26 महीने के उच्च स्तर पर पहुंची वैश्विक खाद्य महंगाई: यूएन एफएओ
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खाद्य पदार्थों की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए जूझ रही भारत सरकार दुनिया में अकेली नहीं है। दुनिया के अन्य देशों में भी खाद्य महंगाई तेजी से बढ़ रही है। संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एजेंसी की बृहस्पतिवार को आई रिपोर्ट के अनुसार, मांस और वनस्पति तेलों की कीमतों में उछाल से नवंबर, 2019 में विश्व भर में खाद्य पदार्थों के दाम तेजी से बढ़े। हालांकि, इस दौरान अनाज की कीमतों में थोड़ी नरमी देखी गई।
संयुक्त राष्ट्र की खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) के खाद्य पदार्थ सूचकांक में कीमतों में मासिक परिवर्तन का आंकड़ा पेश किया जाता है। इसमें अनाज, तिलहन, डेयरी उत्पाद, मांस और चीनी की कीमतों पर नजर रखी जाती है। इसके मुताबिक, नवंबर में खाद्य पदार्थों की कीमतों 26 महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गईं। इस दौरान औसत कीमतों में 177.2 अंकों की तेजी दर्ज की गई, जो अक्तूबर, 2019 के मुकाबले 2.7 फीसदी और सालाना आधार पर 9.5 फीसदी ज्यादा है।
2.7 अरब टन अनाज उत्पाद का अनुमान
एएफओ ने अनुमान जताया है कि 2019 में अनाज उत्पादन 2.714 अरब टन के अब तक के उच्च स्तर पर पहुंच जाएगा। यह आंकड़ा उसके पहले के अनुमान से 0.4 फीसदी अधिक है। वहीं, गेहूं के उत्पादन में 4.8 फीसदी की तेजी का अनुमान है। इस दौरान गेहूं उत्पादन 76.64 करोड़ टन पहुंच सकता है। इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर चावल उत्पादन 51.5 करोड़ टन पहुंचने का अनुमान है, जो पहले के पूर्वानुमान से 16 लाख टन अधिक है।
वनस्पति तेल, चीनी, मांस और डेयरी उत्पादों का मूल्य सूचकांक बढ़ा
रिपोर्ट के मुताबिक, गेहूं की कीमतों में गिरावट के बीच बड़े स्तर पर निर्यात आपूर्ति और मजबूत प्रतिस्पर्धा के कारण अनाज का मूल्य सूचकांक 1.2 फीसदी गिरकर 162.4 अंक पर पहुंज गया। नई फसल की आवक के दबाव में चावल की कीमतें छह महीने के निचले स्तर पर पहुंच गईं।
वहीं, वनस्पति तेल का मूल्य सूचकांक 10.4 फीसदी बढ़कर 150.6 अंक पर पहुंच गया, जो मई, 2018 के बाद का उच्चतम स्तर है। इसी तरह, मांस का मूल्य सूचकांक अक्तूबर के मुकाबले नवंबर में 4.6 फीसदी बढ़कर 190.5 अंक पर पहुंच गया। यह मई, 2009 के बाद मासिक आधार पर सबसे बड़ी तेजी है। चीनी के मूल्य सूचकांक में 1.8 फीसदी की वृद्धि रही और यह बढ़कर 181.6 अंक पर पहुंच गया, जबकि डेयरी उत्पादों का मूल्य सूचकांक दो महीने की लगातार गिरावट के बाद नवंबर में मामूली बढ़कर 192.6 अंक रहा।
भारत का चावल निर्यात 42 फीसदी घटा
सरकार की ओर जारी आंकड़ों के मुताबिक, भारत का चावल निर्यात अक्तूबर में सालाना आधार पर 42 फीसदी घटकर 4,85,898 टन रह गया। अफ्रीकी देशों से गैर-बासमती चावल की मांग घटने से चावल निर्यात में कमी आई है।
भारतीय निर्यातकों का कहना है कि थाईलैंड, वियतनाम और म्यांमार जैसे छोटे खरीदार निर्यात बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। ओलाम इंडिया के चावल कारोबार के उपाध्यक्ष नितिन गुप्ता ने कहा कि निर्यात मांग बहुत कम है।
वहीं, चावल निर्यातकों के संगठन (आरईए) के अध्यक्ष बीवी कृष्णा राव का कहना है कि स्थानीय स्तर पर चावल की अधिक कीमतों के कारण भारत वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा में पिछड़ रहा है। निर्यात में सुधार के लिए सरकार को विदेशी बिक्री के लिए चावल पर सब्सिडी देनी होगी। भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। चालू वित्त वर्ष के पहले साल महीनों में निर्यात 28 फीसदी घटा है।