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RBI: 'ग्राहकों की शिकायतें तेजी से बढ़ रहीं, आरबीआई के डिप्टी गवर्नर बोले- बैंकर्स में सहानुभूति की कमी
Tue, 22 Jul 2025 05:41 PM IST
कुमार विवेक
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: कुमार विवेक
Updated Tue, 22 Jul 2025 05:41 PM IST
सार
एनआईबीएम (राष्ट्रीय बैंक प्रबंधन संस्थान) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा है बैंकों में 'ऑटोमेशन बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदारी घट रही है', और ग्राहकों को 'अंतहीन' टेम्पलेट ईमेल और हेल्पलाइन लूप से जूझना पड़ रहा है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यदि बैंकर्स को बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना है तो इन मुद्दों का समाधान करना जरूरी है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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भारतीय रिजर्व बैंक
- फोटो : ANI
विस्तार
रिजर्व बैंक के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने देश के बैंकर्स में सहानुभूति की कमी पर अफसोस जताया है। उन्होंने यह भी कहा कि जहां धोखाधड़ी जैसे गंभीर पहलुओं को लेकर ग्राहकों की शिकायतों की संख्या बढ़ रही है, ऐसे हालात में बैकर्स में सहानुभूति की कमी सही नहीं है।
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12 जुलाई को आरबीआई की ओर से प्रवर्तित एनआईबीएम (राष्ट्रीय बैंक प्रबंधन संस्थान) के एक कार्यक्रम में बोलते हुए स्वामीनाथन ने कहा कि "ऑटोमेशन बढ़ रहा है, लेकिन जिम्मेदारी घट रही है", और ग्राहकों को "अंतहीन" टेम्पलेट ईमेल और हेल्पलाइन लूप से जूझना पड़ रहा है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने स्पष्ट किया कि यदि बैंकर्स को बैंकिंग प्रणाली में लोगों का विश्वास बनाए रखना है तो इन मुद्दों का समाधान करना जरूरी है। रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर मंगलवार को यह भाषण प्रकाशित किया गया।
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वाणिज्यिक बैंकर से नियामक बने स्वामीनाथन ने छात्रों को अपने समापन भाषण में कहा, "ग्राहकों की शिकायतों की संख्या- खासकर डिजिटल माध्यमों से- हाल के वर्षों में काफी बढ़ गई है। सोशल इंजीनियरिंग धोखाधड़ी से लेकर खराब शिकायत निवारण तक, नुकसान और हताशा वास्तविक है। अक्सर, समस्या उत्पाद या सेवा नहीं होती, बल्कि, जैसा कि मैं देखता हूं, असली मुद्दा सहानुभूति की कमी है।"
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उन्होंने कहा कि आजकल केवाईसी (अपने ग्राहक को जानें) को अक्सर एक "आवधिक अनुष्ठान" तक सीमित कर दिया गया है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ने बैकर्स से डिजिटल दौर में भी व्यक्तिगत जागरूकता और जिम्मेदारी को वापस लाने का तरीका खोजने का आह्वान किया।
वरिष्ठ नागरिकों को एटीएम पिन से जुड़ी समस्याओं, ग्रामीण क्षेत्र के उधारकर्ताओं को ऑनलाइन ऋण चुकाने में आने वाली चुनौतियों या यूपीआई भुगतान को लेकर छोटे व्यवसाय के मालिकों की चिंताओं जैसे उदाहरणों का उल्लेख करते हुए स्वामीनाथन ने कहा कि ये केवल सेवा के अनुरोध नहीं हैं, बल्कि समय और धैर्य देकर व व्यावसायिकता दिखाकर विश्वास अर्जित करने के अवसर हैं। उन्होंने कहा, "प्रौद्योगिकी लेन-देन को संभव बनाएगी। लेकिन केवल आप ही संबंध बना सकते हैं और केवल आप ही अपने संस्थान के लिए ग्राहकों का विश्वास अर्जित कर सकते हैं।"
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यही बात एक बैंकर को एक एप से अलग करती है। महानिदेशक ने कहा कि एक बैंकर को शीघ्रता से कार्य करना होता है, अनिश्चितता को सहना होता है, असफलताओं से उबरना होता है, और लंबी अवधि तक ध्यान केन्द्रित रखना होता है।
उन्होंने बैंकिंग में दो वर्षीय स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम शुरू करने वाले छात्रों से कहा, "आपको तीव्र परिवर्तन के क्षणों का सामना करना पड़ेगा- संकट, समय-सीमा, लेखा-परीक्षण, नीतिगत बदलाव- लेकिन आपको धीमी, जटिल प्रक्रियाओं से निपटने के लिए अनुशासन और सहनशक्ति की भी आवश्यकता होगी, जो महीनों या वर्षों में सामने आती हैं।" उन्होंने कहा कि सहानुभूति, जिज्ञासा और निष्ठा ही लंबे समय में छात्रों की सफलता को परिभाषित करेंगे।
उन्होंने कहा, "एक बैंकर के रूप में आपको सही मायने में आकार देने वाली चीज है ज्ञान को निर्णय के साथ, कानून को परंपरा के साथ, तथा सिद्धांत को व्यवहार के साथ मिश्रित करने की आपकी क्षमता।" उन्होंने कहा कि चीजें योजना के अनुसार नहीं होंगी, लेकिन अपरिचित को स्वीकार करने और अप्रत्याशित परिस्थितियों को सीखने के अनुभव में बदलने की क्षमता ही आपको अलग पहचान दिलाएगी। उन्होंने बैंकर्स से सतर्क रहने और जो चल रहा है उसमें शीघ्र सुधार करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आज बैंकिंग पहले से कहीं अधिक जटिल है, साथ ही साइबर खतरे, फिशिंग, कृत्रिम पहचान, डीपफेक और तीसरे पक्ष के जोखिम जैसी नई चुनौतियां भी हैं।