Gold Return: पिछले छह साल में सोने ने शेयर बाजार को पछाड़ा, निवेशकों को दिया 200 फीसदी से अधिक रिटर्न
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट बताती है कि सोने की कीमतें बढ़ने की वजह से लगभग छह वर्षों में 200 प्रतिशत से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है। इस साल धनतेरस पर सोने की कीमतों में 5000 रुपये तक कमी आई है, जिसकी वजह से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल 35 टन से अधिक सोने की बिक्री होने की उम्मीद है।
विस्तार
पिछले छह वर्षों में सोने ने शेयर बाजार की तुलना में शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने निवेशकों को बेहतरीन रिटर्न दिया है। इसकी मुख्य वजह वैश्विक बाजार में अनिश्चितता, मौद्रिक नरमी और केंद्रीय बैंकों और रिटेल निवेशकों की ओर से मजबूत मांग रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि सोने और चांदी कीमतों में वृद्धि की मुख्य वजहें वैश्विक स्तर पर बढ़ता व्यापारिक तनाव है, जो कि ट्रंप के ताजा चीन पर लगाए गए 100 प्रतिशत टैरिफ के कारण तेज हुआ है। इस साल धनतेरस पर सोने की कीमतों में 5000 रुपये तक कमी आई है, जिसकी वजह से बाजारों में रौनक बढ़ गई है। सर्राफा कारोबारियों को उम्मीद है कि इस साल 35 टन से अधिक सोने की बिक्री होने की उम्मीद है।
पांच हजार रुपये गिरे सोने के दाम
मुंबई में शुक्रवार को सोने की कीमतें 1,36,000 रुपये प्रति 10 पर थी, जो शनिवार 18 अक्तूबर धनतेरस के दिन 5000 रुपये गिरकर 1,31,425 रुपये 10 ग्राम पर कारोबार करती दिखी। चांदी की कीमत 157,590 रुपये प्रति किलोग्राम रही।
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पिछले छह साल में सोने ने बेहतरीन रिटर्न
मोतीलाल ओसवाल की रिपोर्ट बताती है कि सोने की कीमतें बढ़ने की वजह से लगभग छह वर्षों में 200 प्रतिशत से अधिक का शानदार रिटर्न दिया है, जबकि निफ्टी-50 ने लगभग 120 प्रतिशत का रिटर्न दिया है। मई 2019 से जून 2025 तक सोने की कीमतें 30,000 रुपये से बढ़कर 1,00,000 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई।
सोने की कीमतें बढ़ने की मुख्य वजहें इन छह वर्षों में
पिछले छह वर्षों में कई कारण रहें, जिन्होंने सोने की कीमतें बढ़ाने में मदद की है। पहला, कोविड-19 महामारी, दूसरा, रूस -यूक्रेन युद्ध, लगातार बढ़ती मुद्रास्फीति, धीमी वैश्विक आर्थिक वृद्धि और आक्रामक केंद्रीय बैंकों द्वारा सोने की खरीदारी मुख्य कारण रहे। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की टैरिफ नीतियों की वजह से बढ़ते व्यापार युद्ध ने सोने और चांदी की कीमतों पर आसमान पर पहुंचा दिया है। भविष्य में भी चीन और अमेरिका के बीच बढ़ता व्यापार युद्ध कीमतों में और वृद्धि कर सकता है।
पिछले छह वर्षों में सोने की कीमतों में कितनी हुई वृद्धि?
रिसर्च रिपोर्ट और वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट्स के अनुसार साल 2020 में सोने की कीमत (24 कैरेट प्रति 10 ग्राम ) 48,651 रुपये प्रति 10 ग्राम, साल 2021 में 48,7200 प्रति 10 ग्राम, साल 2022 में 52,670 प्रति 10 ग्राम, साल 2023 में 65,330 प्रति 10 ग्राम और साल 2024 में 31 दिसंबर को सोने की कीमत 78,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई। साल 2025 सोने और चांदी में सबसे अधिक तेजी देखने को मिली है। साल में अब 50 प्रतिशत से अधिक सोने की कीमतों में वृद्धि हो चुकी है, जबकि दिवाली और धनतेरस में कीमतें बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। 1 अक्तूबर 2025 को सोने की कीमत 1,17,588 रुपये प्रति 10 ग्राम रही, और 14 अक्तूबर 2025 को खबर लिखने तक 1,23,000 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है।
सोने का रिटर्न
2020 से इक्विटी और सोने पर रिटर्न के आंकड़ों पर नजर डालें तो साल 2020 निफ्टी-50 ने 14.90 प्रतिशत रिटर्न दिया जबकि एमसीएक्स पर सोने ने 27.97 प्रतिशत रिटर्न दिया है। साल 2021 में निफ्टी ने 24.12 प्रतिशत, सोने ने 7.21 प्रतिशत रिटर्न दिया, साल 2022 में निफ्टी पर 4.33 प्रतिशत और सोने ने 13.90 प्रतिशत, साल 2023 में निफ्टी पर रिटर्न प्राप्त हुआ 20.03 प्रतिशत वहीं सोने ने इस साल 15.37 प्रतिशत रिटर्न निवेशकों को दिया। साल 2024 में निफ्टी पर रिटर्न का प्रतिशत रहा 8.80 और सोने का रिटर्न बढ़कर 20.61 प्रतिशत पर पहुंच गया। वहीं साल 2025 जून में निफ्ट ने 6.12 प्रतिशत रिटर्न दिया और इसी अवधि में सोने ने 30.40 प्रतिशत तक का रिटर्न निवेशकों को दिया था, फिलहाल जुलाई 2025 अंत से अक्टूबर तक कीमतों काफी तेजी देखी गई है।
एलकेपी सिक्योरिटीज के उपाध्यक्ष रिसर्च एनालिस्ट, कमोडिटी एंड करेंसी जतिन त्रिवेदी कहते हैं कि आगामी त्योहारों के मद्देनजर सोना 1,300 की बढ़त के साथ 1,26,000 के पार पहुंच गया है। सोने की कीमतें लगातार तीसरे सत्र में स्थिर रही, पिछले तीन दिनों में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई। अमेरिकी सरकार के बंद होने की चिंताएं, डॉलर का स्थिरता और अमेरिकी प्रतिफल में गिरावट सोने की तेजी के दायरे में गति को बनाए रखा है। उम्मीद है कि 1,24,000 से 1,27,500 तक कीमतें जा सकती हैं।