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Crude Oil: रूस के बदले अमेरिका और पश्चिम एशिया से ज्यादा तेल खरीदेगा भारत, 21 नवंबर से प्रतिबंध लागू

Sat, 25 Oct 2025 06:54 AM IST
लव गौर अमर उजाला, नई दिल्ली
अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: लव गौर Updated Sat, 25 Oct 2025 06:54 AM IST
सार

अभी भारत रोज रूस से 17 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करता है और केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने की तिथि 21 नवंबर तक यही स्थिति बनी रह सकती है। मगर इसके बाद इसमें कमी आने लगेगी।

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Crude Oil: India will buy more oil from America and West Asia instead of Russia
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला प्रिंट

विस्तार

अमेरिका की ओर से रूस के दो बड़े तेल उत्पादकों रोसनेफ्ट और लुकोइल पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद भारत अब रूस के बदले पश्चिम एशिया, अमेरिका, लैटिन अमेरिका, कनाडा, ब्राजील आदि से कच्चे तेल की खरीद बढ़ा सकता है। हालांकि यहां से ढुलाई की लागत बढ़ जाएगी जिससे आयात बिल में वृद्धि होगी। अभी भारत रोज रूस से 17 लाख बैरल कच्चे तेल का आयात करता है और केंद्र सरकार के सूत्रों का कहना है अमेरिकी प्रतिबंध लागू होने की तिथि 21 नवंबर तक यही स्थिति बनी रह सकती है। मगर इसके बाद इसमें कमी आने लगेगी।
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भारत के सरकारी और निजी रिफाइनरियां अभी रोसनेफ्ट और लुकोइल से करीब 12 लाख बैरल तेल प्रतिदिन खरीदती हैं। इनमें से अधिकांश मात्रा निजी रिफाइनरियों, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और नायरा एनर्जी की है।
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प्रतिबंध लागू होने के बाद यह खरीद बंद करनी होगी क्योंकि रूस की इन कंपनियों के साथ प्रत्यक्ष या परोक्ष खरीद करने वाली कंपनियां भी अमेरिकी प्रतिबंध के दायरे में आ जाएंगी। केप्लर के प्रमुख शोध विश्लेषक (रिफाइनिंग एवं मॉडलिंग) सुमित रिटोलिया ने कहा कि 21 नवंबर तक रूसी कच्चे तेल का प्रवाह 16 से 18 लाख बैरल प्रतिदिन बना रह सकता है। लेकिन इसके बाद रोसनेफ्ट और लुकोइल से आने वाले तेल की मात्रा में प्रत्यक्ष गिरावट दिखेगी, क्योंकि भारतीय रिफाइनर अमेरिकी प्रतिबंधों के किसी भी जोखिम से बचना चाहेंगे। एजेंसी
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कंपनियों के पास कम होंगे विकल्प
सूत्रों ने बताया कि रिलायंस पेट्रोकेमिकल्स, जिसका रोसनेफ्ट के साथ 5 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदने का 25 साल का अनुबंध है, इस अनुबंध से बाहर आने वाली पहली कंपनी हो सकती है। इसी तरह यूरोपीय संघ के प्रतिबंधों के कारण अन्य जगहों से  आपूर्ति कम होने के बाद पूरी तरह रूसी तेल पर निर्भर नायरा के पास भी बहुत कम विकल्प बचेंगे। रिटोलिया ने कहा, फिर भी, रिफाइनर तीसरे पक्ष के मध्यस्थों के माध्यम से अप्रतिबंधित रूसी तेल प्राप्त करना जारी रखेंगे, हालांकि इसमें पूरी सावधानी बरती जाएगी।

रिलायंस के सामने सबसे बड़ी चुनौती
रिटोलिया ने बताया, रूसी तेल का सबसे बड़ा आयातक, रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (आरआईएल) सबसे तात्कालिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। रोसनेफ्ट के साथ अपने अनुबंधों के प्रभावित होने के कारण, आरआईएल को परिचालन निरंतरता बनाए रखते हुए ओएफएसी नियमों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए तीसरे पक्ष से तत्काल खरीद की ओर रुख करना होगा। उसे अपनी आपूर्ति और वित्तीय शृंखलाओं को फिर से तैयार करना होगा।

रिलायंस ने कहा-सरकार के हर निर्देश का पालन करेंगे
रिलायंस इंडस्ट्रीज लि. ने कहा, हमने ईयू, ब्रिटेन और अमेरिका की ओर से रूसी कच्चे तेल खरीद और तैयार उत्पाद के यूरोप में निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों को देखा है। रिलायंस अभी नए कंप्लाएंस अनिवार्यताओं समेत अन्य प्रभाव का आकलन कर रही है। हम तैयार उत्पाद के यूरोप निर्यात के बारे में ईयू के दिशा-निर्देशों का पालन करेंगे। इस बारे में जब भी भारत सरकार की तरफ से कोई निर्देश मिलेगा, हम हमेशा की तरह उसका भी पूरी तरह पालन करेंगे।

अमेरिका फिर बोला- रूसी तेल से दूरी बना रहा भारत
वाशिंगटन। अमेरिका ने फिर दावा किया कि भारत ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के अनुरोध पर रूस से अपनी तेल खरीद कम करनी शुरू कर दी है। व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा, अगर आप रूस पर लगे प्रतिबंधों को देखें और पढ़ें, तो वे काफी कड़े हैं।  मैंने कुछ अंतरराष्ट्रीय खबरें देखीं, जिनसे पता चलता है कि चीन रूस से तेल खरीद कम कर रहा है। हम जानते हैं कि भारत ने भी राष्ट्रपति ट्रंप के अनुरोध पर ऐसा ही किया है।


लेविट ने कहा, वाशिंगटन ने अपने यूरोपीय सहयोगियों से भी रूसी तेल आयात में कटौती करने का आग्रह किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति और उनका प्रशासन यह दावा कर रहे हैं कि भारत ने रूस से तेल खरीद में कमी लाने का आश्वासन दिया है जबकि भारत यह कहता रहा है कि उसकी ऊर्जा नीति उसके अपने राष्ट्रीय हितों, विशेष रूप से अपने उपभोक्ताओं के लिए सस्ती और सुरक्षित आपूर्ति सुनिश्चित करने से तय होती है। 
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