फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Business ›   Business Diary ›   Government on financial discipline instead of populist schemes

Budget: लोकलुभावन योजनाओं की जगह वित्तीय अनुशासन पर सरकार का जोर, महिला, गरीब, किसान, युवा को थोड़ी राहत

Fri, 02 Feb 2024 05:26 AM IST
जलज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Fri, 02 Feb 2024 05:26 AM IST
सार

लोकसभा चुनाव से पूर्व पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन, विपक्षी गठबंधन में अंतर्विरोध, जदयू के फिर से राजग में शामिल हो जाने और पुराने साथियों का भाजपा की शर्त पर एनडीए का दरवाजा खटखटाने के कारण सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिखता है।

विज्ञापन
Government on financial discipline instead of populist schemes
बजट सत्र- 2024 - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

लोकसभा चुनाव की आहट के बीच मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम (अंतरिम) बजट में लोकलुभावन घोषणाओं की जगह वित्तीय अनुशासन पर जोर है। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ। राहत की हल्की फुहारें कमोबेश पीएम के बताए चार वर्गों महिला, गरीब, किसान और युवा तक ही सीमित दिखीं। सरकार ने अनुदान की जगह सुधार पर सख्ती से साथ खड़े रहने के संकेत दिए। सरकार ने दस साल की उपलब्धियां गिनाकर संदेश दिया कि अर्थव्यवस्था में सब चंगा है।

विज्ञापन

लोकलुभावन घोषणाओं से दूरी बताती है
सरकार जीत की हैट्रिक लगाने के प्रति किस कदर आश्वस्त है। वैसे भी लोकसभा चुनाव से पूर्व पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन, विपक्षी गठबंधन में अंतर्विरोध, जदयू के फिर से राजग में शामिल हो जाने और पुराने साथियों का भाजपा की शर्त पर एनडीए का दरवाजा खटखटाने के कारण सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिखता है।

विज्ञापन

अनाप-शनाप घोषणाएं न करने के मोदी मंत्र का पालन
साल 2019 में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम बजट से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की न्याय योजना को जबर्दस्त प्रचार मिल रहा था। इसमें हर परिवार को हर साल 72 हजार रुपये देने की घोषणा थी। तब भी मोदी ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वही घोषणा करने पर जोर दिया था, जिसे पूरा किया जा सके। तब किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि की घोषणा की गई थी।

विज्ञापन
विज्ञापन

एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, पीएम कहते हैं कि घोषणाएं ऐसी हों, जिन्हें पूरा किया जा सके। मतदाता पहले से अधिक सतर्क हैं। अतार्किक घोषणाओं से सियासी नुकसान होता है। ऐसी घोषणाओं से संदेश जाता है कि सरकार चला-चली की बेला में है। इसलिए सरकार लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरी है, तो सार्थक घोषणाएं की जाएं, जिससे लोगों का भरोसा कायम रहे।

स्पष्ट संदेश
विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के सशक्तीकरण के लिए जोर अनुदान की जगह सुधारों पर होगा। सरकार का अनुदान कमोबेश गरीब वर्ग को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित रहा है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 11 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़ोतरी से सुधारों के प्रति आग्रह को समझा जा सकता है।

अंतरिम बजट में पीएम मोदी के बताए चार वर्गों में सबसे ज्यादा जोर गरीब व महिलाओं पर है। इनमें गरीबों के लिए बजट से पहले ही मुफ्त अनाज योजना पांच साल बढ़ा दी गई थी। अब पांच साल में दो करोड़ और नए आवास व सूर्योदय योजना में एक करोड़ परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा है। तीन करोड़ लखपति दीदी तैयार करने की घोषणा की गई है। कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी का प्रयोग करने की घोषणा की गई है।

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें कारोबार समाचार और Union Budget से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। कारोबार जगत की अन्य खबरें जैसे पर्सनल फाइनेंस, लाइव प्रॉपर्टी न्यूज़, लेटेस्ट बैंकिंग बीमा इन हिंदी, ऑनलाइन मार्केट न्यूज़, लेटेस्ट कॉरपोरेट समाचार और बाज़ार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed