फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Health awareness has led to dietary changes, with the Indian plate increasingly featuring coarse grains

Millets: स्वास्थ्य के प्रति जागरुकता से खानपान में बदलाव, भारतीय थाली में बढ़ा मोटे अनाज का रुतबा

Sat, 23 May 2026 01:04 PM IST
Navita R Asthana बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: Navita R Asthana Updated Sat, 23 May 2026 01:04 PM IST
सार

70 प्रतिशत परिवार नियमित रूप से किसी ने किसी रूप से मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अपने आहार में ग्रहण कर रहे हैं। इसमें रागी, बाजरा, ज्वार सहित जौ और मक्का शामिल है। साथ ही शाम के हल्की भूख के लिए लोग मखाने, चना, कुरमुरा, भेल और  मूंगफली खाना पसंद कर रहे हैं।

विज्ञापन
Health awareness has led to dietary changes, with the Indian plate increasingly featuring coarse grains
श्री अन्न का इस्तेमाल - फोटो : amarujala.com

विस्तार

देश में मोटा अनाज यानी मिलेट्स जिसे श्रीअन्न भी कहा जाता है, वह अब मात्र पारंपरिक या मौसमी अनाज नहीं रह गया है। अब यह भारतीय परिवारों की थाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। सर्वेक्षण कंपनी लोकल सर्कल्स की एक रिपोर्ट से पता चलता है कि 70 प्रतिशत परिवार नियमित रूप से किसी ने किसी रूप से मिलेट्स यानी मोटे अनाज को अपने आहार में ग्रहण कर रहे हैं। इसमें रागी, बाजरा, ज्वार सहित जौ और मक्का शामिल है। साथ ही शाम के हल्की भूख के लिए लोग मखाने, चना, कुरमुरा, भेल और  मूंगफली खाना पसंद कर रहे हैं।

विज्ञापन


रिपोर्ट में यह भी पता चला है कि लोग मोटा अनाज स्वाद नहीं सेहत के लिए भी अपना रहे हैं। लगभग 43 प्रतिशत लोग मानते हैं, कि वे स्वास्थ्य कारणों से मोटे अनाज खाते हैं। जबकि 30 प्रतिशत लोगों ने माना है क भोजन में विविधता आती है, वहीं 15 प्रतिशत ने धार्मिक उपवास और कुछ लोगोंने स्थानीय उपलब्धता की वजह से भी इनकों आहार में शामिल किया है।

विज्ञापन

मोटे अनाज को सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल करने पर हो विचार

अध्ययन बतता है कि 68 प्रतिशत परिवारों ने मोटे अनाज को  सरकार के सार्वजनिक वितरण प्रणाली में शामिल करने की मांग की है। उनका कहना है, जैसे चावल और गेहूं को दिया जाता है, वैसे ही एक बड़ा हिस्सा मोटे अनाजों का भी होना चाहिए। रिपोर्ट का दावा है कि यह सर्वेक्षण देश के 346 जिलों में किया गया है, जिसमें 44 हजार से अधिक लोगों की राय जानी गई। जिसमें 48 प्रतिशत परिवार रागी , 32 प्रतिशत ने ज्वार को आहार में लेने की बात मानी है, जबकि 23 प्रतिशत परिवार अभी भी मोटे अनाज को भोजन में शामिल नहीं किया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

लोग स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरुक हो रहे हैं

मसाला मेवा एवं किराणा एसोसिशन के अध्यक्ष योगेश गणत्रा कहते हैं, कोविड के बाद से लोग अब स्वास्थ्य को लेकर अधिक जागरुक हो रहे हैं। पहले की तरह अब लोग मोटे अनाज की और लौट रहे हैं। अभी तो शाम के हल्की भूख के लिए लोग मखाने, चना, कुरमुरा, भेल और  मूंगफली खाना पसंद कर रहे हैं। जिसकी मांग पिछले कुछ समय बढ़ी है। कॉन्फेडरेशन ऑफ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के राष्ट्रीय मंत्री शंकर ठक्कर कहते हैं, देश में मोटे अनाज यानी श्रीअन्न को बढ़ावा देने की मुहिम कुछ वर्षों से लगातार मजबूत हो रही है। प्रधानमंत्री ने भी नागारिकों से मोटे अनाजों को अपने दैनिक भोजन में शामिल करने की अपील के बाद इसकी मांग भी बढ़ी है।

मोटे अनाज की फसलों पर ध्यान 

पिछले कुछ वर्षों में जौ, बाजारा सहित मक्का की फसलों पर भी ध्यान दिया जा रहा है। कई राज्यों कई तरह की योजनाएं किसानों की लिए शुरू की है। संयुक्त राष्ट्र ने साल 2023 को अंतरराष्ट्री मिलेट वर्ष घोषित किया था। भारतीय कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2024-25 में 180.15 लाख टन मिलेट का उत्पाद किया था। उत्पाद में राजस्थान सबसे आगे रहा, उसके बाद महाराष्ट्र और कर्नाटक का स्थान रहा। भारत ने साल 2024-25 में 37 मिलियन डॉलर मूल्य के 89,164.96 टन मिलेट का निर्यात किया था।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed