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विशेषज्ञ की राय: बजट गेमचेंजर...आर्थिक विकास को प्रोत्साहन, आसान होगी विकसित भारत की राह
Sun, 02 Feb 2025 04:39 AM IST
शुभम कुमार
नीति आयोग के पूर्व सीईओ, अमिताभ कांत
नीति आयोग के पूर्व सीईओ, अमिताभ कांत
Published by: शुभम कुमार
Updated Sun, 02 Feb 2025 04:39 AM IST
सार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आठवें बजट में आठ ऐसी बातें हो जो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गेमचेंजर साबित होंगी। कृषि, एमएसएमई, निवेश एवं निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने के साथ एक व्यापक रणनीति पेश की गई है।
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नीति आयोग के पूर्व सीईओ अमिताभ कांत
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के आठवें बजट में आठ ऐसी बातें हो जो विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए गेमचेंजर साबित होंगी। कृषि, एमएसएमई, निवेश एवं निर्यात पर ध्यान केंद्रित करने के साथ एक व्यापक रणनीति पेश की गई है। तात्कालिक एवं दीर्घकालिक दोनों तरह की चुनौतियों से निपटने वाला यह बजट आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगा।
पहला: हमने कई वर्षों में सबसे बड़ा व्यक्तिगत आयकर सुधार देखा। टैक्स छूट बढ़ने से लोगों की जेब में पैसा बचेगा, जिससे खपत बढ़ना तय है। यह जीडीपी वृद्धि के साथ अर्थव्यवस्था के प्राथमिक इंजन को गति देगा।
दूसरा: वित्त वर्ष 2026 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 फीसदी पर रखकर सरकार वर्तमान और संभावित निवेशकों को आश्वस्त कर रही है कि भारत स्थायी आर्थिक प्रशासन की राह पर है।
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तीसरा: कपड़ा, चमड़ा, खिलौने और खाद्य प्रसंस्करण जैसे-प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर एक तीर से कई निशाने लगाए हैं।
चौथा: बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पुनर्जीवित करने से लंबे समय से जारी परियोजनाओं में नई जान आ जाएगी। 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मुद्रीकरण योजना संसाधन दक्षता को बढ़ाने के लिए एक बढ़िया दृष्टिकोण है।
पांचवां: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा विकसित करने का लक्ष्य, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर अनुसंधान के लिए 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, भारत के ऊर्जा परिदृश्य को आधुनिक बनाने का ठोस प्रयास है।
छठा: फंड ऑफ फंड्स स्कीम के लिए 10,000 करोड़ रुपये की पुनःपूर्ति और वैकल्पिक निवेश फंड के माध्यम से स्टार्टअप के लिए घरेलू उद्यम पूंजी को बढ़ावा देने के साथ नवाचार पर जोर दिया गया है। एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और जैव प्रौद्योगिकी में निवेश भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेजी से बढ़ाएगा।
सातवां : राज्यों का निवेश मित्रता सूचकांक क्षेत्रीय सरकारों को आकर्षक निवेश स्थितियां विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने का सिद्ध तरीका है। जन विश्वास विधेयक 2.0 सौ से अधिक प्रावधानों को अपराधमुक्त करके निवेशकों को आश्वस्त करता है, जिन्होंने लंबे समय से उद्यमियों को परेशान किया है।
आठवां: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने पर बजट का नए सिरे से ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। क्रेडिट गारंटी को दोगुना करने से वित्तपोषण की चुनौतियों का समाधान होगा, जिससे इन उद्यमों को पनपने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर मिलेगा। इन उपायों का उद्देश्य न केवल आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है, बल्कि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा के लिए एक सम्मोहक दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करना है।
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पहला: हमने कई वर्षों में सबसे बड़ा व्यक्तिगत आयकर सुधार देखा। टैक्स छूट बढ़ने से लोगों की जेब में पैसा बचेगा, जिससे खपत बढ़ना तय है। यह जीडीपी वृद्धि के साथ अर्थव्यवस्था के प्राथमिक इंजन को गति देगा।
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दूसरा: वित्त वर्ष 2026 तक राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 4.4 फीसदी पर रखकर सरकार वर्तमान और संभावित निवेशकों को आश्वस्त कर रही है कि भारत स्थायी आर्थिक प्रशासन की राह पर है।
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तीसरा: कपड़ा, चमड़ा, खिलौने और खाद्य प्रसंस्करण जैसे-प्रमुख श्रम-प्रधान क्षेत्रों को पुनर्जीवित कर एक तीर से कई निशाने लगाए हैं।
चौथा: बुनियादी ढांचे में सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) पुनर्जीवित करने से लंबे समय से जारी परियोजनाओं में नई जान आ जाएगी। 10 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति मुद्रीकरण योजना संसाधन दक्षता को बढ़ाने के लिए एक बढ़िया दृष्टिकोण है।
पांचवां: 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा विकसित करने का लक्ष्य, छोटे मॉड्यूलर रिएक्टरों पर अनुसंधान के लिए 20,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, भारत के ऊर्जा परिदृश्य को आधुनिक बनाने का ठोस प्रयास है।
छठा: फंड ऑफ फंड्स स्कीम के लिए 10,000 करोड़ रुपये की पुनःपूर्ति और वैकल्पिक निवेश फंड के माध्यम से स्टार्टअप के लिए घरेलू उद्यम पूंजी को बढ़ावा देने के साथ नवाचार पर जोर दिया गया है। एआई, क्वांटम कंप्यूटिंग और जैव प्रौद्योगिकी में निवेश भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को तेजी से बढ़ाएगा।
सातवां : राज्यों का निवेश मित्रता सूचकांक क्षेत्रीय सरकारों को आकर्षक निवेश स्थितियां विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने का सिद्ध तरीका है। जन विश्वास विधेयक 2.0 सौ से अधिक प्रावधानों को अपराधमुक्त करके निवेशकों को आश्वस्त करता है, जिन्होंने लंबे समय से उद्यमियों को परेशान किया है।
आठवां: सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को समर्थन देने पर बजट का नए सिरे से ध्यान केंद्रित करना महत्वपूर्ण है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। क्रेडिट गारंटी को दोगुना करने से वित्तपोषण की चुनौतियों का समाधान होगा, जिससे इन उद्यमों को पनपने और रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण योगदान देने का अवसर मिलेगा। इन उपायों का उद्देश्य न केवल आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करना है, बल्कि 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा के लिए एक सम्मोहक दृष्टिकोण को भी प्रतिबिंबित करना है।