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संकट बना कोरोना: क्या भारत में पूरी होगी ऑक्सीजन की कमी? सरकार व कंपनियों ने उठाए ये कदम

Sun, 02 May 2021 10:05 AM IST
‌डिंपल अलावाधी बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: ‌डिंपल अलावाधी Updated Sun, 02 May 2021 10:05 AM IST
सार

महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच देश में ऑक्सीजन की किल्लत हो गई है। ऐसे में केंद्र सरकार वे कंपनियों ने सभी मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं।

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coronavirus cases oxygen shortage in India government companies and countries helping India
देश में ऑक्सीजन की कमी - फोटो : pixabay

विस्तार

कोरोना के तेजी से बढ़ते मरीजों से स्थिति एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। इस स्थिति से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग हर संभव प्रयास कर रहा है। लेकिन देश में कोरोना वायरस की दूसरी लहर बेकाबू हो गई है। महामारी के बढ़ते प्रकोप के बीच देश में ऑक्सीजन की किल्लत हो गई है। कोरोना मरीजों के लिए ऑक्सीजन संजीवनी का काम रही है, लेकिन देश में ऑक्सीजन के संकट से मरीजों की जान पर आफत मंडराने लगी है। ऐसे में केंद्र सरकार वे कंपनियों ने सभी मरीजों को ऑक्सीजन उपलब्ध कराने के लिए कई कदम उठाए हैं। आइए जानते हैं इनके बारे में।

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सरकार ने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर पर घटाया कर
केंद्र सरकार ने शनिवार को ऑक्सीजन की किल्लत से जूझ रही जनता को थोड़ा राहत देने की कोशिश की। सरकार ने निजी उपयोग के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर (हवा से ऑक्सीजन उत्पादन करने वाला यंत्र) खरीदने पर एकीकृत वस्तु व सेवा कर (आईजीएसटी) घटाकर 28 से 12 फीसदी कर दिया। यह आदेश 30 जून तक लागू रहेगा। केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर व कस्टम बोर्ड ने ट्वीट में कहा, निजी उपयोग के लिए ऑक्सीजन कंसंट्रेटर का आयात करने पर 30 जून तक 28 के बजाय 12 फीसदी आईजीएसटी ही चुकाना होगा। 
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हालांकि व्यवसायिक उपयोग के लिए इस उपकरण को आयात करने पर 28 फीसदी आईजीएसटी ही वसूला जाएगा। केंद्र सरकार ने पिछले महीने मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और इससे जुड़े उपकरणों के आयात पर कस्टम ड्यूटी में छूट देने की घोषणा की थी। शुक्रवार को सरकार ने निजी उपयोग के लिए डाक, कोरियर या ई-कॉमर्स पोर्टलों के जरिए तोहफे की श्रेणी में ऑक्सीजन कंसनट्रेटर आयात करने की छूट दे दी थी।

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अमेरिका भी कर रहा भारत की सहायता 
विश्व के कई देशों और प्रमुख कंपनियों ने कोविड-19 की दूसरी लहर से जूझ रहे भारत को दी जानी वाली आपातकालीन सहायता संबंधी वस्तुओं के उत्पादन एवं आपूर्ति को गति प्रदान की है। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने अपने प्रशासन को महामारी के इस संकट काल में भारत को हरस्भव सहायता मुहैया कराने को कहा है। साथ ही आश्वासन दिया है कि अमेरिका भारत के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा। अमेरिका भारत को ऑक्सीजन सिलिंडर, एन-95 मास्क और टीके के उत्पादन में उपयोग होने वाली सामग्री उपलब्ध करा रहा है। इससे पहले शुक्रवार को चिकित्सा सामग्री एवं उपकरण लेकर दो विमान भारत पहुंचे थे। सिंगापुर ने भी शनिवार को तीन क्रायोजेनिक तरल ऑक्सीजन टैंकर भारत भेजे। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सिंगापुर के अपने समकक्ष को फोन कर सहायता के लिए आभार जताया।

