ED: बैंक के साथ 1396 करोड़ की धोखाधड़ी; 10 लग्जरी कारें, तीन सुपर बाइक और करोड़ों के आभूषण जब्त
ईडी ने सीआईडी, हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा मेसर्स आईटीसीओएल और उसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। आरोप लगाया गया है कि मेसर्स आईटीसीओएल के निदेशकों ने विभिन्न कंपनियों और सीए के अन्य आधिकारिक कर्मचारियों के साथ मिलकर बैंकों के एक संघ से लिए गए ऋणों का गबन किया।
विस्तार
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), शिमला ने 30 अगस्त को ओडिशा के भुवनेश्वर में 2 परिसरों में तलाशी अभियान चलाया, जिसमें शक्ति रंजन दाश का आवासीय परिसर और उन कंपनियों का व्यावसायिक परिसर शामिल है, जिनमें शक्ति रंजन दाश प्रबंध निदेशक हैं। ये परिसर मेसर्स अनमोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड (एएमपीएल) और मेसर्स अनमोल रिसोर्सेज प्राइवेट लिमिटेड (एआरपीएल) से जुड़े हैं। यह तलाशी अभियान मेसर्स इंडियन टेक्नोमैक कंपनी लिमिटेड (मैसर्स आईटीसीओएल) के बैंक धोखाधड़ी मामले में चल रही मनी लॉन्ड्रिंग जांच के संबंध में पीएमएलए, 2002 के प्रावधानों के तहत चलाया गया। शेल कंपनियों व फर्जी बिक्री से बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से ऋण लेकर 1396 करोड़ की धोखाधड़ी की गई। ईडी ने अब इस मामले में 10 लग्जरी कारें, 3 सुपर बाइक व करोड़ों रुपये के आभूषण एवं अन्य दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।
ईडी ने सीआईडी, हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा मेसर्स आईटीसीओएल और उसके प्रमोटरों के खिलाफ दर्ज एफआईआर के आधार पर उक्त मामले की जांच शुरू की थी। आरोप लगाया गया है कि मेसर्स आईटीसीओएल के निदेशकों ने विभिन्न कंपनियों और सीए के अन्य आधिकारिक कर्मचारियों के साथ मिलकर बैंकों के एक संघ से लिए गए ऋणों का गबन किया। ईडी की जांच से पता चला है कि मेसर्स आईटीसीओएल ने बैंकों के समक्ष जाली विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रस्तुत करके और डमी/शेल कंपनियों को फर्जी बिक्री दिखाकर वर्ष 2009 से 2013 तक बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम से ऋण प्राप्त किया था। इसके अलावा, मेसर्स आईटीसीओएल द्वारा प्राप्त ऋणों का उपयोग उन उद्देश्यों के लिए नहीं किया गया जिनके लिए उन्हें मंजूरी दी गई थी। मामले में बैंक धोखाधड़ी की राशि लगभग 1396 करोड़ रुपये थी।
इस मामले में पहले ईडी ने 310 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। इसके अलावा, 310 करोड़ रुपये की इन कुर्क संपत्तियों में से, 289 करोड़ रुपये की संपत्ति ईडी द्वारा अप्रैल 2025 के महीने में बैंक ऑफ इंडिया के नेतृत्व वाले बैंकों के कंसोर्टियम को पहले ही बहाल कर दी गई है। मेसर्स अनमोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड, ओडिशा (एएमपीएल) के बैंक खातों में 59.80 करोड़ रुपये जमा किए गए। इसके अलावा, यह भी पता चला कि एएमपीएल के प्रबंध निदेशक शक्ति रंजन दाश ने जानबूझकर राकेश कुमार शर्मा (मेसर्स आईटीसीओएल के प्रवर्तक) को बैंक ऋण राशि को अन्यत्र स्थानांतरित करने और ओडिशा में खनन गतिविधियों में उसका उपयोग करने में मदद की। इस प्रकार, शक्ति रंजन दाश ने उक्त राशि (अपराध की आय) को मेसर्स अनमोल माइंस प्राइवेट लिमिटेड के बैंक खातों में जमा कर दिया, जिसने इस दागी धन को अपनी लेखा पुस्तकों में बेदाग धन के रूप में प्रदर्शित किया। हालांकि ईडी की नजरों से यह घोटाला बच नहीं सका।
ईडी के तलाशी अभियान के दौरान, शक्ति रंजन दाश और उनके स्वामित्व वाली कंपनियों से संबंधित 10 लग्जरी वाहन और 3 सुपर बाइक जब्त की गईं। जब्त की गई महंगी लग्जरी गाड़ियों/सुपर बाइकों में पोर्श कायेन, मर्सिडीज बेंज जीएलसी, बीएमडब्ल्यू-एक्स7, ऑडी ए3, मिनी कूपर, होंडा गोल्ड विंग बाइक आदि शामिल हैं, जिनकी कीमत 7 करोड़ रुपये से अधिक है। इसके अलावा, 13 लाख रुपये की नकदी, लगभग 1.12 करोड़ रुपये के आभूषण और शक्ति रंजन दाश और उनके स्वामित्व वाली कंपनियों की अचल संपत्तियों से संबंधित विभिन्न आपत्तिजनक रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, तलाशी अभियान के दौरान शक्ति रंजन दाश के 2 लॉकर भी जब्त कर लिए गए हैं।