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Made in India: गुणवत्ता की गारंटी से ग्लोबल मार्केट तक, जानिए क्या है ‘मेड इन इंडिया लेबल योजना'

Tue, 19 Aug 2025 05:43 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Tue, 19 Aug 2025 05:43 PM IST
सार

मैन्यूफैक्चरिंग को बढ़ावा देने के साथ ब्रांड इंडिया की वैश्विक पहचान के लिए केंद्र सरकार ने मेड इन इंडिया लेबल योजना शुरू की है। सरकार हर उस उत्पाद पर एक “मेड इन इंडिया” लेबल और QR कोड उपलब्ध कराएगी, जो तय मानकों पर खरा उतरेगा। इस पूरी व्यवस्था की देखरेख उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) करेगा। 

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From quality guarantee to global market, know what is Made in India Label Scheme
मेड इन इंडिया लेबल योजना - फोटो : amar ujala digital

विस्तार

केंद्र सरकार भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता की गारंटी, प्रमाणिकता और ब्रांड वैल्यू को मजबूत बनाने के लिए मेड इन इंडिया लेबल योजना लेकर आई है। इसकी सफलता सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने शुरुआती तीन वर्षों के लिए 995 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं। आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे में। 

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मेड इन इंडिया लेबल योजना क्या है?

मेड इन इंडिया लेबल योजना आत्मनिर्भर भारत की एक पहल है। इसके तहत स्वदेशी सामानों के लेबल पर एक क्यूआर कोड और एक लोगो अंकित रहेगा। इसमें निर्माण स्थल, लेबल की वैधता और उत्पाद से जुड़ी जानकारी मौजूद रहेगी। उद्योग व आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) की तरफ से इस पहल को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।

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मेड इन इंडिया लेबल योजना का मकसद और फायदे क्या?

  • इस योजना का लक्ष्य भारत में निर्मित उत्पादों की पहचान को मजबूत करना है।
  • यह भारत में निर्मित और/या स्थानीय कच्चे माल से तैयार उत्पादों की प्रामाणिकता की गारंटी भी देता है।
  • अनुमान है कि यह योजना आने वाले वर्षों में आत्मनिर्भर हो जाएगी और भारतीय विनिर्माण उद्योग को वैश्विक स्तर पर एक नई पहचान दिलाएगी।
  • भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता प्रदर्शित करने और विभिन्न क्षेत्रों में उच्च रेटिंग प्राप्त करने के लिए मेड इन इंडिया लेबल अत्यंत महत्वपूर्ण है।
  • साथ ही यह घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय मूल के उत्पादों को मान्यता दिलाने में भी सहायता करती है।
  • ये घरेलू उद्योगों को मजबूत करने, उपभोक्ता विश्वास और भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ावा देने में मदद करेगी। 

नई लेबल योजना से विनिर्माण क्षेत्र को कैसे मिलेगा बढ़ावा?

यह योजना भारतीय विनिर्माण क्षेत्र पर केंद्रित है जिसमें बड़े पैमाने के उद्यम तथा सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) भी शामिल हैं। खेती, कृषि, मत्स्य पालन, जलीय कृषि, बागवानी और संबद्ध गतिविधियों में लगे उद्यमियों को भी इस योजना में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा।

पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत कैसे होगी?

इस योजना की शुरुआत पायलट रूप में की जाएगी। पायलट सेक्टर का चुनाव वर्तमान गुणवत्ता मानकों, स्थानीय व्यापार में वैल्यू एडिशन और उद्योग परामर्श के आधार पर किया जाएगा। वैल्यू एडिशन के लिए 50 प्रतिशत मापदंड निर्धारित कर लिए गए हैं। उद्योग परामर्श के आधार पर इसमें बदलाव भी किया जा सकता है। पायलट के दौरान चयनित उत्पादों की पहचान की जाएगी, उनकी मूल्य शृंखला का विश्लेषण किया जाएगा और उसके आधार पर उत्पादों को मेड इन इंडिया लेबल के लिए मान्यता दी जाएगी।

मेड इन इंडिया पोर्टल पर कैसे मिलेगा प्रमाणपत्र?

प्रमाणपत्र की आवश्यकता का अनुपालन करने वाले चयनित उद्यमों को मेड इन इंडिया (एमआईआई) पोर्टल पर ऑनबोर्ड किया जाएगा। गुणवत्ता मानकों और स्थानीय वैल्यू एडिशन मानदंडों को पूरा करने वाले चयनित उद्यमों को लेबल प्रदान किया जाएगा। 

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