बजट 2019: इस बार पेश होगा अंतरिम बजट, मंत्रालयों में बनी थी भ्रम की स्थिति
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मंत्रालयों में कायम थी भ्रम की स्थिति
हालांकि लग रहा था कि सरकार इस बार आम चुनाव से पहले अंतरिम या फिर वोट ऑन अकाउंट को पेश कर सकती है। वित्त मंत्रालय के प्रवक्ता डी एस मलिक ने पहले बताया था कि इस बार का बजट पूर्ण बजट होगा, जिसे वित्त मंत्री पीयूष गोयल पेश करेंगे। लेकिन इसके बाद भ्रम बढ़ने पर उन्होंने यू-टर्न ले लिया। सुबह मंंत्रालय की तरफ से पत्रकारों को व्हाट्सऐप पर मैसेज भेजकर अंतरिम बजट शब्द का प्रयोग करने से मना किया जा रहा था।
पीआईबी की तरफ से जो बजट कवरेज के लिए आमंत्रण दिया गया है उसमें अंतरिम बजट लिखा है। हालांकि दूसरी तरफ सरकार यह भी कह रही है कि इस बार के बजट में जून 2019 तक के लिए वोट ऑन अकाउंट पेश होगा और नई सरकार बनने के बाद बजट को फिर से पेश किया जाएगा।
क्या होता है अंतरिम बजट
लोकसभा चुनाव से पहले पेश होने वाले इस बजट को हमेशा से ही अंतरिम बजट या फिर वोट ऑन अकाउंट कहा जाता है। यह हर साल पेश होने वाले पूर्ण बजट से काफी अलग होता है। अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट (Vote on Account) में भी थोड़ा सा नीतिगत अंतर होता है।
केवल कुछ महीने के लिए होता है पेश
अंतरिम बजट केवल अप्रैल से शुरू होने वाले वित्त वर्ष के शुरुआती तीन से 5 महीने या फिर चुनाव संपन्न होने तक के लिए बजट को पेश करती है। यह बजट एक खास समय के लिए होता है। पूरे वित्त वर्ष का बजट जो भी कोई नई सरकार सत्ता में आती है वो पेश करती है। यह इसलिए पेश किया जाता है ताकि सरकार की तरफ से होने वाले खर्चों में किसी तरह की कोई कमी न आए।
अंतरिम बजट, वोट ऑन अकाउंट में अंतर
अंतरिम बजट और वोट ऑन अकाउंट में थोड़ा सा अंतर होता है। अगर सरकार कुछ महीनों के लिए खर्चा चलाने के लिए ससंद से मंजूरी मांगती है तो उसे वोट ऑन अकाउंट कहते हैं। वहीं अगर सरकार खर्च के अलावा कमाई का ब्यौरा भी पेश करती है, तो उसके अंतरिम बजट भी कहा जाता है।
नीतिगत फैसले लेने की बाध्यता नहीं
अंतरिम बजट में सरकार आम तौर पर कोई नीतिगत फैसला नहीं लेती है लेकिन इसके लिए किसी तरह की कोई संवैधानिक बाध्यता नहीं है। इतिहास में कई बार पूर्व सरकारों के वित्तमंत्रियों ने अंतरिम बजट में भी कई तरह के नीतिगत फैसले लिए हैं। हालांकि नई सरकार सत्ता में आने के बाद इनको बदल सकती है।