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FAO रिपोर्ट: पहली बार मत्स्य उत्पादन से आगे निकली जलीय कृषि, 13.09 करोड़ टन तक हुई पैदावार

Wed, 12 Jun 2024 05:36 AM IST
विशांत श्रीवास्तव अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली
अमर उजाला, न्यूज डेस्क, नई दिल्ली Published by: विशांत श्रीवास्तव Updated Wed, 12 Jun 2024 05:36 AM IST
सार

वैश्विक स्तर पर पहली बार जलीय कृषि उत्पादन पारंपरिक मत्स्य पालन से आगे निकल गया है। भारत सहित दुनिया के शीर्ष 10 देशों का जलीय कृषि में लगभग 90 फीसदी योगदान है।


 

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For the first time, aquatic agriculture overtakes fish production, production reached 13.09 crore tonnes.
जलीय खेती - फोटो : ani

विस्तार

वैश्विक स्तर पर पहली बार जलीय कृषि उत्पादन पारंपरिक मत्स्य पालन से आगे निकल गया है। शीर्ष 10 देशों जिनमें चीन, इंडोनेशिया, भारत, वियतनाम, बांग्लादेश, फिलीपींस, दक्षिण कोरिया, नॉर्वे, मिस्र और चिली शामिल हैं, इनका जलीय कृषि उत्पादन में लगभग 90 फीसदी योगदान है। जलीय कृषि का अर्थ मछली, मोलस्क, क्रस्टेशियंस और जलीय पौधों सहित जलीय जीवों की खेती से है।

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खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की रिपोर्ट ‘द स्टेट ऑफ वर्ल्ड फिशरीज एंड एक्वाकल्चर 2024’ में कहा कि 2022 में जलीय कृषि उत्पादन 13.09 करोड़ टन तक पहुंच गया, जिसमें 9.44 करोड़ टन जलीय जीव थे जो कुल जलीय पशु उत्पादन का 51 फीसदी के बराबर है। जलीय कृषि उत्पादन में वृद्धि के कारण मोलस्क और क्रस्टेशियन की हिस्सेदारी में भी वृद्धि हुई है। साल 2022 में पकड़ी गई 75 प्रतिशत फिनफिश में से आधी समुद्री प्रजातियां थीं, जबकि 44 फीसदी मीठे या ताजे पानी की प्रजातियां थीं। समुद्री फिनफिश भी उत्पादित कुल जलीय जीवों का 38 फीसदी हिस्सा थीं और उसके बाद मीठे पानी की मछलियां 33 फीसदी थीं।
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लगातार बढ़ रही है मछली की खपत

रिपोर्ट के अनुसार दुनिया भर में मछलियों की खपत तेजी से बढ़ रही है। 1961 और 2016 के बीच 3.2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की है। जबकि इस दौरान जनसंख्या 1.6 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है। रिपोर्ट के अनुसार, 2015 में विश्व स्तर पर जानवरों से मिलने वाले प्रोटीन में मछलियों की हिस्सेदारी 17 फीसदी रही। हालांकि यह सभी देशों के लिए एक बराबर नहीं। दुनिया में इनकी प्रति व्यक्ति वार्षिक खपत 1961 में 9.1 किलोग्राम थी, जो 2022 तक बढ़कर 20.7 किलोग्राम हो गई।
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दुनियाभर को भोजन उपलब्ध कराने में सक्षम

एफएओ के सहायक महानिदेशक मैनुअल बारंगे कहते हैं कि जलीय कृषि दुनिया भर में बढ़ती जनसंख्या को भोजन उपलब्ध कराने की क्षमता रखती है। यह पिछले पांच दशकों में दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली खाद्य उत्पादन प्रणाली रही है।

जलीय कृषि उत्पादन को यूरोपीय ग्रीन डील द्वारा भोजन और चारे के लिए ‘कम कार्बन’ प्रोटीन के स्रोत के रूप में भी मान्यता दी गई है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर के एक तिहाई सागरों में जरूरत से ज्यादा मछलियां पकड़ी जा रही हैं और इसकी वजह मछलियों की रिकॉर्ड खपत है। सबसे ज्यादा खपत करने वाले देश चीन, म्यांमार, वियतनाम और जापान हैं।

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