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फरवरी में गिरी मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की वृद्धि दर, लेकिन बुनियाद तब भी मजबूत
Mon, 02 Mar 2020 01:57 PM IST
डिंपल अलवधी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: डिंपल अलवधी
Updated Mon, 02 Mar 2020 01:57 PM IST
सार
चीन के वुहान शहर में से शुरू हुआ कोरोनावायरस का कहर वैश्विक स्तर पर बढ़ता ही जा रहा है। इसका असर असर फरवरी माह के दौरान भारत में विनिर्माण गतिविधियों पर देखा गया।
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विस्तार
फरवरी 2020 में भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर से जुड़ी गतिविधियों की रफ्तार सुस्त रही। हालांकि, फिर भी कुल-मिलाकर परिस्थितियां मजबूत बनी हुई हैं। इस संदर्भ में सोमवार को एक मासिक सर्वेक्षण जारी किया गया, जिसके अनुसार, आईएचएस मार्किट इंडिया के विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) फरवरी 2020 में 54.5 पर रहा।
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लगातार 31वें महीने PMI 50 अंक के स्तर से ऊपर
यह आंकड़ा जनवरी 2020 के 55.3 अंक के मुकाबले नीचे है। बता दें कि जनवरी में यह पिछले आठ साल में सबसे ज्यादा था। यह लगातार 31वां महीना है जब भारत में विनिर्माण क्षेत्र का पीएमआई 50 अंक के स्तर से ऊपर बना हुआ है। पीएमआई की गणना 50 अंक से ऊपर रहना क्षेत्र में विस्तार को बताता है जबकि 50 से नीचे रहना गिरावट को दर्शाता है।
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फरवरी में 54.5 अंक पर रहा पीएमआई
फरवरी में यह आंकड़ा 54.5 अंक पर रहा, जो कि क्षेत्र में विस्तार जारी रहना बताता है। हालांकि, यह विस्तार जनवरी के मुकाबले कुछ सुस्त रहा है। इस संदर्भ में आईएचएस मार्किट की प्रधान अर्थशास्त्री पालियाना डि लीमा ने कहा कि, 'भारत में कारखानों में फरवरी के दौरान बेहतर आर्डर मिलने की वजह से गतिविधियां बेहतर रहीं। कारखानों में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों बाजारों से आर्डर प्राप्त हुए। मांग में आ रहे इस सुधार से यह तात्पर्य लगाया जा सकता है कि कारखानों में उत्पादन बढ़ेगा और कच्चे माल की खरीदारी भी एतिहासिक रूप से काफी ऊंची दर से होगी।'
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