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सितंबर में घटी बेरोजगारी दर, उद्योगों में बढ़ा उत्पादन लेकिन नहीं मिल रहे खरीदार, ये है वजह

Wed, 30 Sep 2020 08:07 PM IST
Harendra Chaudhary अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली
अमित शर्मा, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 30 Sep 2020 08:07 PM IST
सार

बाजार विश्लेषकों के मुताबिक बिजली, पेट्रोल, कोयले की खपत में सुधार बाजार के सुधरने के संकेत, लेकिन रोजगार को लेकर अनिश्चितता से खर्च करने से बच रहे लोग...

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CMIE Report revealed, Unemployment rate fall to 6.7 percent at end of September, middle class hesitant to spend
बाजारों में उमड़ी भीड़ - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रोजगार के मोर्चे पर अर्थव्यवस्था में सुधार दिखाई पड़ रहा है। वर्तमान समय में राष्ट्रीय स्तर पर बेरोजगारी दर घटकर 6.7 फीसदी पर आ गई है। जुलाई में बेरोजगारी दर 7.4 फीसदी और अगस्त महीने में 8.3 फीसदी दर्ज की गई थी। इस लिहाज से सितंबर माह के अंत में बेरोजगारी दर के 6.7 फीसदी पर आने को अर्थव्यवस्था मेंं सुधार के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इसे अगले दो महीने के त्योहारी सीजन के लिए उद्योग जगत की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है।

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शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की स्थिति में सुधार

सेंटर फॉर मॉनिटरिंग इंडियन इकॉनॉमी (CMIE) के आंकड़ों के मुताबिक इस माह के अंत तक (29 सितंबर) देश के शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 8.5 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी दर 5.8 फीसदी तक पहुंच गई है। शहरी क्षेत्रों में बेरोजगारी की स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन अभी भी यह संकटपूर्ण स्थिति में है। लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में इस समय कृषि के कामकाज में तेजी आ चुकी है। धान की फसलों की कटाई शुरू हो चुकी है तो आलू-गेहूं की बुवाई का कामकाज भी तेजी पर है। यही कारण है कि ग्रामीण इलाकों में बेरोजगारी दर में तेजी से कमी आई है।

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बड़ा व्यापार नहीं देख रहे व्यापारी

भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के महामंत्री वीके बंसल ने अमर उजाला को बताया कि बड़े उद्योगों के उत्पादन स्तर में तेज सुधार हुआ है। अनेक क्षेत्रों में अब यह 70-80 फीसदी तक पहुंच चुका है। बिजली, पेट्रोल, कोयले की खपत में तेजी उद्योगों में सुधार के संकेत हैं। श्रमिकों की कमी भी पूरी हो रही है। बाजार में ग्राहक पहुंच रहा है। ऐसे में अर्थव्यवस्था में सुधार की स्थिति अवश्य दिख रही है। लेकिन अभी भी यह अपेक्षा के अनुरूप नहीं है।

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लोग बाजार में पैसा खर्च करने से बच रहे हैं

केंद्र सरकार के संकेतों का रुख भांपते हुए मध्यम वर्ग अभी भी खर्च करने से बच रहा है। यही कारण है कि बैंकों में जमाधन बढ़ रहा है, लेकिन इसके बाद भी लोग बाजार में पैसा खर्च करने से बच रहे हैं। मध्य वर्ग की यह मानसिकता और रोजगार को लेकर लोगों की अनिश्चितता उन्हें बाजार में खर्च बढ़ाने से रोक रही है। अनेक जगहों पर लगे प्रतिबंधों के कारण उच्चवर्ग के खर्च भी सीमित हैं। यही कारण है कि त्योहारी सीजन करीब आने के बाद भी बाजार में अपेक्षाकृत तेजी नहीं दिखाई पड़ रही है।

अगले छह महीने जारी रहेगा उद्योगों का संघर्ष

आने वाले त्योहारी सीजन में भी व्यापारी व्यापार की बहुत बेहतर तस्वीर नहीं देख रहे हैं। एक अन्य व्यापारी नेता विजय प्रकाश जैन का कहना है कि अब तक सभी व्यापारी त्योहारी सीजन की खरीद पूरी कर चुके हैं। लेकिन इसके बाद भी अभी अपेक्षा के अनुरूप उत्पादन और खपत शुरू नहीं हो सकी है। अगले दो-तिमाही या वर्ष 2021 की पहली तिमाही तक बाजार के इसी रूख पर बने रहने के आसार हैं।

केंद्र के पैकेज का बड़ा असर नहीं

केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस बात के संकेत दिए हैं कि अगर आवश्यकता पड़ी तो सरकार एक और आर्थिक पैकेज पर विचार कर सकती है। लेकिन व्यापारियों का कहना है कि सरकार के इन पैकेजों का जमीनी असर नहीं दिख रहा है। इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि बाजार में मांग में कमी बनी हुई है। जब तक बाजार में मांग नहीं बढ़ती है, कारोबारी कर्ज लेने से बचेंगे। इससे कर्ज उपलब्ध कराने से भी अर्थव्यवस्था में तेजी आने की संभावना नहीं बनेगी।

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