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Gold Prices: सोने की कीमतों में तेजी से पुराने आभूषण रिसाइकल करने का बढ़ा चलन; जानकारों की क्या राय, जानें

Thu, 03 Jul 2025 06:34 PM IST
नविता स्वरूप बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, मुंबई Published by: नविता स्वरूप Updated Thu, 03 Jul 2025 06:34 PM IST
सार

सोने की कीमतों में तेजी की वजह से आम उपभाक्ता वर्ग नया सोना खरीदने में सक्षम नहीं हैं। वे पुराने सोने के आभूषणों या फिर सिक्कों को रिसाइकलिंग कर नया आभूषण लेना या फिर कैश लेना पसंद कर रहे हैं।
 

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Due to the rise in gold prices, the trend of recycling old jewellery has increased
सोना-चांदी की खरीदारी करते लोग। - फोटो : संवाद

विस्तार

सोने की कीमतों में पिछले कुछ वर्षों में जोरदार तेजी देखने को मिली है, जो वर्तमान में भी जारी है। सोने-चांदी में आई इस तेजी की वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ रहा तनाव और आर्थिक अनिश्चितता रही है। उपभोक्ताओं ने सोने और चांदी में आई तेजी का फायदा कुछ दूसरी तरह से उठाया है। 

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पुराने आभूषणों को बदलने या फिर उसे रिसाइकल करने का बढ़ता चलन

होलसेल गोल्ड ज्वेलरी एसोसिएशन के महेश बाफना बताते हैं कि सोने की कीमतों में तेजी की वजह से आम उपभाक्ता वर्ग नया सोना खरीदने में सक्षम नहीं हैं। वे पुराने सोने के आभूषणों या फिर सिक्कों को रिसाइकलिंग कर नया आभूषण लेना या फिर कैश लेना पसंद कर रहे हैं। यह चलन पिछले कुछ समय से देखा जा रहा है। जिसमें 20 प्रतिशत तक उपभोक्ता पुराने आभूषणों के बदलकर नए आभूषण खरीद रहे हैं। इसके अलावा, सोने के सिक्कों और बार को भी रिसाइकल कर आभूषण खरीदे जा रहे हैं। यह खरीदारी विशेषर उपभोक्ता भविष्य में अपने बच्चों की शादी ब्याह को देखते हुए कर रहे हैं, क्योंकि भविष्य में सोने की कीमतें और अधिक बढ़ने की संभावना है।

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घरेलू बाजार में 11 प्रतिशत सोने की रिसाइक्लिंग होती है

कारोबारियों का कहना है कि भारत में केवल 11 प्रतिशत घरेलू सोने की रिसाइक्लिंग होती है। बाकी सोना आयात के जरिए बाहर से आता है। वर्ल्ड गोल्ड काउंसिल की रिपोर्ट के अनुसार साल 2024 में भारत में सोने की रिसाइक्लिंग 114.3 टन रही, जो 2023 में 117.1 टन से 2 प्रतिशत कम है।  

सोने की रिसाइक्लिंग कीमत में उतार-चढ़ाव से जुड़ी है

झवेरी बाजार के अंबिका ज्वेलर्स के पराग जैन बताते हैं कि भारत में सोने की रिसाइक्लिंग सोने की कीमत में उतार-चढ़ाव से जुड़ा होता है। हम लगभग 40 प्रतिशत रीसाइकिल किए गए सोने का इस्तेमाल करते हैं। वर्तमान में सोने की कीमतें ऊंची बनी हुई हैं, जिसकी वजह से ग्राहक रिसाइकल करने के लिए आ रहे हैं। वहीं पुराने आभूषणों को बदलकर नई डिजाइन और एक आभूषण से  दो हल्के आभूषण बनाने का विकल्प भी उनके पास होता है। देश में कई बड़े रिटेल ज्वेलरी ब्रांड आभूषण बनाने में रिसाइकल सोने का इस्तेमाल करते हैं। जिसमें मिया बाए तनिष्क, जॉय अलुकॉस सहित गोल्ड मालाबार डायमंड जैसी कंपनियां पर्यावरण को देखते हुए भी रिसाइकल गोल्ड का उपयोग करती हैं।

भारत में गोल्ड रिसाइकल में चुनौतियां

मुथूट एक्जिम प्राइवेट लिमिटेड के सीईओ केयूर शाह बताते हैं कि सोने की रिसाइकल कारोबार में कई चुनौतियां है। यह कारोबार अभी देश में संगठित नहीं हुआ है, जिसकी वजह से उपभोक्ता अपने सोने के आभूषण जब रिसाइकल करते हैं, तो उसका उन्हें सही दाम नहीं मिल पाता। इसका कारण है कि रिसाइकल करने वाले असंगठित क्षेत्र में सोने की शुद्धता की सही जांच नहीं करते हैं। ऐसे में उपभोक्ता को नुकसान होता है। इसलिए जरूरी है कि सोने की रिसाइकल करने के समय उसकी शुद्धता की जांच सही प्रकार से हो। इसी को लेकर मुथूट ने गोल्ड पॉइंट शुरू किए हैं, जहां उपभोक्ताओं के लिए पारदर्शी तरीके से अपना सोना बेचने के लिए मंच तैयार किया गया है। यहां एक्आरएफ मशीनों के माध्यम से वैज्ञानिक तरीके से जांच कर गोल्ड लिया जाता है और उपभोक्ता को उसकी सही कीमत अदा की जाती है। यह महानगरों और टियर 2 व 3 शहरों में मौजूद हैं। उन्होंने बताया कि सरकार पिछले कुछ वर्षों से सोने के आयात को कम करने के लिए काम कर रही है, जिसमें पुराने सोने का रिसाइकल करना मुख्य है। क्योंकि देश की लगभग 99 प्रतिशत मांग आयात के माध्यम से पूरी की जाती है। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने निजी लोगों और मंदिरों के पास में 30,000 टन से अधिक सोने का अनुमान लगाया था। अगर इसका एक प्रतिशत भी रिसाइकल किया जाता है, तो इससे आयात में 30-40 प्रतिशत की कमी आएगी।



 

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