CPCB Notice: भारत पेट्रोलियम को सीपीसीबी का नोटिस, वाष्प रिकवरी प्रणाली स्थापित करने में विफल रहने का मामला
CPCB Notice: सीपीसीबी की ओर से भारत पेट्रोलियम को चार सितंबर को जारी नोटिस में कहा गया है कि यदि कंपनी 19 सितंबर तक संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती है तो उस पर एक करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया जा सकता है।
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केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) को नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई बीपीसीएल की ओर से 28 भंडारण टर्मिनलों पर कैंसरकारी बेंजीन और अन्य वाष्पशील यौगिकों के उत्सर्जन की रोकथाम के लिए वाष्प रिकवरी सिस्टम स्थापित करने में विफल रहने के कारण की गई है। इस मामले में बीपीसीएल की ओर से फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की गई है। 4 सितंबर को जारी नोटिस में कहा गया है कि यदि बीपीसीएल 19 सितंबर तक संतोषजनक जवाब देने में विफल रहती है तो उस पर एक करोड़ रुपये का मुआवजा लगाया जा सकता है।
18 सितंबर, 2020 को सीपीसीबी ने बीपीसीएल को दस लाख से अधिक निवासियों वाले शहरों में 100 किलोलीटर प्रति मिनट (केएलपीएम) से अधिक ईंधन बेचने वाले पेट्रोल पंपों पर और एक लाख से 10 लाख की आबादी वाले शहरों में 300 केएलपीएम से अधिक ईंधन बेचने वाले पंपों के साथ-साथ भंडारण टर्मिनलों पर वाष्प रिकवरी सिस्टम स्थापित करने का निर्देश दिया था।
दिसंबर 2021 में, राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सीपीसीबी को वाष्प रिकवरी सिस्टम (वीआरएस) स्थापित करने में विफल रहने वाले पेट्रोलियम आउटलेट और डिपो के खिलाफ उचित कार्रवाई करने का निर्देश दिया। इसके बाद बीपीसीएल ने सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और इस पर स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया। हालांकि, पिछले साल मार्च में सर्वोच्च न्यायालय ने सीपीसीबी को एनजीटी के आदेशों का पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।
नोटिस में कहा गया है, "मेसर्स भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड द्वारा 10 मई, 2024 और 27 जून, 2024 की तारीखों वाले ईमेल के माध्यम से प्रस्तुत स्थिति से पता चलता है कि सीपीसीबी की ओर से निर्धारित समयसीमा का उल्लंघन करते हुए 28 भंडारण टर्मिनलों पर वीआरएस चरण 1ए की स्थापना में देरी हुई है।"
नोटिस में बीपीसीएल को यह बताने का निर्देश दिया गया है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर वीआरएस स्थापित नहीं करने के लिए उस पर एक करोड़ रुपये का पर्यावरण मुआवजा क्यों न लगाया जाए। बीपीसीएल को इस नोटिस की प्राप्ति के 15 दिनों के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया जाता है, ऐसा न करने पर कानून के अनुसार आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"
सीपीसीबी ने कहा कि कई कस्बे और शहर, जहां राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता निगरानी कार्यक्रम के तहत वायु गुणवत्ता की निगरानी की जाती है, राष्ट्रीय परिवेशी वायु गुणवत्ता मानकों को पूरा नहीं करते हैं। विशेष रूप से कण प्रदूषण के मामले और नाइट्रोजन ऑक्साइड, बेंजीन व ओजोन चिंता का विषय बन गए हैं।
नोटिस में बताया गया है कि पेट्रोल ईंधन भरने वाले स्टेशन बेंजीन उत्सर्जन का एक महत्वपूर्ण स्रोत हैं, यह एक कैंसरकारी यौगिक है। इससे आस-पास के निवासियों और श्रमिकों को जोखिम रहता है। भंडारण टर्मिनलों पर लोडिंग कार्यों के दौरान और पेट्रोल स्टेशनों पर ईंधन भरने व उतारने के कार्यों के दौरान उत्सर्जित होने वाले बेंजीन और अन्य वाष्पशील कार्बनिक यौगिकों (विशेष रूप से बेंजीन और ओजोन के संबंध में) को नियंत्रित करना वायु गुणवत्ता में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।