव्यवस्था फिर रफ्तार पकड़ लेगी।

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आईएमएफ के डिप्टी डायरेक्टर (एशिया-प्रशांत) के जोनाथन ऑस्ट्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था इस साल के अनुमानित 6.1 फीसदी विकास दर से आगे बढ़कर अगले वित्त वर्ष में सात फीसदी पहुंच जाएगी। विकास दर बढ़ाने के सभी कारक स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं। मौद्रिक नीति का नरम रुख और सरकार की ओर से उठाए गए कदमों का असर दिखाई देने लगा है। 
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कंपनी कर में की गई हालिया कटौती और वित्तीय क्षेत्र की कमजोरी दूर करने वाले सरकारी उपायों से जल्द ही वृद्धि दर को रफ्तार मिलेगी। पिछले कुछ तिमाहियों से विकास दर में सुस्ती के सवाल पर उन्होंने कहा कि भारतीय परिदृश्य में आई सुस्ती को लेकर आईएमएफ सहित सभी विशेषज्ञ हैरान हैं। उन्होंने माना कि कॉरपोरेट जगत में नियामकीय अनिश्चितता और ग्रामीण क्षेत्रों में पूंजी संकट की वजह से अर्थव्यवस्था पर समग्र प्रभाव पड़ा है। 
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ऑस्ट्री ने कहा कि भारत के सेवा क्षेत्र में तेजी से आगे बढ़ने की उम्मीद है, खासकर सूचना प्रौद्योगिकी और संचार तकनीक के क्षेत्र में। भारतीय अर्थव्यवस्था में सेवा क्षेत्र की भागीदारी वर्ष 2,000 के 6.3 फीसदी से बढ़कर 2010 में 17.8 फीसदी हो गई है। 

अमेरिका-चीन व्यापार तनाव से भारत को लाभ नहीं

ब्रिटिश फर्म इकोनॉमिक इंटेलीजेंस यूनिट (ईआईयू) ने कहा है कि अमेरिका और चीन में जारी व्यापारिक तनाव का फायदा भारत को नहीं मिलेगा। भारत के बड़े पैमाने पर उत्पादन, सख्त श्रम कानून और भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया में मौजूदा नीतिगत बाधाओं के कारण वैश्विक निवेशकों को पूरी तरह आकर्षित करने में मुश्किल आएगी।



अभी तक अनुमान जताया जा रहा था कि अमेरिका-चीन व्यापार तनाव के कारण चीन छोड़ने वाली कंपनियों को भारत आकर्षित करेगा और वे अपना उत्पादन केंद्र यहां स्थापित करेंगी। ईआईयू के विश्लेषक सार्थक गुप्ता ने कहा कि नीतिगत बाधाओं के अलावा मुक्त व्यापार संधि का सीमित दायरा भी भारत की राह का रोड़ा बन सकते हैं। हालांकि, कंपनी कर कटौती का कुछ हद तक लाभ जरूर मिलेगा। 

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