IT: निवेश दस्तावेज जमा नहीं किया तो कट जाएगा वेतन, 31 मार्च से पहले जमा कराने होते हैं संबंधित कागजात
निवेश सलाहकार का कहना है कि कंपनियां प्रस्तावित निवेश से जुड़े दस्तावेज मांगती हैं और उसी आधार पर हर माह टैक्स काटती हैं। वित्त वर्ष के अंत तक अगर प्रस्तावित रकम से कम निवेश करते हैं तो जनवरी, फरवरी व मार्च में उसके हिसाब से आपके वेतन से ज्यादा टीडीएस काटा जाता है।
विस्तार
अगर आप नौकरीपेशा हैं व आपका वेतन कर के दायरे में आता है तो निवेश संबंधी दस्तावेज 31 मार्च, 2024 से पहले कंपनियों के पास जमा कर दें। दस्तावेज नहीं देने पर आपको ज्यादा टीडीएस का भुगतान करना पड़ेगा। इसका असर आपके हाथ में आने वाले वेतन पर पड़ेगा। अगर तय अवधि से पहले अपने कर स्लैब के मुताबिक किसी भी तरह का निवेश करते हैं तो आप इसकी जानकारी बाद में आईटीआर दाखिल करते समय देकर रिफंड के लिए आवेदन कर सकते हैं।
80सी में कर छूट के लिए जरूरी दस्तावेज
- किराये की रसीद: किराया सालाना एक लाख रुपये से ज्यादा होने पर मासिक किराया रसीद। इसमें मकान मालिक के नाम के साथ पैन कार्ड जरूरी। किराये के नकद भुगतान पर रेंट रसीद, जिस पर राजस्व टिकटें होनी चाहिए।
- राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (एनएससी), पब्लिक प्रोविडेंट फंड, टैक्स सेविंग म्यूचुअल फंड, ईएलएसएस, बच्चों की ट्यूशन फीस, सुकन्या समृद्धि योजना में निवेश से जुड़े दस्तावेज।
- होम लोन: अगर आपने संपत्ति के लिए कोई होम लोन लिया है और बैंक को हर साल मूलधन का भुगतान करते हैं तो इस पर आयकर नियमों के तहत 1.50 लाख रुपये तक की छूट मिलती है। इसे पाने के लिए आपको जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। कुछ मामलों में बिल्डर से प्राप्त प्रमाणपत्र भी देना पड़ता है।
इन तरीकों से भी बचा सकते हैं गाढ़ी कमाई
- 80डी: इसके तहत स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम पर टैक्स बचा सकते हैं। अगर खुद के लिए, जीवनसाथी या बच्चों के लिए प्रीमियम भरते हैं तो 25,000 रुपये तक कर बचा सकते हैं। 60 साल से ज्यादा उम्र के माता-पिता के लिए स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम देते हैं तो 50,000 रुपये तक छूट पा सकते हैं। अगर करदाता व माता-पिता दोनों वरिष्ठ नागरिक हैं तो एक वित्त वर्ष में एक लाख रुपये तक छूट का दावा।
- 80सीसीडी (1बी): एनपीएस टियर-1 खाते में निवेश पर 50,000 रुपये तक की छूट। यह 80सी से अलग है। इस तरह, आप दो लाख रुपये तक की राशि पर छूट पा सकते हैं यानी 80सी के तहत 1.5 लाख व 80सीसीडी 1(बी) के तहत 50,000 रुपये।
- आयकर कानून की धारा 80 यू, 80ईईए, 80टीटीए, 80टीटीबी और 80ई के तहत भी आयकर रिटर्न भरते समय आप छूट का दावा कर सकते हैं।
तो रिटर्न दाखिल करने में आसानी
स्वीटी मनोज जैन, निवेश सलाहकार का कहना है कि कंपनियां प्रस्तावित निवेश से जुड़े दस्तावेज मांगती हैं और उसी आधार पर हर माह टैक्स काटती हैं। वित्त वर्ष के अंत तक अगर प्रस्तावित रकम से कम निवेश करते हैं तो जनवरी, फरवरी व मार्च में उसके हिसाब से आपके वेतन से ज्यादा टीडीएस काटा जाता है। कंपनी को निवेश की सही जानकारी देने पर रिटर्न भरना भी आसाना होता है।