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FII की भारी बिकवाली से बाजार पस्त: निवेश का रुख नॉर्थ एशिया की ओर, 'पॉजिटिव ट्रिगर' के इंतजार में दलाल स्ट्रीट
Sat, 17 Jan 2026 06:40 PM IST
नविता स्वरूप
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: नविता स्वरूप
Updated Sat, 17 Jan 2026 06:40 PM IST
सार
भारतीय शेयर बाजार से FII ने निकाले 22,529 करोड़ रुपये; जानें क्यों जारी है बिकवाली और एक्सपर्ट्स को किस 'पॉजिटिव ट्रिगर' का है इंतजार। पढ़ें खराब अर्निंग्स और वैल्यूएशन पर विस्तृत रिपोर्ट।
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- फोटो : Share Market
विस्तार
विदेशी संस्थागत निवेशकों(एफआईआई )की बिकवाली भारतीय शेयर बाजारों से लगातार जारी है। 16 जनवरी 2026 को समाप्त हुए सप्ताह तक एक बिकवली देखने को मिली। 16 जनवरी तक एफआईआई की कुल बिकवाली 22529 करोड़ रुपये की रही। इसी महीने एफआईआई एक दिन छोड़कर सभी बाकी दिनों में बिकवाली करते रहे। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि दूसरे देशों के बड़े बाजारों की तुलना में भारतीय बाजारों ने 2026 की शुरुआत से खराब प्रदर्शन करते हुए देखा जा रहा है। निफ्टि का सालाना आधार पर 1.73 प्रतिशत का रिटर्न रहा है। विशेषज्ञों का कहना है, एफआईआई की बिक्री का रुझान भारतीय शेयर बाजारों में तब तक जारी रह सकता है, जब तक बाजार में तेजी के लिए कुछ पॉजिटिव ट्रिगर नहीं आ जाता है।
खराब अर्निंग्स ग्रोथ और बढ़े हुए वैल्यूएशन से एफआईआई की बिकवाली की वजह
जियोजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेशक रणनीतिकार वीके विजयकुमार बताते हैं, साल 2025 में बाजार के बर्ताव की एक विशेष बात यह थी कि पिछले साल भारतीय बाजारों के खराब प्रदर्शन (निफ्टी का रिटर्न सिर्फ 10 प्रतिशत) किया लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने 7.44 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश बाजार में किया था। जिसने एफआईआई की 166283 करोड़ रुपये की कुल बिक्री को पूर तरह से पीछे छोड़ दिया था। इस खराब प्रदर्शन की मुख्य वजह भारत में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ (खराब आय) और उसके चलते बढ़े हुए वैल्यूएशन थे। उन्होंने कहा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर जारी सस्पेंस ने भी भावनाओं पर असर डाला।
बाजार में तेजी के लिए कुछ पॉजिटिव ट्रिगर की जरूरत
विजयकुमार कहते हैं, अब लगत रहा है कि एफआईआई की बिक्री का रुझान तब तक जारी रह सकता है, जब तक बाजार में तेजी के लिए कुछ पॉजिटिव ट्रिगर (सकारात्मक उत्प्रेरक यानी बाहरी या आंतरिक आकर्षण) नहीं आ जाता है। बाजार में रुझानों को देखें तो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का ट्रेंड जिसने साल 2025 में शेयर बाजार के ट्रेंड पर अधिकार किया था, वह 2026 की शुरुआत में तो जारी है, लेकिन यह ट्रेंड 2026 में कभी भी पलट भी सकता है, इस बात पर भी ध्यान देना होगा।
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2026 में अच्छी खबरों के बीच बाजार में संभावित उलटफेर का अवसर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने अपने 2026 के मार्केट आउटलुक के अनुसार, कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ (खराब आय) और उसके चलते बढ़े हुए वैल्यूएशन की चिंताओं के कारण भारतीय बाजार से लगातार विदेशी निवेशक पैसा बाहार निकाल रहे हैं। फिलहाल यह कैपिटल नार्थ एशिया के बाजारों की ओर घूम गया है। उम्मीद है कि 2026 में अच्छी खबरों के बीच बाजार में संभावित उलटफेर का अवसर बने, यानी बाजार में कुछ अच्छे संकेत आए और विदेशी निवेशकों को एक बार फिर आकर्षित कर सकते हैं।
बदली वैश्विक भू-राजनीति विश्व के बड़े बाजारों पर असर डाल सकती
कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा, जहां ग्लोबल इक्विटीज मौटे तौर पर मजबूत थी, वहीं भारतीय बाजारों ने खराब प्रदर्शन किया। सप्ताह के आधार पर निफ्टी-50 और सेंसेक्स-30 इंडेक्स ने फ्लैट रिटर्न दिया। इसकी मुख्य वजह सभी जानते हैं कि मिडिल ईस्ट में बढ़ा हुआ तनाव जो नया वैश्विक जोखिम पैदा कर रहा है। विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। संभावित अमेरिका के नए टैरिफ वाली खबरों की चिंताओं और भविष्य में भारत और अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर अभी अनिश्चितता निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाल रही है। वे कहते हैं, इन्ही कारणों की वजह से विदेशी निवेशक नेट सेलर बने हुए हैं और भारतीय इक्विटी से कैपिटल निकाल रहे हैं। उनका कहना है तेजी से बदली वैश्विक भू-राजनीति विश्व के बड़े बाजारों के कारोबार पर असर डाल सकती है। जबकि घरेलू बाजार में वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के नतीजे अच्छे रहने की उम्मींद है।
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खराब अर्निंग्स ग्रोथ और बढ़े हुए वैल्यूएशन से एफआईआई की बिकवाली की वजह
जियोजित इंवेस्टमेंट लिमिटेड के मुख्य निवेशक रणनीतिकार वीके विजयकुमार बताते हैं, साल 2025 में बाजार के बर्ताव की एक विशेष बात यह थी कि पिछले साल भारतीय बाजारों के खराब प्रदर्शन (निफ्टी का रिटर्न सिर्फ 10 प्रतिशत) किया लेकिन घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) ने 7.44 लाख करोड़ रुपये का बड़ा निवेश बाजार में किया था। जिसने एफआईआई की 166283 करोड़ रुपये की कुल बिक्री को पूर तरह से पीछे छोड़ दिया था। इस खराब प्रदर्शन की मुख्य वजह भारत में कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ (खराब आय) और उसके चलते बढ़े हुए वैल्यूएशन थे। उन्होंने कहा भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता पर जारी सस्पेंस ने भी भावनाओं पर असर डाला।
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बाजार में तेजी के लिए कुछ पॉजिटिव ट्रिगर की जरूरत
विजयकुमार कहते हैं, अब लगत रहा है कि एफआईआई की बिक्री का रुझान तब तक जारी रह सकता है, जब तक बाजार में तेजी के लिए कुछ पॉजिटिव ट्रिगर (सकारात्मक उत्प्रेरक यानी बाहरी या आंतरिक आकर्षण) नहीं आ जाता है। बाजार में रुझानों को देखें तो आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) का ट्रेंड जिसने साल 2025 में शेयर बाजार के ट्रेंड पर अधिकार किया था, वह 2026 की शुरुआत में तो जारी है, लेकिन यह ट्रेंड 2026 में कभी भी पलट भी सकता है, इस बात पर भी ध्यान देना होगा।
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2026 में अच्छी खबरों के बीच बाजार में संभावित उलटफेर का अवसर
एचडीएफसी सिक्योरिटीज ने अपने 2026 के मार्केट आउटलुक के अनुसार, कंपनियों की खराब अर्निंग्स ग्रोथ (खराब आय) और उसके चलते बढ़े हुए वैल्यूएशन की चिंताओं के कारण भारतीय बाजार से लगातार विदेशी निवेशक पैसा बाहार निकाल रहे हैं। फिलहाल यह कैपिटल नार्थ एशिया के बाजारों की ओर घूम गया है। उम्मीद है कि 2026 में अच्छी खबरों के बीच बाजार में संभावित उलटफेर का अवसर बने, यानी बाजार में कुछ अच्छे संकेत आए और विदेशी निवेशकों को एक बार फिर आकर्षित कर सकते हैं।
बदली वैश्विक भू-राजनीति विश्व के बड़े बाजारों पर असर डाल सकती
कोटक सिक्योरिटीज के हेड इक्विटी रिसर्च श्रीकांत चौहान ने कहा, जहां ग्लोबल इक्विटीज मौटे तौर पर मजबूत थी, वहीं भारतीय बाजारों ने खराब प्रदर्शन किया। सप्ताह के आधार पर निफ्टी-50 और सेंसेक्स-30 इंडेक्स ने फ्लैट रिटर्न दिया। इसकी मुख्य वजह सभी जानते हैं कि मिडिल ईस्ट में बढ़ा हुआ तनाव जो नया वैश्विक जोखिम पैदा कर रहा है। विशेषकर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। संभावित अमेरिका के नए टैरिफ वाली खबरों की चिंताओं और भविष्य में भारत और अमेरिका व्यापार वार्ता को लेकर अभी अनिश्चितता निवेशकों के सेंटिमेंट पर असर डाल रही है। वे कहते हैं, इन्ही कारणों की वजह से विदेशी निवेशक नेट सेलर बने हुए हैं और भारतीय इक्विटी से कैपिटल निकाल रहे हैं। उनका कहना है तेजी से बदली वैश्विक भू-राजनीति विश्व के बड़े बाजारों के कारोबार पर असर डाल सकती है। जबकि घरेलू बाजार में वित्त वर्ष 26 की तीसरी तिमाही के नतीजे अच्छे रहने की उम्मींद है।
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