ICRA: 104 अरब डॉलर पहुंच सकता है भारत का तेल आयात बिल, उच्च स्तर पर बनी रह सकती है क्रूड आयात पर निर्भरता
एजेंसी के मुताबिक चालू वित्त वर्ष में क्रूड की औसत कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से शुद्ध तेल आयात 12-13 अरब डॉलर बढ़ जाएगा। इससे जीडीपी के अनुपात में चालू खाते का घाटा (कैड) 0.3 फीसदी तक बढ़ जाएगा।
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भारत का शुद्ध कच्चा तेल आयात बिल चालू वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 101-104 अरब डॉलर पहुंच सकता है, जो 2023-24 में 96.1 अरब डॉलर था। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा, भारत की क्रूड आयात पर निर्भरता उच्च स्तर पर बने रहने का अनुमान है। अगर रूसी कच्चे तेल की खरीद पर छूट मौजूदा निम्न स्तर पर बनी रहती है और क्रूड की औसत कीमत 85 डॉलर प्रति बैरल रही तो देश का आयात बिल 104 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा। एजेंसी ने कहा, ईरान-इस्राइल संघर्ष बढ़ने से कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि की आशंका है। अगर ऐसा हुआ तो शुद्ध तेल आयात के मूल्य पर दबाव बढ़ सकता है। भारत अपनी जरूरतों का 85 फीसदी से अधिक क्रूड आयात करता है।
0.3% बढ़ सकता है कैड
एजेंसी के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में क्रूड की औसत कीमत में 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्धि से शुद्ध तेल आयात 12-13 अरब डॉलर बढ़ जाएगा। इससे जीडीपी के अनुपात में चालू खाते का घाटा (कैड) 0.3 फीसदी तक बढ़ जाएगा। अगर क्रूड 95 डॉलर प्रति बैरल पहुंचता है तो कैड बढ़कर जीडीपी के 1.5 फीसदी तक पहुंच सकता है।
इक्रा ने अपने विश्लेषण के आधार पर कहा, रूसी कच्चे तेल आयात के कम मूल्य से वित्त वर्ष 2023-24 के 11 महीने (अप्रैल-फरवरी) में भारत को 7.9 अरब डॉलर की बचत होने की उम्मीद है। यह आंकड़ा 2022-23 में हुई 5.1 अरब डॉलर की बचत से अधिक है।
15.2 फीसदी घटा कच्चा तेल आयात 11 महीने में
इक्रा के मुताबिक, 2023-24 के पहले 11 महीनों में भारत के कच्चे पेट्रोलियम और इससे जुड़े उत्पादों के आयात में 15.2 फीसदी की गिरावट रही। इसकी प्रमुख वजह...कच्चे तेल की वैश्विक कीमतों में नरमी के साथ रियायती दर पर रूसी क्रूड की खरीद में वृद्धि रही। इस अवधि में मात्रा के लिहाज से भारत के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी बढ़कर 36 फीसदी पहुंच गई, जो वित्त वर्ष 2021-22 में महज 2 फीसदी रही थी। सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत से आयात 34 फीसदी से घटकर 23 फीसदी रह गया।