{"_id":"627c4ab94953344b631f7c23","slug":"crude-oil-crosses-105-dollar-due-to-eu-sanctions-on-russia","type":"story","status":"publish","title_hn":"रूस-यूक्रेन संकट: रूस पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध से कच्चा तेल 105 डॉलर के पार","category":{"title":"Business Diary","title_hn":"बिज़नेस डायरी","slug":"business-diary"}}
रूस-यूक्रेन संकट: रूस पर यूरोपीय संघ के प्रतिबंध से कच्चा तेल 105 डॉलर के पार
Thu, 12 May 2022 05:16 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, लंदन।
एजेंसी, लंदन।
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 12 May 2022 05:16 AM IST
सार
यूरोपीय संघ के प्रतिबंध पर समर्थन और आपूर्ति संबंधी चिंता बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 2.99 फीसदी बढ़कर 105.45 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों का कहना है कि यूरोपीय संघ के रूसी तेल पर प्रतिंबध लगाने के प्रस्ताव से आने वाले समय में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
विज्ञापन
कच्चा तेल (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : pixabay
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
रूस से तेल खरीद पर प्रतिबंध लगाने के यूरोपीय संघ के समर्थन से वैश्विक बाजार में कच्चा तेल बुधवार को 105 डॉलर के पार पहुंच गया। इससे पहले पिछले दो सत्रों में कच्चे तेल की कीमतों में 10 फीसदी की गिरावट देखने को मिली थी।
विज्ञापन
इसके बाद यूरोपीय संघ के प्रतिबंध पर समर्थन और आपूर्ति संबंधी चिंता बढ़ने से ब्रेंट क्रूड 2.99 फीसदी बढ़कर 105.45 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच गया। जानकारों का कहना है कि यूरोपीय संघ के रूसी तेल पर प्रतिंबध लगाने के प्रस्ताव से आने वाले समय में तेल की कीमतें और बढ़ सकती हैं।
विज्ञापन
एक ब्रोकरेज हाउस ने कहा, चीन की अर्थव्यवस्था में राहत की उम्मीदों के कारण भी तेल की कीमतों में तेजी बनी रही। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण कच्चे तेल की कीमत इस साल बढ़कर 139 डॉलर पर पहुंच गई थी।
विज्ञापन
मोर्गन स्टेनली ने भारत की वृद्धि दर घटाई
मोर्गन स्टेनली ने भारत की जीडीपी की वृद्धि दर घटा दी है। इसने कहा है कि चालू वित्तवर्ष में देश की विकास दर 7.6 फीसदी रह सकती है। अगले साल में इसके एक फीसदी घटकर 6.7 फीसदी रहने का अनुमान है। उसके पहले के अनुमान की तुलना में यह 0.30 फीसदी कम है। इसने कहा है कि रूस-यूक्रेन के बीच संघर्ष और साथ ही भारत में महंगाई की वजह से विकास दर पर असर दिख सकता है। भारत दुनिया में तेलों के आयात में तीसरा सबसे बड़ा बाजार है।