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स्वास्थ्य बीमा: आसान क्लेम के लिए पूर्व बीमारियों की दें जानकारी, सूचना नहीं देना करार का उल्लंघन

Mon, 16 Dec 2024 04:46 AM IST
दीपक कुमार शर्मा कालीचरण, अमर उजाला
कालीचरण, अमर उजाला Published by: दीपक कुमार शर्मा Updated Mon, 16 Dec 2024 04:46 AM IST
सार

प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज (पीईडी) का अर्थ है...ऐसी कोई भी मेडिकल स्थिति, बीमारी या चोट, जिसका स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले इलाज किया गया हो या जिसके लक्षण मौजूद हों। प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियां जोखिम आकलन व कवरेज शर्तों को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।

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Health Insurance Provide information about previous illnesses for easy claim avoid agreement violation
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

मेडिकल इमरजेंसी जैसी चुनौतीपूर्ण स्थितियों में स्वास्थ्य बीमा मददगार होता है। हालांकि, यह तभी संभव है, जब स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी में आपकी और कंपनी की ओर से दी गई जानकारियां स्पष्ट हों। स्पष्ट जानकारियों के अभाव में बीमा कंपनियां क्लेम खारिज कर देती हैं। इन्हीं जानकारियों में से एक है...प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज (पीईडी) यानी पहले से मौजूद बीमारियां।

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पीईडी का अर्थ है...ऐसी कोई भी मेडिकल स्थिति, बीमारी या चोट, जिसका स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने से पहले इलाज किया गया हो या जिसके लक्षण मौजूद हों। प्री-एग्जिस्टिंग बीमारियां जोखिम आकलन व कवरेज शर्तों को निर्धारित करने में बड़ी भूमिका निभाती हैं।
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क्या है प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज
भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण (इरडा) के दिशा-निर्देशों के मुताबिक, कोई भी मेडिकल स्थिति जिसका स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने से 48 महीने पहले इलाज किया गया हो, प्री-एग्जिस्टिंग डिजीज यानी पीईडी मानी जाती है। इनमें डायबिटीज, हाइपरटेंशन, अस्थमा जैसी पुरानी बीमारियों से लेकर पूर्व में हो चुके ऑपरेशन/इलाज भी शामिल हैं।
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उदाहरण के तौर पर
स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी खरीदने से 48 महीने पहले अगर किसी व्यक्ति का हाइपरटेंशन का इलाज किया गया हो, तो इसे पीईडी माना जाएगा। अगर किसी व्यक्ति का तीन साल पहले घुटने का ऑपरेशन हुआ हो, तो वह भी पीईडी होगा।

नहीं माना जाएगा पीईडी
इरडा के मुताबिक, अगर किसी व्यक्ति का 10 साल पहले अपेंडिक्स का ऑपरेशन हुआ हो और पिछले 48 महीनों में उसे कोई परेशानी नहीं हुई हो या व्यक्ति को इसके लिए कोई दवा नहीं लेनी पड़ी हो, तो उसे बीमा जोखिम के मूल्यांकन की शर्तों के तहत पीईडी नहीं माना जाएगा।

इसलिए खुलासा जरूरी
पॉलिसी खरीदने के दौरान पहले से मौजूद बीमारियों की जानकारी जरूर दें। बेहतर कवरेज पाने में आसानी होगी। कई अन्य लाभ भी मिलेंगे।
खारिज नहीं होगा क्लेम : इन बीमारियों के बारे में पहले से बताने पर आसानी से क्लेम मिल जाएगा। जानकारी छुपाने पर कंपनी न सिर्फ क्लेम खारिज कर सकती है, बल्कि पूरी पॉलिसी रद्द कर सकती है।  
मिलेगा बेहतर कवरेज : पीईडी का खुलासा कर पॉलिसीधारक पारदर्शिता सुनिश्चित करता है, जिससे अधिक कवरेज प्राप्त होता है। कई कंपनियां पीईडी के लिए विशेष कवरेज भी देती हैं।


सही सूचना नहीं देना करार का उल्लंघन
भले ही आपको लगे कि आपकी स्थिति दवाओं या इलाज से नियंत्रण में है, फिर भी इसे पीईडी माना जाएगा। पॉलिसी आवेदन में गलत जानकारी देना बीमा करार का उल्लंघन है और इससे कानूनी जटिलताएं हो सकती हैं। बीमा कंपनी को दावों की जांच का अधिकार होता है। पहले से मौजूद बीमारियों के पता चलने पर क्लेम खारिज होने के अलावा अन्य नुकसान भी हो सकते हैं। -भास्कर नेरुरकर प्रमुख, स्वास्थ्य प्रशासन टीम बजाज आलियांज ज. इंश्योरेंस

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