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Crypto Exchange: क्रिप्टो एक्सचेंज की तबाही से भारत में भी भय का माहौल, देश में क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं

Tue, 15 Nov 2022 06:35 AM IST
देव कश्यप एजेंसी/ब्यूरो, न्यूयॉर्क/नई दिल्ली।
एजेंसी/ब्यूरो, न्यूयॉर्क/नई दिल्ली। Published by: देव कश्यप Updated Tue, 15 Nov 2022 06:35 AM IST
सार

दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के अरबों डॉलर डूब गए। हालांकि, सरकार और आरबीआई के सतर्क रुख से भारतीय निवेशकों पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। आरबीआई क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से बार-बार इनकार करता रहा है। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर चेतावनी भी दी है।

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Due to the devastation of crypto exchange there is an atmosphere of fear in India
क्रिप्टोकरेंसी (सांकेतिक तस्वीर)। - फोटो : iStock

विस्तार

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज एफटीएक्स के प्रमुख सैम बैंकमैन-फ्राइड दो दिन पहले तक टेक की दुनिया के सुपरस्टार थे। उन्हें क्रिप्टो का रक्षक, डेमोक्रेटिक राजनीति में नवीनतम शक्ति और संभावित रूप से दुनिया के पहले खरबपति जैसे विशेषणों से नवाजा जाता था, लेकिन आज वह क्रिप्टो जगत के सबसे बड़े खलनायक हैं। 30 वर्षीय बैंकमैन-फ्राइड द्वारा चलाया जा रहा क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज शुक्रवार को दिवालिया हो गया और निवेशकों और ग्राहकों ने खुद को ठगा महसूस किया। अगर आप भी क्रिप्टो में निवेश के बारे में सोच रहे हैं तो अच्छी तरह से जान लें कि आप एक ऐसी अंधी गली में प्रवेश कर रहे हैं, जिसमें कब क्या हो जाए किसी को नहीं मालूम।

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भारतीयों के लिए क्या हैं मायने
गुरुग्राम के इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियर ब्रजेश शर्मा ने पांच साल पहले क्रिप्टोकरेंसी में दो लाख रुपये का निवेश किया था। पिछले साल तक वह निवेश से काफी उत्साहित थे, लेकिन अब डर सताने लगा है। ऐसा ही कुछ बंगलूरू में सॉफ्टवेयर इंजीनियर रितेश कुमार का सोचना है। उनका कहना है कि भारत में क्रिप्टोकरेंसी को न तो मान्यता है और न ही क्रिप्टो एक्सचेंज चलाने वाली कंपनियां अपने बारे में कुछ खुलकर बताती हैं। ऐसे में अगर पैसा डूबा तो हम कोई दरवाजा भी नहीं खटखटा सकते। हैं।

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  • सितंबर में भारतीय क्रिप्टो मार्केट लूना और टेरा में करोड़ों डॉलर की क्रिप्टोकरेंसी गंवा चुके हैं।
  • सरकार ने क्रिप्टो के विनिमय पर टैक्स शुरू किया, तो मार्केट में स्थिरता लौटने की उम्मीद थी लेकिन एफटीएक्स मामले से संभावनाओं पर पानी फिर गया।
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  • भारत सरकार क्रिप्टो विनिमय पर टैक्स तो लेती है, लेकिन क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता नहीं दी है। जानकार कहते हैं कि क्रिप्टोकरेंसी जोखिमभरा जुआ है।


हालात और बुरे होने की आशंका

  • जानकारों के अनुसार, पहले  से मंदे बाजार को अब इस नई अनिश्चितता से निपटना होगा।
  • एफटीएक्स के ढहने के बाद मार्केट में नकदी का संकट पैदा हो सकता है, जिसका खामियाजा दूसरी क्रिप्टोकरेंसी को भुगतना पड़ेगा। 
  • भारत के सबसे बड़े क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज वजीरएक्स के उपाध्यक्ष राजगोपाल मेनन को डर है कि सबसे बुरा अभी खत्म नहीं हुआ है और कुछ भी हो सकता है। उन्होंने कहा कि पहले से मंदे बाजार को इस नई अनिश्चितता से निपटना होगा।


सरकार और आरबीआई की सर्तकता से बचे निवेशक
दुनियाभर में क्रिप्टोकरेंसी बाजार में भारी गिरावट से निवेशकों के अरबों डॉलर डूब गए। हालांकि, सरकार और आरबीआई के सतर्क रुख से भारतीय निवेशकों पर इसका कोई असर नहीं हुआ है। आरबीआई क्रिप्टोकरेंसी को मान्यता देने से बार-बार इनकार करता रहा है। साथ ही क्रिप्टोकरेंसी लेनदेन पर चेतावनी भी दी है। इसके अलावा, सरकार ने क्रिप्टोकरेंसी पर 30 फीसदी का भारी-भरकम टैक्स और लेनदेन पर एक फीसदी का अतिरिक्त टीडीएस भी लगाया है।  आंकड़ों के मुताबिक, वैश्विक क्रिप्टोकरेंसी बाजार का पूंजीकरण 2021 में 3 लाख करोड़ डॉलर (234.7 लाख करोड़ रुपये) था। एक साल में ही इसका कुल बाजार मूल्य 2 लाख करोड़ डॉलर (165 लाख करोड़ रुपये) घटकर अब एक लाख करोड़ डॉलर (81.23 लाख करोड़ रुपये) रह गया है।

16 अरब डॉलर स्वाहा
एफटीएक्स के पतन से इसके सह-संस्थापक सैम बैंकमैन फ्राइड के 16 अरब डॉलर (करीब 1.3 लाख करोड़ रुपये) स्वाहा हो गए। 

भारत में सिर्फ 3 फीसदी निवेश

  • उद्योग का अनुमान है कि क्रिप्टो की संपत्तियों में भारतीय निवेशकों का निवेश केवल 3 फीसदी है। 
  • वहीं, ग्लोबल क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज कूकॉइन की सर्वे रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 11.5 करोड़ से ज्यादा क्रिप्टो निवेशक हैं।
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