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Nitin Gadkari: गडकरी बोले- प्रदूषण के कारण दिल्ली नहीं आना चाहते, 22 लाख करोड़ के जीवाश्म ईंधन आयात पर यह कहा

Tue, 03 Dec 2024 04:10 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Tue, 03 Dec 2024 04:10 PM IST
सार

Biz Updates: केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि भारत 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य के जीवाश्म ईंधन का आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है। गडकरी ने दिल्ली के वायु प्रदूषण पर भी टिप्पणी की। आइए जानें वे क्या बोले।

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Gadkari confesses he does not want to visit Delhi because of pollution
नितिन गडकरी - फोटो : PTI

विस्तार

दिल्ली में प्रदूषण के बढ़ते स्तर से परेशान केंद्रीय मंत्री एवं नागपुर से सांसद नितिन गडकरी ने मंगलवार को स्वीकार किया कि उन्हें राष्ट्रीय राजधानी आने का मन नहीं करता, क्योंकि यहां उन्हें अक्सर संक्रमण हो जाता है।

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यहां एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए गडकरी ने कहा कि दिल्ली शहर ऐसा है कि ‘‘मुझे यहां रहना पसंद नहीं है। यहां प्रदूषण के कारण मुझे संक्रमण हो जाता है।’’ उन्होंने कहा, "हर बार दिल्ली में आता हुआ, ऐसा लगता है कि (दिल्ली) जाना चाहिए की नहीं। इतना भयानक प्रदूषण है (हर बार, दिल्ली आते समय, मैं सोचता हूं कि मुझे जाना चाहिए या नहीं क्योंकि प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक है।" गडकरी ने सुझाव दिया कि प्रदूषण कम करने का सबसे अच्छा तरीका जीवाश्म ईंधन की खपत को कम करना है।
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दिल्लीवासियों को मंगलवार को वायु गुणवत्ता में थोड़ा सुधार महसूस हुआ और सुबह वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 274 रहा, जो लगातार तीसरे दिन राहत भरा रहा। दिल्लीवासियों के लिए दिसंबर की शुरुआत में सांस लेना नवंबर की तुलना में अपेक्षाकृत आसान रहा है, क्योंकि नवंबर के अधिकांश दिनों में हवा जहरीली बनी रही थी।

गडकरी ने कहा कि भारत 22 लाख करोड़ रुपये मूल्य के जीवाश्म ईंधन का आयात करता है, जो अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और पारिस्थितिकी के दृष्टिकोण से चुनौतीपूर्ण है।

उन्होंने कहा, ‘‘हम वैकल्पिक ईंधन को बढ़ावा देकर जीवाश्म ईंधन के आयात को कम कर सकते हैं।’’ अपने बेबाक विचारों के लिए मशहूर गडकरी ने कहा कि भारत के सामने सबसे बड़ी समस्या गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी है, इसलिए आने वाले समय में सरकार को आर्थिक और सामाजिक समानता हासिल करना सुनिश्चित करना होगा।

रिपोर्ट में दावा- कॉरपोरेट और सरकारी आय में कमी से शहरी मांग घटी
कॉरपोरेट और सरकारी क्षेत्रों की आय में गिरावट के साथ-साथ परिवारों पर बढ़ते कर बोझ के कारण वित्त वर्ष 2025 की दूसरी तिमाही में शहरी मांग में कमी आई है। सिस्टमैटिक्स इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की एक रिपोर्ट में यह बात कही गई है। रिपोर्ट में इस बात पर प्रकाश डाला गया है कि कॉरपोरेट आय में मंदी और सरकारी खर्च में कमी ने शहरी परिवारों को काफी प्रभावित किया है।
 
गैर- वित्तीय क्षेत्र में कर्मचारी मुआवजे पर कॉरपोरेट खर्च जून 2022 में 16.4 प्रतिशत के शिखर से घटकर Q2FY25 में 6.3 प्रतिशत हो गया। यह कर्मचारी मुआवजे में गिरावट की लगातार छठी तिमाही है, जिसका कारण बिक्री वृद्धि में मंदी है, जो इसी अवधि के दौरान 3.8 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट के अनुसार, "दोनों मोर्चों यानी कॉरपोरेट और सरकार से आय में कमी के साथ-साथ परिवारों पर बढ़ते कर भार के कारण शहरी मांग में कमी आ रही है"। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गैर-वित्तीय सेवाओं, वित्तीय सेवाओं और विनिर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में शहरी वास्तविक लाभ वृद्धि क्रमशः 1.7 प्रतिशत, 4.9 प्रतिशत और 3.6 प्रतिशत रही।

इस बीच, ब्याज भुगतान को छोड़कर, सरकार का वास्तविक राजस्व व्यय सितंबर 2024 में साल-दर-साल 10.5 प्रतिशत की तीव्र गिरावट के साथ वित्त वर्ष 2013 के बाद से सबसे कम स्तर पर पहुंच गया। चूंकि सरकार का 31 प्रतिशत खर्च ब्याज भुगतान पर खर्च होता है , इसलिए ऐसा होने से अन्य व्यय के लिए कम जगह बचती है।

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