गैर बासमती धान उपजाने वाले किसानों को मिलेगी बेहतर कीमत, चीन में होने लगा चावल का निर्यात
कई वर्षों के अंतराल के बाद एक बार फिर से भारतीय गैर बासमती चावल का निर्यात चीन को होने लगा है। इस कारण उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर के राज्यों के गैर बासमती धान उगाने वाले किसानों को अब उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकेगा।
भारत पिछले 10 महीने में चीन को 10 हजार टन गैर बासमती चावल का निर्यात कर चुका है। वहीं, गैर बासमती चावल से लदा एक जहाज पिछले सप्ताह ही भेजा गया है। वर्तमान में भारत दुनिया का सबसे बड़ा चावल निर्यातक है। 2017-18 में भारत ने कुल 86.50 लाख टन गैर बासमती चावल का निर्यात किया था। इसमें अकेले चीन को 20.28 लाख टन निर्यात किया गया था।
पीएम की सक्रियता का असर
ट्रेड प्रोमोशन काउंसिल ऑफ इंडिया (टीपीसीआई) के अध्यक्ष मोहित सिंगला ने बताया कि 2012 से पहले चीन को गैर बासमती चावल का निर्यात किया जाता था, लेकिन कीटनाशी की उपलब्धता के मसले पर कुछ मतभेद होने के कारण उसने भारत से आयात पर प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सक्रियता दिखाते हुए चीन से इस मसले को सुलझाने के लिए बातचीत की। इसका असर अब दिखने लगा है।
गैर बासमती चावल का बढ़ेगा निर्यात
ऑल इंडिया राइस एक्सपोटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष विजय सेतिया का कहना है कि इस साल गैर बासमती चावल का निर्यात बढ़ने की संभावना है। इसका एक प्रमुख कारण चीन में गैर बासमती चावल का निर्यात शुरू होना है।
इसके अलावा भारत सरकार ने पिछले दिनों मर्केंडाइज एक्सपोर्ट फ्रॉम इंडिया स्कीम (एमईआईएस) के तहत इसके निर्यात पर पांच फीसदी की सब्सिडी देने की घोषणा की थी। हालांकि, सरकार ने अवधि तय करते हुए कहा कि 26 नवंबर, 2018 से 25 मार्च, 2019 के बीच होने वाले निर्यात पर ही सब्सिडी दी जाएगी
अभी से खुश होना ठीक नहीं
सेतिया का कहना है कि चीन में चावल का निर्यात खुलने पर अभी से खुश होना जल्दबाजी होगी। उनके मुताबिक, भारतीय चावल और चीन के चावल में अंतर है। भारतीय चावल बनाने पर जहां फैलता है, वहीं चीनी चावल चिपकता है।
दोनों के स्वाद में भी काफी अंतर है। ऐसे में देखना होगा कि वहां के ग्राहकों को भारतीय चावल पसंद आता है या नहीं। निरपेक्ष रूप से देखा जाए तो गुणवत्ता के मामले में भारतीय चावल बेहतर है।
बांग्लादेश को लेकर चिंता
दरअसल, भारत सबसे ज्यादा बांग्लादेश को गैर बासमती चावल का निर्यात करता रहा है। लेकिन वहां के किसानों के प्रतिरोध के बाद बांग्लादेश सरकार ने आयातित चावल पर 28 फीसदी का कर लगा दिया है। इससे वहां भारतीय चावल महंगा हो गया है।
यही वजह है कि चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही में बांग्लादेश को महज 3.40 लाख टन गैर बासमती चावल ही निर्यात किया जा सका है, जबकि इस अवधि में देश का कुल गैर बासमती चावल निर्यात 37.23 लाख टन है।