उज्जवला योजना में मिलेगा पांच किलो का सिलेंडर, सरकार ने शुरू की तैयारी
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उज्जवला योजना के जरिए गरीब महिलाओं को पांच किलो का सिलेंडर देने की तैयारी सरकार ने शुरू कर दी है। पांच किलो का सिलेंडर मिलने से लोग ज्यादा संख्या में इसका रिफिल करा सकेंगे, क्योंकि यह गरीब लोगों की जेब पर ज्यादा भारी नहीं पड़ेगा। वहीं तेल कंपनियों को इसका लाभ मिलेगा।
योजना को मिलेगा विस्तार
मोदी सरकार द्वारा दोबारा से सत्ता में वापसी करने के बाद अब इस योजना को विस्तार दिया जाएगा। पहले चरण में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों को मुफ्त में गैस कनेक्शन दिया गया था। इसमें 1600 रुपये का खर्चा सरकार ने वहन किया था। यह कनेक्शन उस परिवार में मौजूद महिला सदस्य के नाम जारी किया जाता है। इसके तहत लोगों को एक चूल्हा, 14.2 किलो वाला सिलेंडर और रेग्यूलेटर दिया जाता है।
आठ करोड़ का टारगेट
अगले 100 दिनों में इस योजना के अंतर्गत आठ करोड़ लोगों को कनेक्शन देने का टारगेट पेट्रोलियम मंत्रालय ने रखा है। अभी तक इस योजना के तहत 4.19 करोड़ कनेक्शन दिए जा चुके हैं। इस टारगेट के पूरा होने के बाद पांच किलो का सिलेंडर देना अनिवार्य कर दिया जाएगा।
इसलिए होगा अनिवार्य
पांच किलो का सिलेंडर देना इसलिए अनिवार्य होगा क्योंकि देखा गया है इस योजना के तहत बांटे गए कनेक्शन में लोग दोबारा से सिलेंडर को रिफिल नहीं कराते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि इस सिलेंडर की रिफिल कराने के लिए लोगों को 700-800 रुपये खर्च करने पड़ते हैं। इस रिफिल पर लोगों को किसी तरह की सब्सिडी भी नहीं मिलती है।
तीन सिलेंडर प्रति वर्ष का आंकड़ा
उज्जवला योजना के तहत जो कनेक्शन दिए गए है, उनमें औसतम साल में लोग तीन बार ही रिफिल कराते हैं। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत से कम है। पूरे देश में लोग एक साल में सात बार रिफिल कराते हैं। दिल्ली में अभी 14.2 किलो का एक सिलेंडर 712 रुपये का पड़ रहा है। वहीं इस पर 215 रुपये की सब्सिडी मिलती है।
पांच किलो सिलेंडर की यह है कीमत
वहीं पांच किलो के सिलेंडर को रिफिल कराने में 260 रुपये खर्च होंगे और इसमें 80 रुपये सब्सिडी के तौर पर बैंक खाते में आएंगे। इस हिसाब से यह सिलेंडर केवल 180 रुपये का पड़ता है। वहीं पांच किलो के सिलेंडर का वजन भी काफी कम होता है, जिससे इसे आसानी से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
2016 में हुई थी लांच
सबसे पहले इस योजना को उत्तर प्रदेश में लांच किया गया था। शुरुआत में योजना के लिए टारगेट काफी कम था, लेकिन फिर इसकी लोकप्रियता बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को टारगेट बढ़ाने को कहा। अब सरकार और तेल कंपनियों का टारगेट है कि इस योजना के तहत बांटे गए कनेक्शन में साल भर में रिफिल की संख्या बढ़ाया जाए, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग इसका प्रयोग करें।