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IBC: आईबीसी संशोधन विधेयक 2025 में दिवाला मामलों के तेज और कुशल समाधान के प्रावधान, जानिए इसके बारे में
Wed, 13 Aug 2025 01:08 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Wed, 13 Aug 2025 01:08 PM IST
सार
IBC: वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य दिवाला समाधान प्रक्रिया में देरी को कम करना और प्रशासन को मजबूत करना है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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लोकसभा में विपक्ष का हंगामा
- फोटो : ANI
विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार को लोकसभा में दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (संशोधन) विधेयक, 2025 पेश किया। इस बिल का उद्देश्य दिवाला समाधान प्रक्रिया में देरी को कम करना और प्रशासन को मजबूत करना है। सरकार की ओर से पेश किया गया नया विधेयक, दिवाला और शोधन अक्षमता संहिता (आईबीसी), 2016 में कई संरचनात्मक और प्रक्रियात्मक बदलावों का प्रस्ताव करता है। इसे व्यापक जांच के लिए एक प्रवर समिति को भेजा गया था।
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विधेयक में प्रस्तावित संशोधनों में एक लेनदार-आरंभिक दिवाला समाधान प्रक्रिया (सीआईआईआरपी) सहित नई अवधारणाओं को शामिल करने की कोशिश की गई है। यह समाधान और परिसमापन दोनों चरणों में आसान प्रावधानों और उपायों को लागू करने के लिए है।
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मौजूदा कानून के तहत, कॉरपोरेट दिवाला समाधान शुरू करने के लिए आवेदन 14 दिनों के भीतर स्वीकार किए जाने चाहिए। व्यावहारिक तौर पर इस प्रक्रिया में औसतन 434 दिन लगते हैं। कॉरपोरेट दिवाला समाधान प्रक्रिया (CIRP) को कारगर बनाने के लिए विधेयक में कई सुधार के प्रस्ताव हैं। इनमें परिसंपत्ति बिक्री की अनुमति देने के लिए समाधान योजनाओं की परिभाषा में बदलाव, समाधान पेशेवरों के प्रस्ताव में कॉरपोरेट आवेदक की भूमिका को सीमित करना, सरकारी बकाया की प्राथमिकता को स्पष्ट करना और CIRP आवेदनों की वापसी पर कड़े नियंत्रण लगाना शामिल है।
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संशोधनों में के तहत कार्यान्वयन के लिए एक निगरानी समिति का भी प्रस्ताव है और लेनदारों को ऐसी कार्यवाही शुरू करने का अधिकार दिया गया है। विधेयक में संशोधन लेनदारों की समिति (CoC) को परिसमापन की निगरानी करने और जरूश्रत पड़ने पर दो-तिहाई मत से परिसमापकों को बदलने का अधिकार भी देता है।
प्रक्रिया को तेज करने के लिए CIIRP को वित्तीय संस्थानों का चयन करने और एक समाधान पेशेवर की देखरेख में अदालत के बाहर दिवाला शुरू करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है। देनदार पेशेवर पर्यवेक्षण के तहत प्रबंधन नियंत्रण भी बनाए रख सकता है।