फसल बीमा दावे का 60 दिनों में हर हाल में भुगतान, बीमा कंपनियों पर कसेगी नकेल, उल्लंघन पर जुर्माना
70 फीसदी दावों का किया गया भुगतान
केंद्र सरकार के नए दिशा-निर्देशों से बीमा कंपनियों द्वारा मौजूदा समय में किसानों के दावों के साथ किए जा रहे खिलवाड़ पर अंकुश लगेगा। वर्ष 2017-18 में कंपनियों ने 24,352 करोड़ रुपये का प्रीमियम इकट्ठा किया।
कुल 16,000 करोड़ रुपये के दावों में किसानों को अब तक 11,000 करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। शेष 5,000 करोड़ रुपये का भुगतान और किया जाना है। यानी कुल दावों में करीब 70 फीसदी का भुगतान कंपनियों द्वारा किया जाएगा।
अगले माह लागू होंगे दिशा-निर्देश
कृषि मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, किसानों को ज्यादा से ज्यादा लाभ दिलाने के मकसद से पीएमएफबीवाई लाया गया था। ऐसे में हम दावों के भुगतान का प्रतिशत 80 से 90 तक लाना चाहते हैं। कई मामलों में अनदेखी की शिकायतें मिली हैं।
इसलिए नए दिशा-निर्देशों में सख्ती बरतने पर भी सहमति बनी है। कई स्तरों पर तकनीकी कारण दिखाकर दावे खारिज किए जाते हैं, जिनकी समीक्षा जरूरी है। उम्मीद है कि अगले माह में इन दिशा-निर्देशों को लागू कर दिया जाएगा।
किसान देते हैं 2 फीसदी प्रीमियम
किसानों को पीएमएफबीवाई के तहत 2 फीसदी प्रीमियम देना होता है। शेष प्रीमियम केंद्र और राज्यों द्वारा कंपनियों को मुहैया कराया जाता है। वर्ष 2015-16 में शुरू हुई फसल बीमा योजना में 4,200 करोड़ रुपये का प्रीमियम आया था, जो 2016-17 में बढ़कर 22,180 करोड़ रुपये तक जा पहुंचा। पिछले वित्त वर्ष में यह आंकड़ा 24,352 करोड़ रुपये रहा, जबकि माना जा रहा था कि यह 27,000 करोड़ रुपये के आसपास रहेगा।