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GST 2.0: 2026 में सिगरेट व कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर महंगा, बचत उत्सव के बाद क्या-क्या बदल रहा?

Mon, 05 Jan 2026 08:42 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Mon, 05 Jan 2026 08:42 PM IST
सार

जीएसटी बचत उत्सव' के बाद 2026 में कुछ मोर्चों पर महंगाई की वापसी दिखी है। सिगरेट, कमर्शियल एलपीजी और हाउसिंग सोसाइटी मेंटेनेंस हुए महंगे, लेकिन आटा-दाल जैसी आवश्यक वस्तुएं अब भी सस्ती रहने का अनुमान है। जानिए कीमतों के मोर्चे पर नए साल में क्या-क्या बदलने वाला है।

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GST 2.0 Reality Check: While Essentials Remain Cheap, Inflation Hits 'Sin Goods' and Services in 2026
सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर बढेगा टैक्स - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

सितंबर 2025 में लागू हुए 'जीएसटी 2.0' (GST 2.0) या 'जीएसटी बचत उत्सव' के बाद आम उपभोक्ताओं को बड़ी राहत मिली थी, लेकिन साल 2026 की शुरुआत के साथ ही महंगाई का दबाव फिर से कुछ विशिष्ट क्षेत्रों में दिखने लगा है। जहां एक ओर आवश्यक वस्तुएं सस्ती बनी हुई हैं, वहीं दूसरी ओर सरकार की नई राजकोषीय रणनीतियों और इनपुट लागत में वृद्धि के कारण 'सिन गुड्स', कमर्शियल एलपीजी और हाउसिंग सोसाइटी के मेंटेनेंस जैसे खर्चों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

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सिगरेट और तंबाकू उत्पादों पर कर का नया ढांचा

1 फरवरी 2026 से जीएसटी मुआवजा उपकर की आधिकारिक समाप्ति के साथ ही सरकार ने राजस्व नुकसान की भरपाई के लिए नए कानून पेश किए हैं। इसका सबसे बड़ा असर तंबाकू और सिगरेट की कीमतों पर पड़ा है। 'केंद्रीय उत्पाद शुल्क (संशोधन) अधिनियम 2025' के तहत अब सिगरेट पर 40% जीएसटी के साथ एक 'विशेष उत्पाद शुल्क' लगाया गया है, जो सिगरेट की लंबाई पर आधारित है।

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जानकारों के मुताबिक, नई व्यवस्था में कर का भार वास्तविक रूप से बढ़ा है। एफएमसीजी कंपनियां इस अतिरिक्त बोझ को सीधे उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं, जिससे रिटेल कीमतों में 15 से 20 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है। इसके अलावा, पान मसाला निर्माताओं पर अब वास्तविक बिक्री के बजाय उनकी मशीनों की उत्पादन क्षमता के आधार पर उपकर लगाया जा रहा है, जिससे इस क्षेत्र में भी कीमतें बढ़ सकती हैं।

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शहरी मध्यम वर्ग और सेवा क्षेत्र पर 'परोक्ष' मार

महंगाई की यह नई लहर प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों रूपों में आई है।1 जनवरी 2026 से 19 किलोग्राम वाले कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में 111 रुपये की भारी वृद्धि की गई है। हालांकि घरेलू गैस की कीमतें स्थिर हैं, लेकिन कमर्शियल गैस महंगी होने से रेस्तरां, होटल और कैंटीन की लागत बढ़ेगी, जिससे बाहर खाना खाना महंगा हो सकता है।


वहीं, शहरी मध्यम वर्ग के लिए एक 'छिपी हुई लागत' सामने आई है। जीएसटी अधिकारियों ने उन हाउसिंग सोसायटियों को नोटिस भेजना शुरू कर दिया है जहां मासिक रखरखाव शुल्क 7,500 रुपये प्रति सदस्य से अधिक है। यदि शुल्क इस सीमा से एक रुपये भी अधिक है, तो पूरी राशि पर 18% जीएसटी लागू होगा। यह नोएडा, गुरुग्राम और मुंबई जैसे शहरों में रहने वाले परिवारों के लिए एक बड़ा वित्तीय झटका है।

किन क्षेत्रों में राहत की उम्मीद?

ऑटोमोबाइल सेक्टर जीएसटी 2.0 का सबसे बड़ा लाभार्थी रहा है। पुरानी व्यवस्था (28% जीएसटी + उपकर) की तुलना में नई दरों (18% या 40% फ्लैट) ने कारों की कीमतों में भारी कमी की है। उदाहरण के लिए, छोटी कारों पर कर का बोझ 29% से घटकर 18% रह गया है।

हालांकि, जनवरी 2026 से मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और हुंडई जैसी कंपनियों ने इनपुट लागत (स्टील, प्लास्टिक) और विदेशी मुद्रा उतार-चढ़ाव के कारण कीमतों में 0.6 से 3% की वृद्धि की है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस मामूली वृद्धि के बावजूद, जीएसटी कटौती के कारण कारें अभी भी 2024 की तुलना में काफी सस्ती हैं।

महंगाई की चिंताओं के बीच राहत की बात यह है कि आवश्यक वस्तुओं की कीमतें नियंत्रण में हैं। रिपोर्टों के अनुसार, आटा, चावल, दवाइयां और स्वास्थ्य बीमा जैसी चीजें सस्ती बनी हुई हैं क्योंकि इन्हें या तो 0% या 5% के न्यूनतम स्लैब में रखा गया है। अच्छे मानसून और पर्याप्त बफर स्टॉक के कारण 2026 में खाद्य मुद्रास्फीति के भी सीमित दायरे में रहने की उम्मीद है।



कुल मिलाकर 2026 का आर्थिक परिदृश्य मिश्रित है। सरकार ने आवश्यक वस्तुओं को सस्ता रखकर अपना वादा निभाया है, लेकिन 'सिन गुड्स' और विलासिता की वस्तुओं पर कर बढ़ाकर राजस्व संतुलन बनाने की कोशिश की है। उपभोक्ताओं के लिए चुनौती अब उन वस्तुओं और सेवाओं में है जो बाजार की इनपुट लागत और नए उपकर नियमों से प्रभावित हैं।

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