Budget: लोकलुभावन योजनाओं की जगह वित्तीय अनुशासन पर सरकार का जोर, महिला, गरीब, किसान, युवा को थोड़ी राहत
लोकसभा चुनाव से पूर्व पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन, विपक्षी गठबंधन में अंतर्विरोध, जदयू के फिर से राजग में शामिल हो जाने और पुराने साथियों का भाजपा की शर्त पर एनडीए का दरवाजा खटखटाने के कारण सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिखता है।
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विस्तार
लोकसभा चुनाव की आहट के बीच मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल के अंतिम (अंतरिम) बजट में लोकलुभावन घोषणाओं की जगह वित्तीय अनुशासन पर जोर है। आयकर स्लैब में कोई बदलाव नहीं हुआ। राहत की हल्की फुहारें कमोबेश पीएम के बताए चार वर्गों महिला, गरीब, किसान और युवा तक ही सीमित दिखीं। सरकार ने अनुदान की जगह सुधार पर सख्ती से साथ खड़े रहने के संकेत दिए। सरकार ने दस साल की उपलब्धियां गिनाकर संदेश दिया कि अर्थव्यवस्था में सब चंगा है।
लोकलुभावन घोषणाओं से दूरी बताती है
सरकार जीत की हैट्रिक लगाने के प्रति किस कदर आश्वस्त है। वैसे भी लोकसभा चुनाव से पूर्व पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा का बेहतर प्रदर्शन, विपक्षी गठबंधन में अंतर्विरोध, जदयू के फिर से राजग में शामिल हो जाने और पुराने साथियों का भाजपा की शर्त पर एनडीए का दरवाजा खटखटाने के कारण सरकार का आत्मविश्वास बढ़ा हुआ दिखता है।
अनाप-शनाप घोषणाएं न करने के मोदी मंत्र का पालन
साल 2019 में मोदी सरकार के पहले कार्यकाल के अंतिम बजट से पहले कांग्रेस नेता राहुल गांधी की न्याय योजना को जबर्दस्त प्रचार मिल रहा था। इसमें हर परिवार को हर साल 72 हजार रुपये देने की घोषणा थी। तब भी मोदी ने वित्तीय अनुशासन बनाए रखने और वही घोषणा करने पर जोर दिया था, जिसे पूरा किया जा सके। तब किसानों के लिए पीएम किसान सम्मान निधि की घोषणा की गई थी।
एक केंद्रीय मंत्री के मुताबिक, पीएम कहते हैं कि घोषणाएं ऐसी हों, जिन्हें पूरा किया जा सके। मतदाता पहले से अधिक सतर्क हैं। अतार्किक घोषणाओं से सियासी नुकसान होता है। ऐसी घोषणाओं से संदेश जाता है कि सरकार चला-चली की बेला में है। इसलिए सरकार लोगों की अपेक्षाओं पर खरा उतरी है, तो सार्थक घोषणाएं की जाएं, जिससे लोगों का भरोसा कायम रहे।
स्पष्ट संदेश
विभिन्न वर्गों और क्षेत्रों के सशक्तीकरण के लिए जोर अनुदान की जगह सुधारों पर होगा। सरकार का अनुदान कमोबेश गरीब वर्ग को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने तक सीमित रहा है। बुनियादी ढांचा क्षेत्र में 11 प्रतिशत की जबर्दस्त बढ़ोतरी से सुधारों के प्रति आग्रह को समझा जा सकता है।
अंतरिम बजट में पीएम मोदी के बताए चार वर्गों में सबसे ज्यादा जोर गरीब व महिलाओं पर है। इनमें गरीबों के लिए बजट से पहले ही मुफ्त अनाज योजना पांच साल बढ़ा दी गई थी। अब पांच साल में दो करोड़ और नए आवास व सूर्योदय योजना में एक करोड़ परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने का वादा है। तीन करोड़ लखपति दीदी तैयार करने की घोषणा की गई है। कृषि जलवायु क्षेत्रों में विभिन्न फसलों पर नैनो डीएपी का प्रयोग करने की घोषणा की गई है।