FPI पर उपकर लगाने के फैसले को पलटने सहित सरकार उठा सकती है ये बड़े कदम
- अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए सरकार महत्वपूर्ण कदम उठा सकती है
- सरकार FPI पर उपकर लगाने के फैसले को पलटने पर विचार कर रही है
- इसके अतिरिक्त निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से भी राहत मिल सकती है
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विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) पर उपकर लगाने के फैसले को पलटने पर विचार कर रही है। इसके अतिरिक्त निवेशकों को लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स से भी राहत मिल सकती है। इतना ही नहीं, केंद्र सरकार डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स (डीडीटी) नियमों में भी ढील देने पर फैसला ले सकती है। सरकार के इस कदम से अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
आम बजट में लिया था ये निर्णय
गौरतलब है कि सरकार ने आम बजट 2019-20 में अमीरों की सालाना आय पर उपकर लगाने का फैसला किया था, जिसके दायरे में एफपीआई भी आते हैं। बजट में सरचार्ज को 15 से बढ़ाकर 25 फीसदी कर दिया गया था।
खबरों के मुताबिक, प्रधानमंत्री कार्यालय में वित्त मंत्रालय की बैठक के बाद यह फैसला लिया गया है। सूत्रों ने कहा, 'एफपीआई से उपकर हटाए जाने से सरकार को लगभग 400 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा।' सूत्रों के मुताबिक, ‘सरकार अधिसूचना या अध्यादेश के माध्यम से एफपीआई पर उपकर लगाने का फैसला वापस ले सकती है।’ हालांकि अगर सरकार अध्यादेश का रास्ता चुनती है तो उसे अगले संसद सत्र में इसके लिए मंजूरी लेनी होगी।
डिविडेंड डिस्ट्रीब्यूशन टैक्स की बात करें, तो यह भारतीय कंपनियों के ऊपर निवेशकों को दिए डिविडेंड के आधार पर लगाया जाता है। लेकिन सुपर रिच के ऊपर लगा सरचार्ज जारी रहेगा।
लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स में भी सरकार कटौती कर सकती है। इस संदर्भ में मंत्रालय विचार कर रहा है कि अगर तीन साल से ऊपर वाले निवेश से अगर एलटीसीजी को हटाया दिया जाता है तो उसके प्रभाव क्या होंगे।