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कोरोना का असर: महामारी में बड़ी कंपनियों की बंपर कमाई, छोटी हो गईं बर्बाद

Fri, 18 Jun 2021 07:15 AM IST
देव कश्यप अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली Published by: देव कश्यप Updated Fri, 18 Jun 2021 07:15 AM IST
सार

  • रिजर्व बैंक की रिपोर्ट, आधे से ज्यादा छोटे-मझोले उद्यमों पर संकट, जुलाई से लागत में कटौती
  • 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ संक्रमण की दूसरी लहर से अब तक

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Coronavirus Impact: Big companies bumper earnings in Pandemic, small got ruined
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : Twitter

विस्तार

कोविड-19 महामारी का दौर बड़ी कंपनियों के लिए अवसर साबित हो रहा है, जबकि छोटी कंपनियां इस आपदा की शिकार बन गईं। संक्रमण की पहली लहर के बाद बड़ी कंपनियों के कारोबार में ताबड़तोड़ वृद्धि दिखी, तो दूसरी ओर छोटे उद्यमों और दुकानदारों को धंधा बंद कर देना पड़ा।

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रिजर्व बैंक ने हालिया मासिक रिपोर्ट में बताया कि अक्तूबर 2020 के बाद उबरने की कोशिश में लगे उद्यमों को दूसरी लहर ने फिर बड़ा नुकसान पहुंचाया। इस दौरान अर्थव्यवस्था के उत्पादन को 2 लाख करोड़ रुपये की चपत लगी। इस बार छोेटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में असर दिखा, जिससे छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट हो गया।
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लोकल सर्किल की रिपोर्ट के मुताबिक, महामारी में देशभर में मोबाइल की 10 हजार दुकानें बंद हो चुकी हैं, जो इसकी कुल संख्या का करीब 8 फीसदी है। इनकी जगह बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों ने ले ली। देश के 49 फीसदी स्टार्टअप और एमएसएमई के पास फंड नहीं बचा और वे जुलाई से काम बंद करने, लागत घटाने और कर्मचारियों की संख्या कम करने पर विचार कर रहे हैं। 22 फीसदी के पास तीन महीने का फंड बचा है, जबकि 41 फीसदी के पास महज एक महीने धंधा चलाने का फंड है।
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बड़ी कंपनियों का मुनाफा 1.81 लाख करोड़
सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकनॉमी के अनुसार, महामारी के दौरान बड़ी कंपनियों ने अपने अनुबंधों में संशोधन किया, जिसका सीधा असर एमएसएमई पर दिखा। बाजार में सूचीबद्ध 1,481 कंपनियों के 12 जून तक घोषित जनवरी-मार्च तिमाही नतीजों के मुताबिक इनका कुल शुद्ध मुनाफा 1.81 लाख करोड़ रुपये रहा। यह पिछली तिमाही के रिकॉर्ड मुनाफे से भी 15 फीसदी ज्यादा है। इससे साफ जाहिर है कि छोटे उद्यमों और दुकानदारों का कारोबार लॉकडाउन ने खत्म कर दिया, जिसकी जगह बड़ी कंपनियों ने ले ली।

रोजगार पर मार, वर्क फ्रॉम होम ने बिगाड़ा गणित
अर्थशास्त्रियों के अनुसार, किसी अर्थव्यवस्था में जब छोटी कंपनियों का आकार बढ़ता है तो रोजगार के ज्यादा मौके पैदा होते हैं। महामारी के बाद भारत में छोटी कंपनियों का कारोबार सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ, जिसने रोजगार के अवसर भी घटा दिए। इसके अलावा वर्क फ्रॉम होम जैसी व्यवस्था से कैब और टैक्सी चालकों की कमाई भी ठप हो गई। पिछले 15 महीने से ओला-उबर टैक्सी चालकों की आमदनी लगभग शून्य हो गई, जो ज्यादातर ऑफिस जाने वालों पर निर्भर थी।


3 लाख करोड़ के राहत पैकेज की जरूरत : सीआईआई
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के अध्यक्ष टीवी नरेंद्रन ने कहा है कि दूसरी लहर के बाद अर्थव्यवस्था को उबारने के लिए 3 लाख करोड़ का राहत पैकेज चाहिए। इसमें जन-धन खातों के जरिये लोगों के हाथों तक नकद राशि भी पहुंचानी होगी। भारतीय अर्थव्यवस्था उपभोक्ता और खपत पर आधारित है, लिहाजा खातों में नकद ट्रांसफर मांग बढ़ाने में मददगार होगा। इसके अलावा मनरेगा में ज्यादा आवंटन, कुछ समय के लिए जीएसटी में कटौती, आयकर व शुल्क से छूट, मकान खरीदने वालों के लिए स्टांप शुल्क में कटौती और कम ब्याज दर जैसी राहतें भी देनी होंगी। ईंधन पर उत्पाद शुल्क खत्म कर कुछ समय के लिए बड़ी राहत दी जा सकती है।

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