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चिकन के बराबर पहुंची प्याज की कीमत, कोलकाता में 150 के करीब

Wed, 04 Dec 2019 11:35 AM IST
paliwal पालीवाल बिजनेस डेस्क, अमर उजाला
बिजनेस डेस्क, अमर उजाला Published by: paliwal पालीवाल Updated Wed, 04 Dec 2019 11:35 AM IST
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chicken is cheaper than onion, prices reaches near to 150 rupees per kg in several cities

देश के कई बड़े शहरों में प्याज की कीमत चिकन के बराबर पहुंचने वाली है। हालांकि इसकी कीमत जल्द ही 150 रुपये के पार जा सकती है, क्योंकि थोक कीमतें 135 रुपये हो चुकी हैं। वहीं ऑनलाइन ग्रॉसरी बेचने वाली कंपनियां प्याज को काफी सस्ती कीमतों पर बेच रही हैं। चिकन की कीमत बाजार में 160 रुपये के करीब है। 

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उपभोक्ता मंत्रालय ने घटाई स्टॉक लिमिट

वहीं उपभोक्ता मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से प्याज बेचने वाले खुदरा और थोक व्यापारियों के लिए स्टॉक लिमिट को घटा दिया है। अब थोक व्यापारी 25 टन और खुदरा व्यापारी पांच टन से ज्यादा प्याज नहीं रख सकेंगे। हालांकि प्याज का आयात करने वालों पर किसी तरह की कोई सीमा लागू नहीं होगी। 

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इन शहरों में भाव 130 रुपये किलो

देश के कई बड़े शहरों में प्याज की खुदरा कीमत 130 रुपये प्रति किलो के पार चली गई है। दिल्ली, कोलकाता, चेन्नई, मुंबई, पुणे और ओडिशा में इस कीमत पर प्याज मिल रहा है। वहीं देश के अन्य शहरों में प्याज 90 से 100 रुपये प्रति किलो पर मिल रहा है। 

बिगड़ा रसोई का बजट

प्याज की कीमतों ने आम आदमी की रसोई के साथ ही छोटे-बड़े रेस्टोरेंट और होटल में भी असर देखने को मिला है। रेस्टोरेंट, ढाबों और ऑफिस कैंटीन में सलाद के तौर पर मूली-खीरा दिया जा रहा है। नासिक मंडी में प्याज का थोक भाव 135 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है। कई जगह राज्य सरकारें और नेफेड, मदर डेयरी सफल जैसी संस्थाएं 24 से 60 रुपये किलो की कीमत पर प्याज बेच रहे हैं। 

ऑनलाइन 79 से 98 रुपये कीमत

ऑनलाइन ग्रोसरी प्लेटफॉर्म पर प्याज 79 रुपये से लेकर के 98 रुपये प्रति किलो की दर से प्याज को बेच रही हैं। वहीं कुछ कंपनियां 246 रुपये में दो किलो आलू, एक किलो टमाटर और दो किलो प्याज बेच रही हैं। 

सरकार प्याज की घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और कीमतों में कमी लाने के लिए तमाम कोशिशें कर रही है। पिछले सप्ताह खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री राम विलास पासवान ने सार्वजनिक क्षेत्र की विपणन कंपनी एमएमटीसी को एक लाख टन प्याज का आयात करने का निर्देश दिया था। इसके साथ ही भारत अब प्याज निर्यातक से आयातक बन गया है। 

क्यों बढ़े प्याज के दाम?

इस साल मई के बाद प्याज की कीमतों में काफी इजाफा हुआ है। बीते वर्ष प्याज का बहुत कम उत्पादन हुआ था। इसलिए इसमें बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। बेमौसम बारिश की वजह से प्याज की फसल प्रभावित हुई है। इसके अतिरिक्त कारोबारियों ने सरकार की प्रतिकूल नीतियों को इसका जिम्मेदार ठहराया है।



पहले लासलगांव की कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) के अध्यक्ष जयदत्त होल्कर ने कहा था कि अक्तूबर और नवंबर में बेमौसम वर्षा हुई है, जिसकी वजह से खरीफ में बोई गई फसलों को नुकसान हुआ है। आंध्र प्रदेश और कर्नाटक सहित दक्षिण भारतीय राज्यों में बोई गई शुरुआती किस्म की प्याज आवक को नुकसान पहुंचा है। यही कारण है, जिसकी वजह से बाजार में नई किस्म की प्याज आपूर्ति नहीं है। 

प्याज की सबसे ज्यादा खेती महाराष्ट्र में होती है। भारत में प्याज के कुल उत्पादन का 35 फीसदी प्याज महाराष्ट्र से आता है। सितंबर माह से मध्य प्रदेश, राजस्थान और गुजरात में हो रही बेमौसम बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है। 

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