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India UK FTA: ब्रिटेन-भारत एफटीए से किसानों को मिलेगा बड़ा लाभ, डेयरी जैसे संवेदनशील उत्पाद टैरिफ छूट से बाहर

Thu, 24 Jul 2025 01:29 PM IST
रिया दुबे बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Thu, 24 Jul 2025 01:29 PM IST
सार

भारत-ब्रिटेन एफटीए का लाभ सबसे ज्यादा भारतीय किसानों को होने की उम्मीद है। अगले तीन वर्षों में यूनाइटेड किंगडम को भारत का कृषि निर्यात 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की संभावना है। इस समझौते के लागू होने के बाद, भारत की 95 प्रतिशत से अधिक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य टैरिफ लाइनों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। 

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Farmers will get big benefit from UK-India FTA, sensitive products like dairy are out of tariff exemption
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : ANI

विस्तार

भारत-ब्रिटने व्यापार समझौते (एफटीए) का सबसे ज्यादा फायदा भारतीय किसानों को होने की संभावना है। इस समझौते को औपचारिक रूप देने के बाद, एफटीए से भारतीय उत्पादों के लिए ब्रिटेन में प्रीमियम बाजार खुलने की उम्मीद है। इससे जर्मनी और नीदरलैंड जैसे यूरोपीय देशों के निर्यातकों को मिलने वाले लाभों के समान या उससे बेहतर लाभ भी मिलने की उम्मीद है। 

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कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को मिलेगी शुल्क मुक्त पहुंच
हल्दी, काली मिर्च और इलायची जैसे भारतीय खाद्य पदार्थों के साथ-साथ, मैंगो पल्प, अचार और दालों जैसे प्रसंस्कृत उत्पादों को शुल्क मुक्त का लाभ मिलगा। इससे उनके मार्जिन और बाजार पहुंच में सुधार होगा। अगले तीन वर्षों में यूनाइटेड किंगडम को भारत का कृषि निर्यात 20 प्रतिशत से अधिक बढ़ने की उम्मीद है। यह वृद्धि भारतीय कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए शुल्क मुक्त पहुंच से प्रेरित होगी। इस समझौते के लागू होने के बाद, भारत की 95 प्रतिशत से अधिक कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य टैरिफ लाइनों पर कोई शुल्क नहीं लगेगा। 
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किसानों को विविधता लाने में मिलेगी मदद
इनमें फल, सब्जियां, अनाज, मसाला मिश्रण, फलों का गूदा, खाने के लिए तैयार भोजन, और बहुत कुछ शामिल है। इस कदम से ब्रिटेन में इन वस्तुओं की पहुंच लागत कम होगी। साथ ही मुख्यधारा और जातीय खुदरा श्रृंखलाओं, दोनों में उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ेगी। एफटीए कटहल, बाजरा, सब्जियों और जैविक जड़ी-बूटियों जैसे नए और उभरते उत्पादों के लिए भी अवसर खोलता है। इससे किसानों को विविधता लाने और घरेलू मूल्य में उतार-चढ़ाव को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए प्रोत्साहन मिलेगा। एफटीए से भारतीय कृषि क्षेत्र को उच्च मात्रा से उच्च मूल्य वाले उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने और स्थानीय बाजारों की पूर्ति से वैश्विक स्तर पर विस्तार करने में मदद मिलेगी।

डेयरी उत्पादों पर टैरिफ रियायत नहीं दी जाएगी
साथ ही, मुक्त व्यापार समझौते के जरिए भारत ने अपने सबसे संवेदनशील कृषि क्षेत्रों की सुरक्षा के लिए कदम उठाए हैं। डेयरी उत्पादों, सेब, जई और खाद्य तेलों पर कोई टैरिफ रियायत नहीं दी जाएगी। इससे यह सुनिश्चित होगा कि इन क्षेत्रों के घरेलू किसान प्रभावित न हों।

नीली अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर 
इस समझौते से भारत के मत्स्य पालन क्षेत्र को भी काफी बढ़ावा मिलेगा। खासतौर से आंध्र प्रदेश, ओडिशा, केरल और तमिलनाडु जैसे तटीय राज्यों में। झींगा, टूना, मछली का भोजन और आहार जैसे 99 प्रतिशत निर्यातों के लिए शून्य-शुल्क पहुंच की पेशकश करके, जिन पर वर्तमान में 4.2 से 8.5 प्रतिशत के बीच शुल्क लगता है।




एफटीए से भारत के समुद्री खाद्य निर्यात में तेजी से वृद्धि होने की उम्मीद है। ब्रिटेन का समुद्री आयात बाजार, जिसका मूल्य 5.4 अरब डॉलर है, भारत की नीली अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा अवसर प्रदान करता है।
 

Farmers will get big benefit from UK-India FTA, sensitive products like dairy are out of tariff exemption
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Adobestock
पेय पदार्थों के निर्यात में होगी वृद्धि
इसके अलावा एफटीए कॉफी, चाय, मसाले और अन्य पेय पदार्थों जैसे उत्पादों में भारत के उच्च मार्जिन वाले ब्रांडेड निर्यात के विस्तार की नींव रखता है। वर्तमान में, भारत के कॉफी निर्यात में ब्रिटेन का योगदान 1.7 प्रतिशत, चाय निर्यात में 5.6 प्रतिशत और मसालों में 2.9 प्रतिशत है। टैरिफ समाप्त होने के साथ, इन क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है। विशेष रूप से, भारतीय इंस्टेंट कॉफी तेजी से बढ़ते प्रीमियम क्षेत्र में जर्मनी और स्पेन जैसे यूरोपीय निर्यातकों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए बेहतर स्थिति में होगी।

भारत के कृषि निर्यात लक्ष्य को मिलेगा बल
सरकार के अनुसार, भारत-ब्रिटिश मुक्त व्यापार समझौता देश के कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों के लिए एक क्रांतिकारी बदलाव साबित होगा। निर्यात को बढ़ावा देने से 2030 तक कृषि निर्यात को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के भारत के बड़े लक्ष्य को भी बल मिलेगा। 

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