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आयकर और शुल्कों पर मिल सकती है राहत, वित्त मंत्रालय ने पहली बार उद्योग संगठनों से मांगे सुझाव

Wed, 13 Nov 2019 07:01 PM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 13 Nov 2019 07:01 PM IST
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finance ministry for the first time asked suggestions from industry on tax reforms before budget
वित्त मंत्रालय

सरकार ने आयकर और अन्य शुल्कों में बदलाव के उद्देश्य से बड़ी पहल की है। वित्त मंत्रालय ने आम बजट, 2019-20 की तैयारियों के क्रम में उद्योग और व्यापार संगठनों से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष करों में बदलाव के बारे में सुझाव मांगे हैं। ऐसा संभवत: पहली बार है, जब उद्योग जगत से इस तरह के सुझाव मांगे गए हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को वित्त वर्ष 2020-21 के लिए 1 फरवरी को आम बजट पेश करना है। गौरतलब है कि सीतारमण ने वित्त मंत्री के रूप में इस साल जुलाई में अपना पहला बजट पेश किया था और एक महीने के भीतर ही सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए अतिरिक्त उपायों का एलान करना पड़ा था।

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भले ही अभी तक मंत्रालय विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों और हितधारकों के साथ बजट पूर्व परामर्श करता रहा है, लेकिन वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले राजस्व विभाग ने पहली बार सर्कुलर जारी करके आयकर की दरों और उत्पाद व सीमा शुल्कों जैसे अप्रत्यक्ष करों में बदलाव के लिए सर्कुलर जारी करके सुझाव मांगे हैं। 
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11 नवंबर को जारी सर्कुलर के माध्यम से उद्योग और व्यापार संगठनों से ‘आर्थिक औचित्य के मद्देनजर शुल्क ढांचे, दरों और प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष कर आधार बढ़ाने पर सुझाव’ मांगे गए हैं। इसमें कहा गया, ‘उत्पादन, कीमतें व बदलाव से राजस्व पर असर और आपके प्रस्ताव के समर्थन में कोई अन्य सूचना आदि से संबंधित सुझाव और विचार विभिन्न सांख्यिकीय जानकारियों के पूरक हो सकते हैं।’
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सर्कुलर में कहा गया, ‘प्रत्यक्ष कर के मामले में मध्यम अवधि में सरकार की नीति कर प्रोत्साहन, कटौती और छूट खत्म करना है, साथ ही कर की दरों को व्यावहारिक बनाना भी है। ऐसी भी उम्मीद की जाती है कि सुझाव/सिफारिश भेजते समय संबंधित सिफारिशों और उनकी पात्रता का भी उल्लेख किया जाएगा।’

5 जुलाई को अपना पहला बजट पेश करने के बाद सीतारमण ने 20 सितंबर को घरेलू कंपनियों के लिए कॉरपोरेट कर 30 फीसदी से घटाकर 22 फीसदी किए जाने का एलान किया था। इससे सभी लेवीज सहित प्रभावी कॉरपोरेट कर की दर 25.2 फीसदी रह गई है। यह राहत उन कंपनियों के लिए हैं, जो किसी तरह का प्रोत्साहन या छूट नहीं ले रही है।
1 अक्तूबर के बाद स्थापित नई विनिर्माण कंपनियों पर 15 फीसदी कॉरपोरेट कर (प्रभावी दर 17 फीसदी) लगेगा, जबकि पहले यह 25 फीसदी था। इस कदम से सरकार को 2019-20 में 1.45 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होने का अनुमान है।

जीएसटी से जुड़े अनुरोध पर नहीं होगा विचार

सर्कुलर में कहा गया कि वार्षिक बजट के तहत जीएसटी से संबंधित अनुरोध पर गौर नहीं किया गया है। जीएसटी पर अंतिम फैसला लेने वाली जीएसटी परिषद में केंद्र और राज्य मंत्री भी शामिल हैं। इसके तहत सिर्फ उत्पादन और सीमा शुल्क से संबंधित सुझाव ही मांगे गए हैं। सभी सुझाव 21 नवंबर तक देने हैं। 

कॉरपोरेट कर घटाने के बाद उठी थी आयकर घटाने की मांग

इस क्रम में सामान्य आयकरदाताओं के लिए आयकर की दरों में कमी किए जाने की मांग भी उठी, जिससे अर्थव्यवस्था के उपभोग आधारित रिवाइवल के लिए आम आदमी के हाथ में ज्यादा से ज्यादा पैसा बचे। अप्रैल-जून तिमाही में भारत की विकास दर 5 फीसदी रह गई, जो लगभग 6 साल का निचला स्तर है। ऐसे में रियल एस्टेट और वित्तीय क्षेत्रों को प्रोत्साहन दिए जाने के लिए कई एलान के बावजूद अर्थव्यवस्था के गति पकड़ने में कुछ तिमाही लग सकती हैं।

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