{"_id":"67e5ad1a64f21227ab0cd437","slug":"if-payment-not-made-to-msme-within-45-days-then-reason-for-delay-will-have-to-be-given-2025-03-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"MSME: एमएसएमई को 45 दिन में नहीं किया भुगतान तो बताना होगा देरी का कारण; केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
MSME: एमएसएमई को 45 दिन में नहीं किया भुगतान तो बताना होगा देरी का कारण; केंद्र सरकार ने जारी की अधिसूचना
Fri, 28 Mar 2025 01:25 AM IST
शिव शुक्ला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शुक्ला
Updated Fri, 28 Mar 2025 01:25 AM IST
सार
एमएसएमई कंपनियों को खरीदारों द्वारा समय से भुगतान मिल जाए, इस बाबत केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार ने साफ किया है कि अब से किसी भी खरीदार को एमएसएमई कंपनियों को 45 दिन में भुगतान करना होगा। अगर वह ऐसा करने में असमर्थ हैं तो खरीदारों को देरी का कारण बताना होगा। केंद्र सरकार ने इस बाबत अधिसूचना जारी कर दी है।
विज्ञापन
एमएसएमई।
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सूक्ष्म, लघु और मध्यम यानी एमएसएमई कंपनियों को अगर कोई खरीदार 45 दिनों में भुगतान नहीं करता है तो उसे इसका कारण बताना अनिवार्य होगा। साथ ही, देय भुगतान की रकम भी बतानी होगी। केंद्र सरकार ने एक अधिसूचना में यह जानकारी दी है। केंद्र सरकार ने कहा, सभी कंपनियां जो एमएसएमई से वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति लेती हैं और जिनके आपूर्तिकर्ताओं को भुगतान तय तारीख या स्वीकृति तारीख से 45 दिनों से अधिक है तो उन पर यह नियम लागू होगा।
विज्ञापन
गौरतलब है कि एमएसएमई से खरीदी करने वाली कंपनियों को 45 दिन में भुगतान करना अनिवार्य है। अगर ऐसा नहीं होता है तो खरीदी करने वाली कंपनी के लिए यह भुगतान कमाई माना जाएगा और फिर इस पर टैक्स लगाया जाएगा। हालांकि, बाद में यह भुगतान करने पर इस टैक्स को वापस किया जा सकता है।
विज्ञापन
इसे भी पढ़ें- BIS Raid: अमेजन और फ्लिपकार्ट के गोदामों पर बीआईएस की छापेमारी, घटिया क्वालिटी के सामान जब्त किए गए
विज्ञापन
एक अप्रैल से बढ़ जाएगी कारोबार सीमा
एक अप्रैल से इन कंपनियों के लिए निवेश और कारोबार सीमा का वर्गीकरण भी 2.5 और 2 गुना बढ़ जाएगा। सूक्ष्म उद्योग के लिए पहले एक करोड़ रुपये की निवेश सीमा थी जो अब 2.5 करोड़ और कारोबार 5 करोड़ से बढ़कर 10 करोड़ रुपये हो जाएगा। छोटे उद्योग के लिए निवेश सीमा 10 से बढ़कर 25 करोड़ और कारोबार 50 से बढ़कर 100 करोड़ रुपये होगा। मध्यम उद्योगों के लिए यह 50 से बढ़कर 125 करोड़ और 250 करोड़ से बढ़कर 500 करोड़ रुपये हो जाएगी।
इसे भी पढ़ें- ATM: यूपीआई के दौर में भी SBI ने एटीएम से पांच साल में कमाए ₹2000 करोड़ से ज्यादा, जानें दूसरे बैंकों का हाल