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CII: भारत के उपभोक्ता बाजार का आकार 2031 तक दोगुना हो सकता है, वित्त मंत्री ने जताया अनुमान
Fri, 17 May 2024 02:20 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Fri, 17 May 2024 02:20 PM IST
सार
CII: वित्त मंत्री ने सीआईआई (Confederation of Indian Industry) के कार्यक्रम के दौरान कहा कि कई लोगों का सुझाव है कि भारत के पास सेवाओं में एक बड़ा अवसर है, लेकिन हम विनिर्माण को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं।
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निर्मला सीतारमण
- फोटो : amarujala.com
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विस्तार
वित्त मंत्री ने शुक्रवार को दिल्ली में सीआईआई वार्षिक व्यापार शिखर सम्मेलन 2024 के दौरान अनुमान जताया कि भारतीय उपभोक्ता बाजार का आकार 2031 तक दोगुना हो सकता है। इसके अलावे, भारत पांच वर्षों में वैश्विक विकास में 18% तक का योगदान दे सकता है। इस दौरान वित्त मंत्री ने विनिर्माण क्षेत्र को और अधिक बढ़ावा देने पर जोर दिया।
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वित्त मंत्री ने सीआईआई (Confederation of Indian Industry) कार्यक्रम के दौरान कहा कि कई लोगों का सुझाव है कि भारत के पास सेवाओं में एक बड़ा अवसर है, लेकिन हम विनिर्माण को नजरअंदाज नहीं कर सकते हैं। इसे अधिक निवेश और सरकारी नीतियों की मदद से आगे बढ़ाया जाना चाहिए।
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सीतारमण ने कहा, ‘‘मैं कुछ अर्थशास्त्रियों द्वारा दी गई इस सलाह के विपरीत कुछ रेखांकित करना चाहती हूं कि भारत को अब विनिर्माण पर ध्यान नहीं देना चाहिए या विनिर्माण में तेजी नहीं लानी चाहिए... । मैं इस तथ्य पर जोर देना चाहती हूं कि विनिर्माण में वृद्धि होनी चाहिए। भारत को नीतियों की मदद से वैश्विक मूल्य श्रृंखला में अपनी (विनिर्माण) हिस्सेदारी भी बढ़ानी चाहिए।’’
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भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन सहित कुछ अर्थशास्त्रियों ने राय व्यक्त की है कि भारत को विनिर्माण के बजाय सेवा क्षेत्र पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि उसने वह अवसर गंवा दिया है। उनका कहना है कि चीन के विनिर्माण-आधारित वृद्धि मॉडल को अब और दोहराया नहीं जा सकता।
हालांकि, सीतारमण ने कहा कि विनिर्माण के विस्तार से भारत को आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी। उन्होंने उम्मीद जतायी कि भारत के पास अब भी अपनी विनिर्माण क्षमता बढ़ाने का अवसर है क्योंकि दुनिया कोविड-19 वैश्विक महामारी के बाद ‘चीन प्लस वन’ रणनीति पर ध्यान दे रही है।
‘कैपजेमिनी रिसर्च इंस्टीट्यूट’ की मई में जारी रिपोर्ट का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि यूरोप और अमेरिका में वरिष्ठ अधिकारियों के लिए निवेश स्थलों की सूची में भारत शीर्ष पर है, जो चीन पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं और अपनी विनिर्माण क्षमता का कुछ हिस्सा उभरते बाजारों में स्थानांतरित करना चाहते हैं।
सर्वेक्षण में शामिल करीब 760 अधिकारियों में से 65 प्रतिशत ने कहा कि वे भारत में उल्लेखनीय रूप से निवेश बढ़ाने की योजना बना रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘ यह अपने आप में हमारे भारतीय उद्योग को काफी बड़ा दायरा प्रदान करता है। पीएलआई (उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन) योजना मोबाइल तथा इलेक्ट्रॉनिक क्षेत्रों में भी बदलाव ला रही हैं।’’
एपल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र भारत
उन्होंने कहा कि 2014 में 78 प्रतिशत आयात से निर्भरता तक, आज भारत में बिकने वाले 99 प्रतिशत मोबाइल भारत में निर्मित हैं। सीतारमण ने उदाहरण देते हुए कहा कि भारत पिछले साल 1.1 अरब अमेरिकी डॉलर के निर्यात के साथ चीन के बाहर आईफोन के लिए एप्पल का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माण केंद्र बन गया।
सेवा क्षेत्र पर उन्होंने कहा कि दुनिया के 50 प्रतिशत से अधिक वैश्विक क्षमता केंद्रों (जीसीसी) पर भारत का कब्जा है और यह महत्वपूर्ण घरेलू तथा वैश्विक अवसर उत्पन्न करने वाला सबसे पसंदीदा गंतव्य बना हुआ है। भारत में जीसीसी की संख्या इस समय 1,580 से अधिक हो गई है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी नीत सरकार भारत की वृद्धि में निजी क्षेत्र को एक भागीदार के रूप में देखती है। उन्होंने कहा, ‘‘ हम निजी क्षेत्र की एक बहुत बड़ी भूमिका देखते हैं। हम वृद्धि में उनके साथ साझेदारी करना चाहेंगे। सरकार एक सुविधाप्रदाता व समर्थक के रूप में काम करेगी।’’
जेपी मॉर्गन और सिटी बैंक जैसे बड़े बैंकों की जरूरत- नीति आयोग
वित्त मंत्री के अलावा समारोह में मौजूद नीति आयोग के सीईओ बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने कहा, भारत को जेपी मॉर्गन और सिटी बैंक की तरह अंतरराष्ट्रीय स्तर के बड़े बैंकों की जरूरत है। हमें बड़े बैंकों और ऐसे वित्तीय क्षेत्र की जरूरत है जो भारतीय कंपनियों को दुनियाभर में सेवाएं दे सके। इसके लिए दूरदृष्टि की जरूरत है।
व्यापार शुल्क कम करने पर हो जोर
आर्थिक परिवर्तन के लिए व्यापार शुल्क और प्रक्रियाओं को कम करने व सेवा क्षेत्र को कड़े नियमों से मुक्त करते हुए संरक्षणवाद को हटाने सहित एक दर्जन से अधिक सुधार की जरूरत है। जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने के लिए शिक्षा और कौशल में मूलभूत सुधार होने चाहिए। महिला श्रम बल की भागीदारी दर को बढ़ाने के लिए कृषि में नीतिगत उपाय होने चाहिए। बुनियादी ढांचे और शासन सुधारों में निजी क्षेत्र के निवेश की जरूरत है।
भारत अब निवेशकों का देश बन गया है : उदय कोटक
दिग्गज बैंकर उदय कोटक ने कहा, भारत कुछ साल पहले तक बचतकर्ताओं का देश हुआ करता था। अब निवेशकों के देश में बदल गया है। पहले कंपनियां धन जुटाने के लिए विदेशी बाजारों को देखती थीं। अब घरेलू बाजार से अच्छी-खासी रकम जुटा रही हैं। यहां म्यूचुअल फंड का एसआईपी लगातार बढ़ रहा है।