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कॉरपोरेट टैक्स: 136 देशों के बीच न्यूनतम 15 फीसदी पर बनी सहमति, भारत को फायदा
Sun, 10 Oct 2021 01:50 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, नई दिल्ली
एजेंसी, नई दिल्ली
Published by: देव कश्यप
Updated Sun, 10 Oct 2021 01:50 AM IST
सार
डेलॉइट इंडिया पार्टनर सुमित सिंघानिया ने शनिवार को कहा कि इससे डिजिटलाइजेशन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि आयरलैंड और हंगरी के सहमत होने के बाद जी20 और सभी ओईसीडी देशों समेत 136 देशों में इस समझौते पर राजनीतिक सहमति बन गई है। 2023 तक इस समझौते के अमल में आने पर सालाना 125 अरब कर लाभ का पुनर्वितरण होगा और बहुराष्ट्रीय कंपनियां न्यूनतम 15 प्रतिशत कर चुकाएंगी।
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टैक्स (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : iStock
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विस्तार
भारत समेत दुनिया के 136 देशों के बीच कॉरपोरेट टैक्स की दर न्यूनतम 15 प्रतिशत रखने पर सहमति बन गई है। डेलॉइट इंडिया पार्टनर सुमित सिंघानिया ने शनिवार को कहा कि इससे डिजिटलाइजेशन की चुनौतियों से निपटने में मदद मिलेगी। माना जा रहा है कि इस सहमति का लाभ भारत को मिल सकता है। इस सहमति से दुनिया के कर चोरी के लिए सुरक्षित देशों के पर कतरने में भी मदद मिलेगी।
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सिंघानिया ने कहा कि आयरलैंड और हंगरी के सहमत होने के बाद जी20 और सभी ओईसीडी देशों समेत 136 देशों में इस समझौते पर राजनीतिक सहमति बन गई है। उन्होंने कहा कि 2023 तक इस समझौते के अमल में आने पर सालाना 125 अरब कर लाभ का पुनर्वितरण होगा और बहुराष्ट्रीय कंपनियां न्यूनतम 15 प्रतिशत कर चुकाएंगी।
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एक बयान जारी कर सिंघानिया ने कहा कि डिजिटलीकरण की अंतरराष्ट्रीय टैक्स चुनौतियों से निपटने की दिशा में विश्व समुदाय का ओईसीडी इन्क्लुसिव फ्रेमवर्क के दो स्तंभों वाले समाधान की दिशा बड़ा कदम है। उन्होंने कहा कि नए बनाए गए ‘साठगांठ और लाभ आवंटन नियम’(स्तंभ 1) और ‘वैश्विक न्यूनतम कर नियम’ (स्तंभ 2) से ये सुनिश्चित होगा कि बड़ी बहुराष्ट्रीय कंपनियां कर का एक अच्छा-खासा हिस्सा भारत में चुकाएंगी।
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सामान्य शब्दों में कहें तो स्तंभ एक के तहत विभिन्न देशों के बीच लाभ के अतिरिक्त हिस्से के बंटवारे और स्तंभ दो के तहत टैक्स नियम और न्यूनतम टैक्स की बात दर्ज है। समझौते को 2023 तक अमल में आना है लेकिन स्तंभ दो को लागू करने की समय सीमा 2024 तक बढ़ा दी गई है।
शुक्रवार को आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) ने इस समझौते की घोषणा करते हुए कहा था हर देश के कानून निर्माताओं को इस समझौते की पुष्टि करनी होगी तभी ये अमल में आएगा लेकिन 136 देशों का इस समझौते पर पहुंचना अपने आप में बहुत बड़ी उपलब्धि है।
भारत को होगा लाभ
डेलॉइट इंडिया पार्टनर ने कहा कि इस बदलाव से भारत को भी अपने यहां की विशाल कंपनियों के कर दायरे को दूसरे देशों के साथ साझा करना पड़ेगा। हालांकि, वैश्विक बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विशाल बाजार होने के कारण अंतत: भारत को इस टैक्स सुधार समझौते से लाभ ही होगा। ये टैक्स सुधार समझौता सौ साल पुराने अंतरराष्ट्रीय टैक्स नियमों की जगह लेगा।
समाप्त करने होंगे पहले से लग रहे टैक्स
हालांकि इस समझौते के अमल में आने पर सभी देशों को अपने यहां लगने वाले सभी तरह के डिजिटल सर्विस टैक्स और ऐसे अन्य टैक्स ढांचे को समाप्त करना होगा। भारत को भी इसके तहत डिजिटल सर्विस टैक्स या इक्विलाइजेशन लेवी जैसे करों को समाप्त करने की प्रतिबद्धता जतानी होगी। समझौते में प्रावधान है कि किसी भी कंपनी पर आठ अक्तूबर के बाद से लेकर 31 दिसंबर, 2023 तक ऐसा कोई नया कर नहीं लगाया जाएगा।