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पेट्रोल-डीजलः जिस शख्स ने दिया था बाजार के हवाले करने का सुझाव, वो भी हुआ परेशान

Mon, 10 Sep 2018 06:58 PM IST
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 10 Sep 2018 06:58 PM IST
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fuel expert kirit parekh is also not happy with price rise of petrol diesel

देश भर में पेट्रोल डीजल की बढ़ती कीमतों से आम आदमी तो परेशान है ही, वहीं वो शख्स भी दुखी है, जिसने 8 साल पहले सरकार को इनकी कीमत बाजार के हवाले करने का सुझाव दिया था। सरकार द्वारा दिया जा रहा तर्क भी इस व्यक्ति की समझ में नहीं आ रहा है। 

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सब्सिडी कम करने के लिए दिया था सुझाव

एनर्जी एक्सपर्ट डॉ. किरिट पारिख ने ही 2011 में केंद्र सरकार को पेट्रोल डीजल के दाम बाजार को हवाले करने का सुझाव दिया था। तब पारिख ने कहा था कि बाजार के हवाले करने से सरकार सब्सिडी का बोझ कम कर सकती है और इससे उसके चालू खाते के घाटे को भी कम करने में मदद मिलेगी। 
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टैक्स में की 100 फीसदी बढ़ोतरी

16 जून 2017 से तेल कंपनियों ने केंद्र सरकार का आदेश मिलने के बाद पेट्रोल डीजल के दामों पर डायनेमिक प्राइसिंग की व्यवस्था शुरू की थी। उस समय सरकार की दलील थी कि इससे आम आदमी को ही फायदा मिलेगा। लेकिन ऐसा हो नहीं रहा है। इसका सबसे ज्यादा फायदा तेल कंपनियों को मिल रहा है जिन्हें अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की घटती-बढ़ती कीमतों का बोझ अब किसी भी तरह अपनी जेब पर नहीं झेलना पड़ रहा है।
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इसका सीधा असर आम जनता की जेब पर ही पड़ रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जब भी तेल की कीमतें बड़े अंतर से कम हुई हैं सरकार ने एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर अपनी जेब भरनी शुरू कर दी है, नतीजतन आम जनता को इसका खास फायदा नहीं मिल पाया।

तेल कंपनियों को मिला सुरक्षा कवच

पारिख के मुताबिक सरकार ने तेल कंपनियों को एक ऐसा सुरक्षा कवच मुहैया करा दिया है जिसमें उन्हें किसी भी सूरत में घाटा नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमत बढ़ें या घटें इसका असर आम आदमी की जेब पर ही देखने को मिल रहा है। तेल के इस खेल में कंपनियों की बल्ले-बल्ले है। समय-समय पर कंपनियांअपनी लागत मूल्य बढ़ा रही हैं तो भी इसका असर आम आदमी की जेब पर पड़ रहा है।


टैक्स में हो इतनी कटौती

पारिख ने कहा कि केंद्र को 2-3 फीसदी और राज्य सरकारों को 5 फीसदी तक टैक्स में कटौती करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पेट्रोल-डीज़ल पर टैक्स वसूलना सबसे आसान होता है और हमारे देश में इसे सबसे ज्यादा वसूला जाता है। केंद्र और राज्य दोनों को अपना टैक्स कम करना चाहिए। 

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