FPI: विदेशी निवेशक लगातार दूसरे महीने अप्रैल में भारतीय शेयर बाजार में शुद्ध खरीदार रहे, जानें क्या है कारण
FPI:मार्च की शुरुआत में एसवीबी के डूबने के बाद पैदा हुए बैंकिंग संकट और भारत के लिए अपेक्षाकृत मजबूत आर्थिक परिदृश्य ने विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय बाजार के प्रति उत्साह पैदा कर दिया है। इसका फायदा भारतीय शेयर बाजार को मिला।
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नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी (एनएसडीएल) के ताजा आंकड़ों के अनुसार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) जनवरी और फरवरी में लगातार दो महीने बिकवाली करने के बाद मार्च और अप्रैल में शुद्ध खरीदार बने हुए हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार एफपीआई ने अप्रैल 2023 (27 अप्रैल तक) में भारतीय शेयर बाजार में 7,695 करोड़ रुपये की खरीदारी की है। मार्च में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार में 7,936 करोड़ रुपये की खरीदारी की थी।
वैश्विक बैंकिंग संकट के बाद विदेशी निवेशकों का भारतीय बाजार के प्रति रुझान बढ़ा
मार्च की शुरुआत में सिलिकॉन वैली बैंक के डूबने के बाद अमेरिका में पैदा हुए बैंकिंग संकट और भारत के लिए अपेक्षाकृत मजबूत आर्थिक परिदृश्य ने विदेशी निवेशकों के बीच भारतीय बाजार के प्रति उत्साह पैदा कर दिया है। इस दौरान एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी और टाटा मोटर्स के शेयरों में बड़े पैमाने कारोबार होता देखागया। यह माना जा सकता है कि इसके एक बड़े हिस्से की खरीदारी एफपीआई ने की। जियोजीत फाइनेंशियल सर्विसेज के मुख्य निवे़ाश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने हाल ही में एक नोट में कहा था, "जिन शेयरों में एफपीआई होल्डिंग लगातार बढ़ रही है, वे बाजार की कमजोरी के दौरान भी लचीलापन दिखा रहे हैं।"
प्रौद्योगिकी स्टार्टअप की दुनिया के सबसे प्रमुख उधारदाताओं में से एक, सिलिकॉन वैली बैंक 10 मार्च को जमाकर्ताओं की ओर से एक साथ पैसे निकालने के कारण तालाबंदी की स्थिति में पहुंच गया था। इसका पूरी वित्तीय प्रणाली पर असर पड़ा और कई वैश्विक बैंकों को बंद करने की नौबत आ गई।
अक्तूबर 2021 से एफपीआई भारतीय बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे थे
जनवरी और फरवरी में एफपीआई ने क्रमश: 28,852 करोड़ रुपये और 5,294 करोड़ रुपये के शेयरों की बिकवाली की थी। उस दौरान भारतीय शेयर बाजार में चल रहे उतार-चढ़ाव को देखते हुए विदेशी निवेशक स्पष्ट रूप से सतर्कता दिखा रहे थे। बता दें कि कुछ अपवादों को छोड़कर, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) एक साल से अधिक समय से भारतीय बाजारों में इक्विटी में बिकवाली करते दिखे हैं और यह सिलसिला विभिन्न कारणों से अक्टूबर 2021 में शुरू हुआ था। डॉलर मूल्य वाली वस्तुओं की बढ़ती मांग और अमेरिकी डॉलर में मजबूती समेत विकसित अर्थव्यवस्थाओं की ओर से सख्त मौद्रिक नीति आपनाने के बाद एफपीआई भारतीय बाजार में बड़े पैमाने पर बिकवाली कर रहे थे। एनएसडीएल की वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2022 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने संचयी आधार पर भारत में 121,439 करोड़ रुपये के शेयर बेचे थे।