Report: भारत में ऑफिस स्पेस की मांग बढ़ी, जीसीसी की हिस्सेदारी 40% तक पहुंचने की उम्मीद
सीबाआरई की रिपोर्ट के अनुसार देश में 2025 के दौरान ऑफिस स्पेस में मजबूत मांग देखने को मिलेगी। प्रौद्योगिकी क्षेत्र जीसीसी स्पेस की मांग का प्राथमिक क्षेत्र बना हुआ है। इसके अलावा, जीसीसी का विस्तार अब टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी हो रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
भारत में 2025 के दौरान कार्यालय स्थलों की मजबूत मांग देखने को मिलेगी। इससे वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी) की हिस्सेदारी का 35 से 40 प्रतिशत रहने की संभावना है। सीबाआरई की हालिया रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
ये भी पढ़ें: NFO: देशभर में न्यू फंड ऑफर में निवेश के लिए मची हलचल, जानें निवेश का सही समय और जरूरी बातों का रखे ध्यान
जीसीसी क्या है?
जीसीसी (Global Capability Centre) एक रणनीतिक इकाई है, जिसे बहुराष्ट्रीय कंपनियां स्थापित करती हैं। यह केंद्र भारत जैसे देशों में दक्षता, कुशल प्रतिभा और तकनीकी बुनियादी ढांचे का लाभ उठाते हुए, वैश्विक स्तर पर काम करते हैं। वैश्विक क्षमता केंद्र परिचालन उत्कृष्टता और रणनीतिक विकास को आगे बढ़ाने में सहायक होते हैं।
कंपनियों को मिल रहा विशाल प्रतिभा और लागत संबंधी लाभ
रिपोर्ट के अनुसार भारत जीसीसी के लिए वैश्विक केंद्र के रूप में अपनी भूमिका को लगातार मजबूत कर रहा है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां भारत की विशाल प्रतिभा और लागत संबंधी लाभों को देखते हुए यहां पर आत्याधुनिक और बहु-कार्यात्मक केंद्र स्थापित कर रही हैं। इस केंद्रों का विस्तार अब केवल संख्या में नहीं बल्कि कार्यक्षमता में भी हो रहा है।
कार्यलय स्थान में 35 से 20 प्रतिशत खपत होने की उम्मीद
सीबीआरई का मानना है कि वर्ष 2025 में जीसीसी द्वारा कुल कार्यालय स्थान की लगभग 35 से 40 प्रतिशत खपत होने की संभावना है। इसमें मौजूदा परिचालन का एकीकरण और नए खिलाड़ियों के प्रवेश से सहायता मिलेगी। इसमें कहा गया कि 2025 की पहली छमाही में भारत में कार्यालय स्थल की मांग स्थिर रही। यह मांग मुख्य रूप से जीसीसी, घरेलू कॉरपोरेट्स, फ्लेक्सिबल स्पेस ऑपरेटर्स, बैंकिंग और वित्तीय सेवाओं (बीएफएसआई) और प्रौद्योगिकी आधारित कंपनियों से प्रेरित रही।
लीजिंग में आई 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी
आंकड़ों के अनुसार भारत के कार्यालय क्षेत्र ने 2025 की पहली छमाही में अब तक की सबसे अधिक लीजिंग और सप्लाई दर्ज की है। इसमें लीजिंग 39 मिलियन वर्ग फुट तक पहुंच गई है। यह पिछले साल की तुलना में 3 प्रतिशत अधिक है। रिपोर्ट में कहा गया कि जहां स्थापित कंपनियां प्रमुख भारतीय शहरों में बड़े परिसर बना रही है। वहीं नई कंपनियां फ्लेक्सिबल स्पेस को प्राथमिकता दे रही हैं। यह रणनीति कंपनियों को बदलती व्यवसायिक जरूरतों के अनुसार कार्यों को कुशलतापूर्वक बढ़ाने में मदद कर रही है।
प्रौद्योगिकी क्षेत्र सबसे आगे
प्रौद्योगिकी क्षेत्र जीसीसी स्पेस की मांग का प्राथमिक क्षेत्र बना हुआ है क्योंकि कंपनियां नवाचार और उन्नत समाधानों पर ध्यान केंद्रीत करना जारी रखती हैं। मांग को बढ़ाने वाले अन्य क्षेत्रों में बीएफएसआई, इंजीनियरिंग और विनिर्माण (ईएंडएम), सेमीकंडक्टर, एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव और लाइफ साइंसेज शामिल हैं।
अमेरिकी कंपनियों का दबदबा कायम
सीबीआई के अनुसार भारत के जीसीसी परिदृश्य में अमेरिकी कंपनियों का दबदबा कायम है। हालांकि, मौजूदा परिचालन की सफलता यूरोप और एशिया में स्थित कंपनियों की रुचि को भी बढ़ा रही है। इसमें कहा गया कि लक्षित नीतियों के माध्यम से उभरते बाजारों में लीजिंग गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलेगा।
छोटे शहरों की हिस्सेदारी बढ़ी
इसके अलावा, जीसीसी का विस्तार अब टियर-2 और टियर-3 शहरों की ओर भी हो रहा है। इसे रिवर्स माइग्रेशन रुझानों से बल मिल रहा है। वित्त वर्ष 2024 में इन छोटे शहरों की कुल जीसीसी स्पेस में 7 प्रतिशत हिस्सेदारी थी। यह 2025 में बढ़कर 15 से 20 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। 2025 की दूसरी छमाही में भी गुणवत्तापूर्ण कार्यालय स्थानों की मांग मजबूत रहने की उम्मीद है क्योंकि अधिक कंपनियों अपने परिचालन को समेकित और विस्तारित करना चाहित हैं।