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RBI: 'वृद्धि दर को समर्थन देने के लिए जो भी जरूरी हो, करते रहेंगे', MPC की बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर का एलान

Wed, 06 Aug 2025 03:09 PM IST
कुमार विवेक बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 06 Aug 2025 03:09 PM IST
सार

RBI MPC Meeting Announcement: भारत ने हाल ही में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ एक व्यापक व्यापार समझौता किया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूजीलैंड सहित कई देशों के साथ इसी तरह के समझौतों पर बातचीत चल रही है। इसबीच, एमपीसी के फैसलों का एलान करते हुए केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने टैरिफ से नुकसान और वृद्धि दर पर टिप्पणी की है। आइए इस बारे में विस्तार से जानें।

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Continue to do whatever required to support growth: RBI Governor
आरबीआई एमपीसी - फोटो : amarujala.com

विस्तार

वैश्विक व्यापार के मोर्चे पर अनिश्चितताओं के बीच भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार एमपीसी में लिए गए फैसलों का एलान किया। इसके बाद, गवर्नर मल्होत्रा ने  आने वाले समय में आरबीआई की भूमिका पर भी बात की। उन्होंने कहा कि केंद्रीय बैंक आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने के लिए सभी जरूरी कदम उठा रहा है।

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अमेरिका से व्यापार वार्ता जारी, सौहार्दपूर्ण समाधान की उम्मीद

संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति के एलान के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा, "ऐसी स्थिति (टैरिफ) को देखते हुए वृद्धि दर को समर्थन देने के लिए जो भी करना आवश्यक होगा, हम करते रहेंगे। बेशक, व्यापार वार्ता अब भी जारी है। हमें उम्मीद है कि हम एक सौहार्दपूर्ण समाधान पर पहुंच जाएंगे।"

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उन्होंने कहा कि आरबीआई ने न केवल मौद्रिक नीति या लिक्विडिटी के मामले में बल्कि विवेकपूर्ण विनियमन के मामले में भी विकास को समर्थन देने के लिए कई कदम उठाए हैं। विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम के बारे में उन्होंने कहा, "हमारे पास अब एक मसौदा है जिसे पेश किया जाएगा ताकि कारोबार करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार आसान हो सके।"

ब्रिटेन, यूएई और ऑस्टेलिया के साथ हुआ एक व्यापक व्यापार समझौता

भारत ने हाल ही में ब्रिटेन, संयुक्त अरब अमीरात और ऑस्ट्रेलिया के साथ एक व्यापक व्यापार समझौता किया है। अमेरिका, यूरोपीय संघ, ओमान और न्यूजीलैंड सहित कई देशों के साथ इसी तरह के समझौतों पर बातचीत चल रही है।

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भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार

मल्होत्रा ने यह भी कहा कि भारत के पास पर्याप्त विदेशी मुद्रा भंडार है, जो 11 महीने के आयात का प्रबंध कर सकता है। उन्होंने कहा कि आरबीआई नीति-दर-नीति आधार पर व्यापक आर्थिक स्थितियों की निगरानी करता रहता है और इस आधार पर उचित कदम उठाता है।



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ब्याज दरों में कटौती का असर दिखने में लगता है समय: आरबीआई गवर्नर

उन्होंने कहा, "हमारे देश के विकास के लिए महंगाई स्थिर रखने और आर्थिक विकास का सही संतुलन प्रदान करने के लिए जो भी जरूरी होगा, उसमें हम पीछे नहीं रहेंगे।" वास्तविक अर्थव्यवस्था पर ब्याज दरों में कटौती के प्रभाव के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इसमें देरी होती है। बैंकों की खराब ऋण की स्थिति के संबंध में गवर्नर ने कहा कि बैंकिंग प्रणाली में एनपीए की स्थिति संतोषजनक है, सकल एनपीए 2.2 प्रतिशत है जबकि शुद्ध एनपीए 0.5-0.6 प्रतिशत है।

आरबीआई ने सह-ऋण व्यवस्था पर संशोधित निर्देश जारी किए
भारतीय रिजर्व बैंक ने सह-ऋण व्यवस्था (सीएलए) से जुड़ी संशोधित दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन दिशा-निर्देशों का उद्देश्य ऐसे समझौतों की वैधता को लेकर नियामकीय स्पष्टता प्रदान करना है, साथ ही इससे जुड़े कुछ सावधानीपूर्वक और आचरण संबंधी पहलुओं को भी संबोधित करना है।

आरबीआई ने कहा कि रेगुलेटेड एंटिटीज (REs), जिनमें बैंक, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियांऔर अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान शामिल हैं। अब अन्य आरई के साथ ऋण वितरण के लिए समझौता कर सकते हैं। हालांकि, इसके लिए मौजूदा नियामकीय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।


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