EPFO Claim: ईपीएफओ से पैसा निकालना हुआ आसान; कैंसिल्ड चेक अपलोड करने की जरूरत नहीं, जानिए और क्या बदला गया
EPFO Claim: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों को पीएफ खातों से ऑनलाइन धनराशि निकालने के लिए आवेदन करते समय, यूएएन (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) या पीएफ नंबर से जुड़े बैंक खाते की चेक लीफ या पासबुक की सत्यापित फोटो कॉपी अपलोड करनी होती थी। अब इस जरूरत को सरकार ने खत्म कर दिया है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।
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भविष्य निधि से ऑनलाइन निकासी के इच्छुक आवेदकों को अब कैंसिल्ड चेक की फोटो अपलोड करने और उनके बैंक खातों को नियोक्ताओं की ओर से सत्यापित करने की जरूरत नहीं होगी। रिटायरमेंट बॉडी ने इन फैसलों के साथ ग्राहकों के लिए दावा प्रक्रिया बनाने की जानकारी दी है। पेंशन नियामक के इस कदम से लगभग आठ करोड़ ईपीएफओ सदस्यों के लिए दावा निपटान प्रक्रिया आसान हो जाएगी।
वर्तमान में, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) के सदस्यों को पीएफ खातों से ऑनलाइन धनराशि निकालने के लिए आवेदन करते समय, यूएएन (यूनिवर्सल अकाउंट नंबर) या पीएफ नंबर से जुड़े बैंक खाते की चेक लीफ या पासबुक की सत्यापित फोटो कॉपी अपलोड करनी होती है। नियोक्ताओं को भी आवेदक के बैंक खाते के विवरण को स्वीकृत करना आवश्यक है।
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ईपीएफओ का दावा- क्लेम खारिज होने से जुड़ी शिकायतें घटेंगी
श्रम मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि ईपीएफओ ने ऑनलाइन दावा दाखिल करते समय चेक लीफ या सत्यापित बैंक पासबुक की तस्वीर अपलोड करने की आवश्यकता खत्म कर दिया है। ईपीएफओ के अनुसार ईपीएफ सदस्यों की दावा प्रक्रिया को आसान बनाने के लिए यह फैसला लिया गया है। पेंशन नियामक के अनुसार इन उपायों से दावों के निपटान की प्रक्रिया में उल्लेखनीय सुधार आएगा और दावों के खारिज होने जुड़ी शिकायतें घटेंगी।
ईपीएफओ के अनुसार शुरू में कुछ केवाईसी-अपडेट किए गए सदस्यों के लिए पायलट आधार पर यह छूट दी गई थी। 28 मई 2024 को पायलट लॉन्च के बाद से पहले ही 1.7 करोड़ ईपीएफ सदस्यों को लाभ मिल चुका है। मंत्रालय ने कहा कि सफल पायलट के बाद, ईपीएफओ ने अब सभी सदस्यों को यह छूट दे दी है।
ईपीएफओ के अनुसार नियोक्ता की ओर से बैंक खाते के सत्यापन के बाद प्रक्रिया को मंजूरी देने में लिया जाने वाला औसत समय लगभग 13 दिन का होता है। इससे इससे नियोक्ता पर कार्यभार भी बढ़ जाता है। इसके असर से सदस्य के बैंक खाते को जोड़ने में देरी होती है। इसे देखते हुए ही इस प्रक्रिया को समाप्त करने का फैसला लिया गया है।
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लगभग आठ करोड़ करोड़ खाताधारकों को मिलेगा बदलाव का लाभ
वर्तमान में प्रत्येक माह अंशदान करने वाले 7.74 करोड़ सदस्यों में से 4.83 करोड़ सदस्यों ने अपने बैंक खातों को यूएएन से जोड़ लिया है तथा 14.95 लाख स्वीकृतियां नियोक्ताओं के स्तर पर लंबित हैं।
चूंकि अब नियोक्ताओं की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है, इससे 14.95 लाख से अधिक सदस्यों को तुरंत लाभ मिलेगा, जिनकी मंजूरी नियोक्ताओं के पास लंबित है। बयान के अनुसार, सरलीकृत प्रक्रिया से उन लोगों को भी सुविधा होगी जो आधार-आधारित ओटीपी के माध्यम से विधिवत प्रमाणित आईएफएससी कोड के साथ अपना नया बैंक खाता नंबर दर्ज करके अपने पहले से जुड़े बैंक खाते को बदलना चाहते हैं।