आर्थिक मामलों के सचिव ने कहा: आर्थिक व प्रौद्योगिकी में सुधार से बढ़ा जीएसटी संग्रह
- आर्थिक व प्रौद्योगिकी में सुधार के कारण जीएसटी संग्रह में सुधार हुआ है- आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज।
- पिछले छह महीनों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर राजस्व प्राप्त हुआ।
- लगातार चौथी बार यह 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत है।
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आर्थिक मामलों के सचिव तरुण बजाज ने कहा कि, 'आर्थिक सुधार और प्रौद्योगिकी में सुधार के कारण जीएसटी संग्रह में सुधार हुआ है। इसके कारण कर राजस्व में वृद्धि हुई है। पिछले छह महीनों में एक लाख करोड़ रुपये से अधिक का कर राजस्व प्राप्त हुआ, जो हमारी उम्मीद से बेहतर है।' वित्त मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि मार्च में जीएसटी वसूली 1,23,902 करोड़ रही।
यह आंकड़ा देश में जीएसटी लागू होने के बाद से अब तक का सबसे अधिक है। वहीं महामारी के बाद लगातार चौथी बार यह 1.1 लाख करोड़ रुपये से अधिक रहा, जो अर्थव्यवस्था में सुधार का संकेत है।
GST collection has improved due to economic recovery and improvement in technology, which has led to increased tax revenue & better compliance. Tax revenue of over Rs 1 lakh crores in the last 6 months, it's better than what we expected: Tarun Bajaj, Secretary (Economic Affairs) pic.twitter.com/ja63e0wsX2
— ANI (@ANI) April 2, 2021
मालूम हो कि मंत्रालय के मुताबिक, मार्च 2021 में 1.23 लाख करोड़ रुपये के सकल जीएसटी संग्रह में केंद्रीय जीएसटी (सीजीएसटी) का हिस्सा 22,973 करोड़ रुपये, राज्य जीएसटी (एसजीएसटी) का हिस्सा 29,329 करोड़ रुपये और एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) का हिस्सा 62,842 करोड़ रुपये रहा। वहीं, उपकर का हिस्सा 8,757 करोड़ रुपये रहा। इसमें से 935 करोड़ रुपये वस्तुओं के आयात पर लगे कर से जुटाए गए हैं। इससे पिछले महीने फरवरी में जीएसटी वसूली 1,13,143 करोड़ रही थी।
राज्यों को जारी किए 45,000 करोड़ रुपये
वित्त मंत्रालय ने राज्यों को केंद्रीय करों में हिस्सेदारी के तहत वित्त वर्ष 2020-21 में अतिरिक्त अंतरण के रूप में 45,000 करोड़ रुपये जारी किए हैं। मार्च तिमाही में राजस्व में वृद्धि को देखते हुए यह राशि जारी की गई है। वित्त वर्ष 2020-21 के संशोधित अनुमान के मुताबिक वर्ष के दौरान साझा करों और शुल्कों के रूप में 41 फीसदी यानी 5,49,959 करोड़ रुपये राज्यों को जारी किया जाना है।
15वें वित्त आयोग की सिफारिश के मुताबिक वर्ष 2020-21 के दौरान केंद्र के विभाज्य योग्य करों का 41 फीसदी हिस्सा राज्यों को दिया जाना था। मंत्रालय ने कहा कि 45,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि को दो किस्तों में- 14,500 करोड़ और दूसरी 30,500 करोड़ में जारी किया गया।
मंत्रालय ने 26 मार्च 2021 को अंतरण की 14वीं नियमित किस्त के साथ 14,500 करोड़ रुपये जारी किए गए, जबकि 30,500 करोड़ की दूसरी किस्त 31 मार्च 2021 को राज्यों को जारी की गई। इसके अलावा वित्त मंत्रालय के अधीन आने वाला व्यय विभाग ने पूंजी व्यय योजना के लिए राज्यों को विशेष सहायता के तहत 11,830 करोड़ रुपये जारी किए।