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FD: ज्यादा ब्याज के लिए कॉरपोरेट एफडी बेहतर, निवेश से पहले कर लें उसकी पूरी तरह से पड़ताल
Mon, 04 Sep 2023 05:53 AM IST
Jeet Kumar
अजीत सिंह, नई दिल्ली।
अजीत सिंह, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Mon, 04 Sep 2023 05:53 AM IST
सार
आरबीआई की ओर से लगातार तीन बार रेपो दर को यथावत रखने के बाद अब स्मॉल फाइनेंस बैंकों को छोड़कर सभी बैंक एफडी पर ब्याज घटाने लगे हैं। हालांकि, कॉरपोरेट एफडी पर अब भी आठ फीसदी से ज्यादा ब्याज मिल रहा है। कॉरपोरेट एफडी के जोखिम-रिटर्न का गणित बताती अजीत सिंह की रिपोर्ट-
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आरबीआई
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आकर्षक ब्याज दर के साथ जोखिम भी
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हाल के समय में ऐतिहासिक स्तर पर पहुंची फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) की ब्याज दरें अब नीचे की ओर जाने लगी हैं। अब ज्यादातर बैंक 8 फीसदी से कम ब्याज दे रहे हैं। ब्याज दर में हालिया कटौती में जो बैंक शामिल हुए हैं, उनमें डीसीबी बैंक, एक्सिस बैंक, बैंक ऑफ इंडिया, पीएनबी और इंडसइंड सहित अन्य बैंक शामिल हैं। ऐसे में अब एफडी के निवेशक दूसरे विकल्प तलाशने लगे हैं। बैंकों के विकल्प के रूप में इस समय कॉरपोरेट एफडी पर आठ फीसदी से ज्यादा ब्याज दरें मिल रही हैं। हालांकि, बैंकों की तुलना में कॉरपोरेट एफडी में जोखिम भी थोड़ा ज्यादा होता है। ऐसे में किसी कॉरपोरेट एफडी में निवेश से पहले उसकी अच्छी तरह से पड़ताल कर लेनी चाहिए।
सुरक्षा यानी बीमा की कोई गारंटी नहीं
बैंकों की एफडी पर आपको 5 लाख रुपये तक की बीमा गारंटी मिलती है। लेकिन, कॉरपोरेट एफडी में कोई गारंटी नहीं होती है। सबसे बड़ा जोखिम क्रेडिट रिस्क का होता है। इसलिए, कॉरपोरेट एफडी के जोखिम को जांचने के लिए उनकी रेटिंग अवश्य देखें। इसमें क्रिसिल, केयर और इक्रा जैसी कंपनियां रेटिंग देती हैं।
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-ऐसी कंपनियों के डिपॉजिट में निवेश के लिए उनकी रेटिंग एएए या कम-से-कम एए प्लस होनी चाहिए। हालांकि, कुछ मामलों में एएए की रेटिंग भी सुरक्षा की गारंटी नहीं होती है।
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निकासी के लिए कड़क नियम
कॉरपोरेट एफडी से निकासी के लिए बैंकों से ज्यादा कड़क नीतियां होती हैं। समय से पहले निकासी करते हैं तो बैंकों की तुलना में ज्यादा जुर्माना लगता है। कुछ मामलों में तो कंपनियां समय पर मूलधन चुकाने में भी विफल हो जाती हैं।
असुरिक्षत मानी जाती है कंपनियों की एफडी : कॉरपोरेट एफडी मूल रूप से निवेश के असुरक्षित साधन माने जाते हैं। इस तरह के एफडी मूलरूप से मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (एनबीएफसी) पेश करती हैं। बैंक की तुलना में यह 0.75 फीसदी से लेकर 1.5 फीसदी तक ज्यादा ब्याज देती हैं। ये कंपनियां मासिक, तिमाही, छमाही और सालाना आधार पर ब्याज देती हैं। बैंक और एनबीएफसी को आरबीआई रेगुलेट करता है, लेकिन कॉरपोरेट एफडी पर उसके नियम लागू नहीं होते हैं। यह कंपनी कानून के तहत रेगुलेट होता है।
नुकसान...किसी तरह का कर लाभ भी नहीं
कंपनियों के एफडी में किसी भी तरह का कर लाभ नहीं मिलता है। अगर आप ब्याज कमा रहे हैं और यह एक वित्त वर्ष में 5,000 रुपये से ज्यादा है तो कंपनी 10 फीसदी के हिसाब से टैक्स काटती है। पैन नहीं दिया तो टैक्स 20 फीसदी तक कट सकता है। अगर कोई कंपनी आपको 9 फीसदी ब्याज दे रही है तो इसमें से वह कुछ हिस्सा एजेंटों को भी देती है।
-इसलिए, जमा पर उसकी कुल लागत एजेंटों के कमीशन और आपके ब्याज सहित 12 फीसदी से 10 फीसदी तक पहुंच जाती है। कुछ कंपनियां तो एजेंटों को 20 फीसदी तक कमीशन देती हैं। ऐसे में आपके पैसे पर बड़ा जोखिम रहता है।
जरूर करें कंपनी की जांच-पड़ताल
कॉरपोरेट एफडी में निवेश से पहले कंपनी की जांच-पड़ताल जरूर करें। क्रेडिट रेटिंग तो एक पैमाना है। इसके अलावा, कंपनी के मुनाफे या उसके डिफॉल्ट जैसे मामलों को भी देखें। कंपनी के प्रबंधन और उसके कारोबार मॉडल को देखें। बहीखाता के साथ बुरे फंसे कर्ज और उसका ट्रैक रिकॉर्ड देखें। कंपनी का आगे का प्लान भी देखें कि कैसे वह आपके निवेश को प्रभावित कर सकती है।
दूर रहें छोटे निवेशक लंबी अवधि से बचें
कॉरपोरेट एफडी में उन्हीं निवेशकों को ही निवेश करना चाहिए, जो बहुत ज्यादा जोखिम लेने में सक्षम हैं। निवेशकों को दो बातें ध्यान में रखना चाहिए। पहला, ज्यादा ब्याज के बाद भी सभी पैसों को कॉरपोरेट एफडी में रखने से बचें। दूसरा, ऐसे साधनों में कम से मध्यम अवधि के लिए ही निवेश करें। छोटे निवेशकों को इस साधन में निवेश से बचना चाहिए। -अर्चना पांडे, वित्तीय सलाहकार