भारत को 20 ऑक्सीजन प्लांट दान में देगी वॉलमार्ट 
प्रमुख अमेरिकी कंपनी वॉलमार्ट ने भारत को 20 ऑक्सीजन उत्पादन संयंत्र एवं 20 क्रायोजेनिक कंटेनर दान करने की घोषणा की है। कंपनी ने महामारी से निपटने में सहायता के तौर पर गैर-सरकारी संगठनों को 20 लाख डॉलर की राशि प्रदान करने की बात भी कही है। इसके साथ ही 3,000 से अधिक ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और 500 ऑक्सीजन सिलिंडर भी दिए जाएंगे।

वहीं, भारत में चीनी राजदूत सुन वीडोंग ने कहा कि चीन ने भारत की तरफ से ऑर्डर किए गए 40,000 और ऑक्सीजन सांद्रक के उत्पादन एवं आपूर्ति को लेकर प्रयास तेज किए हैं।

ऑक्सीजन सुविधायुक्त 10,000 बेड स्थापित करेंगी इस्पात कंपनियां
सरकार ने इस्पात कंपनियों को निर्देश दिया है कि वे कोविड-19 रोगियों के इलाज के लिए 10,000 ऑक्सीजन सुविधा वाले बेड स्थापित करें। इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने हाल ही में कहा था कि 5,000 बेड सार्वजनिक उपक्रम की इस्पात कंपनियों के द्वारा स्थापित किए जाएंगे, जबकि अन्य 5,000 की स्थापना टाटा स्टील, जेएसपीएल, जेएसडब्ल्यू स्टील और एएमएनएस इंडिया जैसी निजी कंपनियों द्वारा की जाएगी। उन्होंने कोविड-19 महामारी से लड़ने में इस्पात उद्योग के योगदान को बढ़ाने के लिए सार्वजनिक और निजी दोनों क्षेत्रों के इस्पात उद्योग के अग्रणी लोगों के साथ आयोजित बैठकों की एक श्रृंखला के बारे में जानकारी दी।

कंपनियों को इस्पात संयंत्रों से तरल चिकित्सा ऑक्सीजन की आपूर्ति बढ़ाने के लिए जो भी संभव हो करने के लिए कहा गया है, जिसमें संयंत्रों से अस्पतालों तक सीधे गैसीय ऑक्सीजन की आपूर्ति शामिल है। सरकारी स्वामित्व वाली सेल और आरआईएनएल तथा टाटा स्टील, जेएसडब्ल्यू स्टील, जेएसपीएल और एएमएनएस इंडिया जैसे निजी इस्पात कंपनियां देश भर में विभिन्न स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए ऑक्सीजन की आपूर्ति कर रहे हैं।

कमी दूर करने के लिए रिलायंस भी आई आगे
ऑक्सीजन की कमी दूर करने के लिए रिलायंस भी आगे आई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने अपने जामनगर रिफाइनरी से विभिन्न राज्यों में लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन यानी एलएमओ की सप्लाई तेज कर दी है। जामनगर तेल रिफाइनरी में हर रोज 1000 MT से अधिक मेडिकल-ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन कर रहा है। यहऑक्सीजन कोविड-19 से बुरी तरह प्रभावित राज्यों को मुफ्त में दी जा रही है। रिलायंस इंडस्ट्री लिमिटेड के चेयरमैन मुकेश अंबानी खुद ही पूरे मामले की निगरानी कर रहे हैं। रिफाइनरी में ऑक्सीजन उत्पादन से लेकर उसकी लोडिंग और सप्लाई पर मुकेश अंबानी नजर बनाए हुए हैं। 

11 फीसदी मेडिकल ऑक्सीजन अकेले रिलायंस कर रहा उत्पादन
रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड ने जामनगर रिफाइनरी के जरिए एलएमओ का उत्पादन 1000 मीट्रिक ट्रन बढ़ा दिया है। 1000 मीट्रिक टन ऑक्सीजन 1 लाख से अधिक लोगों की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखता है। रिलायंस आज भारत की करीब 11 फीसदी मेडिकल ग्रेड ऑक्सीजन का उत्पादन अकेले कर रहा है और हर दस में से एक रोगी को ऑक्सीजन दी जा रही है। पिछले दिनों आरआईएल की ओर से एलएमओ का उत्पादन 700 मीट्रिक टन किया गया था। 

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